Child Malnutrition Problem: इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च यानी (ICMR) ने भारत में बच्चों के कुपोषण की मुश्किल और लंबे समय से चली आ रही समस्या पर गहराई से समझने के लिए एक बड़ा और व्यापक रिसर्च शुरू करने वाली है. जानकारी के अनुसार ये रिसर्च चार साल तक चलने वाली मल्टी-स्टेट ट्रायल होगा. इसमें देश के अलग-अलग राज्य, शहर और ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चों को शामिल किया जाने वाला है.
इस रिसर्च करने का मकसद विभिन्न सामाजिक, आर्थिक और भौगोलिक परिस्थितियों में कुपोषण की वास्तविक स्थिति को समझा जा सके. साथ ही ये जानना है कि आखिर बच्चे कुपोषित क्यों हो रहे हैं. इसी के साथ ये भी समझा जाएगा वर्तमान में चल रही सरकारी योजनाएं, जैसे पोषण अभियान या फिर आंगनवाड़ी सेवाएं, ये जमीनी स्तर पर कितनी प्रभावी साबित हो रही हैं. साथ ही कहां सुधार किया जा सकता है और उसकी जरूरत है.
रिसर्च में इन चीजों पर रखी जाएगी नजर
जानकारी के अनुसार इस रिसर्च के दौरान बच्चों की लंबाई, वजन, बॉडी की ग्रोथ, पोषण का स्तर और मेंटली और फिजीकली विकास पर लगातार नजर रखी जाएगी. कई मामलों में गर्भावस्था के समय से लेकर बच्चे के शुरुआती वर्षों तक डेटा इकट्ठा किया जाएगा. जिससे की यह समझा जा सके कि मां के पोषण, जीवनशैली और स्वास्थ्य का बच्चे के विकास पर क्या असर पड़ता है. इसके साथ ही यह भी देखा जाएगा कि बच्चे को मिलने वाला खाना, परिवार की आर्थिक स्थिति, माता-पिता की शिक्षा और साफ-सफाई जैसी बुनियादी सुविधाएं कुपोषण को किस हद तक प्रभावित करती हैं.
कुपोषण आम समस्या नहीं
भारत में कुपोषण एक समान समस्या नहीं है, बल्कि हर क्षेत्र में इसके कारण अलग-अलग हैं. कहीं भोजन की कमी है, तो कहीं सही पोषण के बारे में जानकारी की कमी है, और कहीं परंपरागत खानपान या सामाजिक मान्यताएं भी इसकी वजह बनती हैं. यही कारण है कि अब तक एक जैसा समाधान हर जगह पूरी तरह सफल नहीं हो पाया. ICMR का यह अध्ययन इन सभी विविध कारणों को वैज्ञानिक तरीके से समझकर ऐसे समाधान विकसित करने में मदद करेगा जो स्थानीय जरूरतों के अनुसार हों और ज्यादा प्रभावी साबित हों.
इस रिसर्च से मिलने वाले डेटा और निष्कर्ष सरकार और नीति-निर्माताओं के लिए बेहद महत्वपूर्ण होंगे. इनके आधार पर भविष्य में ऐसी योजनाएं बनाई जा सकेंगी जो न केवल कुपोषण को कम करें, बल्कि बच्चों के संपूर्ण विकास शारीरिक, मानसिक और बौद्धिक को भी बेहतर बनाएं. कुल मिलाकर, ICMR का यह चार साल का अध्ययन भारत में बच्चों के कुपोषण के खिलाफ लड़ाई में एक मजबूत और निर्णायक कदम माना जा रहा है, जो आने वाले समय में लाखों बच्चों के स्वास्थ्य और भविष्य को बेहतर बनाने में अहम भूमिका निभा सकता है.
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(Disclaimer: यहां दी गई सलाह और ये कॉन्टेंट केवल सामान्य जानकारी के लिए पेश किया गया है. यानी ये जानकारी किसी भी तरह से डॉक्टर्स राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए आप किसी एक्सपर्ट्स या फिर जिस समस्या से जूझ रहे हैं, उस क्षेत्र के डॉक्टर से सलाह लेने के बाद ही उस एडवाइस पर अमल करें. Fit Rahe India इस जानकारी के लिए किसी भी जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)


