Difference Between Anxiety and Depression: क्या आप जानते हैं. भारत में हर साल लाखों लोग चुपचाप एक ऐसी लड़ाई लड़ रहे हैं जिसे दुनिया देख भी नहीं पाती. यह लड़ाई है डिप्रेशन की जो सिर्फ उदासी या फिर सिर्फ मूड स्विंग नहीं है. यह एक ऐसी मानसिक स्थिति है जो इंसान की सोच, शरीर, रिश्तों और भविष्य. सब कुछ बदल सकती है, और सबसे चौंकाने वाली बात है आंकड़ों की.
स्ट्रेस, डिप्रेशन, एंग्जाइटी ये कुछ ऐसे शब्द हैं जिसे आजकल हम अपनी डेली लाइफ में सुन ही लेते हैं. लेकिन जो व्यक्ति इन कंडिशन से गुजर रहे हैं, वहीं बता सकते हैं कि आखिर उन्हें कैसा फील हो रहा है. साल 2025 में WHO की चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई, जिसमें लगभग 50 मिलियन यानी 5 करोड़ भारतियों के डिप्रेशन का शिकार होने की बात सामने आई. इसी रिपोर्ट में ये भी सामने आया कि लगभग 38 मिलियन यानी 3.8 करोड़ भारतीय एंग्जाइटी का शिकार है.
रिपोर्ट में हुआ चौंकाने वाला खुलासा
साल 2023 की एक डेटा रिपोर्ट के अनुसार भारत में कुल 1 लाख 71 हजार 418 लोगों नें सुसाइड की. ये डेटा पिछले कई सालों की तुलना में थोड़ा बड़ा है. हर रोज 31 हजार बार लोग डिप्रेशन या फिर एंग्जाइटी के बारे में इंटरनेट पर सर्च कर रहे हैं. आपको इंटरनेट पर ऐसी कई डेटा रिपोर्ट्स मिल जाएंगी जो ये बता सकती हैं कि कितने लोग इस बारे में पढ़ना या फिर समझना तो चाहते हैं, लेकिन अपनी इस सिचुएशन को किसी के सामने कहने से हिचकते हैं. कई बार ऐसा देखा गया है कि जो व्यक्ति स्ट्रेस, डिप्रेशन, एंग्जाइटी का शिकार होते हैं, वो अकसर अपनी परेशानियां लोगों के साथ शेयर करने में हिचकते हैं.
ऐसी कंडिशन को शेयर नहीं करते लोग
ऐसे कई लोग आपको मिलेंगे जो इस कंडिशन को इसलिए नहीं शेयर करते कि उन्हें लगता है कि सामने वाला व्यक्ति उन्हें जज कर लेगा. या फिर उनके बारे में क्या सोचेगा, इस कारण अपनी प्रॉब्लम को दूसरों के साथ शेयर करने से पहले कई बार सोचते हैं. आज इस वीडियो में आपसे डिप्रेशन और एंग्जाइटी में क्या फर्क होता है, डिप्रेशन के कितने स्टेज होते हैं, इनसे कैसे बचा जाए. इन सभी मुद्दों पर बात करने वाले हैं.
डिप्रेशन के कितने प्रकार | How Many Stages of Depression
सबसे पहले बात करें कि आखिर डिप्रेशन के कितने स्टेज होते हैं. मुख्य तौर पर डिप्रेशन के तीन प्रकार होते हैं… पहला माइल्ड यानी हल्का डिप्रेशन, दूसरा मॉडरेट यानी मीडियम, तीसरा सीवयर यानी गंभीर डिप्रेशन. इसी तरह एंग्जाइटी के भी माइल्ड, मॉडरेट और सीवीयर तीन स्टेज होते हैं.
आप अपनी डेली लाइफ में हो रहे बदलावों को पहचान कर जान सकते हैं कि आखिर आप किस स्टेज में है. जो व्यक्ति माइल्ड डिप्रेशन का शिकार हैं, उन्हें उदासी, एनर्सी कम होना, नींद के पैटर्न में बदलाव होना, काम में मन कम लगना, पीड़ितों को ऐसा लगता है कि उन्हें डेली लाइफ के काम करने में काफी प्रॉब्लम होती है.
मॉडरेट डिप्रेशन में पीड़ित व्यक्ति लगातार उदासी, फोकस करने में कठिनाई, भूख और नींद के पैटर्न में बदलाव होना, ऐसा लगना कि आपकी रिस्पेक्ट कम हो रही है. काम और रिश्तों में असर दिखना, ये सभी समस्याएं माइल्ड डिप्रेशन से गुजर रहे पीड़ितों को सता सकती है..
वहीं जैसा नाम है सीवियर यानी सीरीयस डिप्रेशन के लक्षण भी गंभीर होते हैं जैसे ज्यादा निराश हो जाना, डेली लाइफ के कामकाज को करने में काफी मुश्किलें होना, कुछ केस में साइकोटिक symptoms यानी भ्रम, गलत धारणाएं भी महसूस हो सकती हैं.
यहां देखें पूरा Explainer Video
एंग्जाइटी और डिप्रेशन कैसे अलग? | How Depression and Anxiety Different
इसी तरह हमें आजकल एंग्जाइटी सुनने को मिलता है, जो काफी आम है. हल्का स्ट्रेस या फिर टेंशन में लोग ये मान लेते हैं, कि उन्हें डिप्रेशन है वो एंग्जाइटी का शिकार हो रहे हैं. लेकिन आपको बता दें कि डिप्रेशन और एंग्जाइटी दोनों ही अलग होते हैं… हालांकि एंग्जाइटी के भी तीन ही माइल्ड, मॉडरेट और सीवीयर तीन स्टेज ही होते हैं. माइल्ड में हल्की घबराहट होना, दिल की धड़कन तेज होना, या फिर कंट्रोल्ड स्ट्रेस, यानी आपको स्ट्रेस हो रहा है.
लेकिन आपको पता है कि कितना स्ट्रेस लेना चाहिए कितना नहीं, ऐसी कंडिशन को माइल्ड एंग्जाइटी कंडिशन कहा जाएगा बात करें मॉडरेट की तो मॉडरेट में पीड़ितों को ज्यादा बेचैनी, पीसना, कांपना, फोकस में कमी, इसके कारण डेली वर्क पर इंपैक्ट पड़ना, मॉडरेट में इन समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है. सीवीयर यानी ज्यादा गंभीर स्टेज इस केस में व्यक्ति को सांस लेने में दिक्कत, फोकस खोने जैसा महसूस होना, पैनिक अटैक आना, सोशल और प्रोफेशनल लाइफ में इसका काफी इंपैक्ट आपको पड़ सकता है.
किस सिचुएशन से गुजर रहा सामने वाला व्यक्ति
आपके सामने बैठा व्यक्ति किस सिचुएशन को फेज कर रहा है. ये बता पाना बेहद मुश्किल है. सामने बैठा व्यक्ति आपके साथ हंसकर बात कर रहा होगा, बिल्कुल नॉर्मल व्यक्ति की तरह ही वो अपनी डेली लाइफ को स्पेंड कर रहा होगा. दोस्तों के साथ हंसी मजाक कर रहा होगा. लेकिन आपको फिर भी नहीं पता चलेगा कि वो आखिर अंदर से कैसा महसूस कर रहा है. क्या सिचुएशन उन्हें तंग कर रही है. ये सिर्फ वही जानते हैं. हालांकि किसी भी ऐसी सिचुएशन को अगर आप फेज कर रहे हैं, तो आप मेंटल हेल्थ डॉक्टर की सलाह लेकर थेरेपी, काउंसलिंग, दवाइयां लेकर इसका इलाज कर सकते हैं… इससे जो व्यक्ति इसका शिकार हो रहे हैं, उनकी लाइफ में कई बदलाव देखने को मिल सकते हैं.
फिट रहे इंडिया ने की डॉक्टर से खास बातचीत
एंग्जाइटी या फिर स्ट्रेस आखिर होता क्यों है इसका क्या कारण है? Fit Rahe India की टीम ने इस बारे में डॉ. से खास बातचीत भी की. डॉ. ने बताया कि एक स्ट्रेस की कंडिशन तब सामने आती है जब आप खुदको कॉन्फीडेंट नहीं महसूस करते. आपको लगता है कि आप उस काम को कर नहीं पाएंगे या फिर आपसे कुछ गलत हो जाएगा.
इस तरह आप उस काम को करने से पीछे भागते हैं. उसे करने से टालते हैं. अगर कुछ गलत होगा तो क्या होगा.इस तरह के ख्याल मन में आने लगते हैं. डॉ. का कहना है कि ऐसे ख्याल जब मन में आते हैं, तो हमें स्ट्रेस महसूस होता है. हालांकि इससे डील किया जा सकता है. आप ऐसी सिचुएशन में किसी की हेल्प ले सकते हैं. लेकिन कुछ लोग ऐसा करने से कतराते हैं. क्योंकि उन्हें लगता है कि लोग आपको जज करेंगे. स्ट्रेस पर कंट्रोल पाने के लिए आप Fit Rahe India की इस वीडियो को देख सकते हैं. इस बातचीत में डॉ. ने स्ट्रेस से निपटने के लिए खास उपाय बताया.
(Disclaimer: यहां दी गई सलाह और ये कॉन्टेंट केवल सामान्य जानकारी के लिए पेश किया गया है. यानी ये जानकारी किसी भी तरह से डॉक्टर्स राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए आप किसी एक्सपर्ट्स या फिर जिस समस्या से जूझ रहे हैं, उस क्षेत्र के डॉक्टर से सलाह लेने के बाद ही उस एडवाइस पर अमल करें. Fit Rahe India इस जानकारी के लिए किसी भी जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)


