Delhi TB Screening: भारत में टीबी की बीमारी पर रोकथाम लगाने के लिए सरकार कई प्रयास में जुटी हुई है. इसी क्रम में टीबी से जंग लड़ने के लिए एक खास अभियान चलाया जा रहा है. अब इस अभियान से एक बड़ी जानकारी सामने आई. महज छह हफ्तों में 12 हजार से भी अधिक टीबी से ग्रसित मरीजों की पहचान हुई है. जानकारी के अनुसार ये आंकड़े 24 मार्च से 5 मई तक चलाए गए ‘टीबी मुक्त भारत अभियान 2.0’ के तहत सामने आए.
दरअसल दिल्ली हेल्थ डिपार्टमेंट की ओर से 24 से 5 मई तक इस खास अभियान के तहत स्क्रीनिंग ड्राइव चलाई गई थी. जिसका मकसद था टीबी के मरीजों की पहचान करना उन तक इलाज पहुंचाना. जानकारी मिली कि कुल 12,078 मामले सामने इस स्क्रीनिंग ड्राइव के जरिए सामने आए हैं. हालांकि ये अभियान थमा नहीं. अभी भी ये अभियान जारी है. यानी अभी और भी मरीजों के बड़ी संख्या में सामने आने की उम्मीद जताई जा रही है.
इन इलाकों में नजर आए मामले
सवाल आता है कि आखिर इतने अधिक मामले किस इलाकों से सामने आए. जानकारी मिली कि दिल्ली के स्लम इलाकों में, भीड़भाड़ वाली बस्तियां जहां अधिक हैं. उन इलाकों में हाई रिस्क अधिक देखा गया है. ऐसे इलाकों में बड़े स्केल पर स्क्रीनिंग की गई. जिससे ये जानकारी मिली कि हजारों मरीज ऐसे थे जो टीबी से ग्रसित हैं. वहीं इस खास कार्यक्रम में जिन 12 हजार मरीजों की पुष्टि हुई है उनमें 1,323 बच्चे भी शामिल हैं. 10,755 अडल्ट्स मरीज पाए गए. 6,360 पुरुष मरीज और 5,715 महिलाएं मरीज पाए गए. वहीं तीन ट्रांसजेंडर भी टीबी की बीमारी से संक्रमित पाए गए.
इन इलाकों पर रहेगा खास फोकस
वहीं इस अभियान के तहत स्लम इलाकें, रैन बसेरे, जे.जे कॉलोनी, नशा मुक्ति केंद्र, वृद्धाआश्रम और ऐसे इलाकें जहां कई आबादी होगी. ऐसे इलाकों में खास फोकस किया जाने वाला है. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार 24 मार्च से 4 मई तक 984 आयुष्मान आरोग्य शिविर अब तक आयोजित किए गए हैं. वहीं हाई रिस्क वार्ड और इलाकों में 224 शिविर का आयोजन किया गया है. वहीं जेलों वृद्धाआश्रमों में 79 खास शिवर का आयोजन किया गया है. जिसके तहत अह तक 71 हजार से भी अधिक लोगों की स्क्रीनिंग की जा चुकी है.
क्या 100 दिनों बाद बंद हो जाएगी स्क्रीनिंग?
सरकार द्वारा ये अभियान कुल 100 दिनों तक चलाया जाने वालाहै. लेकिन क्या 100 दिन खत्म होने के बाद स्क्रीनिंग नहीं की जाएगी? तो इसका जवाब है नहीं ऐसा नहीं है. 100 दिनों के बाद भी स्क्रीनिंग जारी रहने वाली है. बता दें कि अभियान के तहत जो लोग धूम्रपान करते हैं, अधिक शराब पीते हैं, एचआईवी, डायबिटीज मरीज, जेलों और वृद्धाश्रमों में रहते हैं, स्लम में रहते हैं, भिखारी, मजजूर, रिक्शा चालक, गिग वर्कर्स. ऐसे लोगों को प्राथमिकता दी जा रही है.
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