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क्या फास्टिंग में दिमाग करता है ज्यादा तेज काम? हेल्थ पर पड़ता कितना असर; जानें

Fasting Improves Mental Health: बढ़ते हुए मोटापे पर रोक लगाने के लिए अक्सर एक ही सलाह दी जाती है, कि फास्टिंग करो. फास्टिंग से मोटापा कम करने, शुगर कंट्रोल करने जैसी समस्याओं से छुटकारा कई हद तक मिल सकता है.

Fasting Improves Mental Health: बढ़ते हुए मोटापे पर रोक लगाने के लिए अक्सर एक ही सलाह दी जाती है, कि फास्टिंग करो. फास्टिंग से मोटापा कम करने, शुगर कंट्रोल करने जैसी समस्याओं से छुटकारा कई हद तक मिल सकता है.

लोग ऐसे रूटीन को फॉलो भी कर रहे हैं. कुछ लोग इंटरमिटेंट फास्टिंग या फिर समय- टाइम रेस्ट्रिक्टेड ईटिंग को अपने लाइफस्टाइल के साथ जोड़ रहे हैं. अगर आप ज्यादा खा लें तो परेशानी और न खाएं तो भी परेशानी हो सकती है. आज बात करने वाले हैं अगर खाली रहा जाए तो इससे हमारे दिमाग पर क्या असर पड़ता है.

खाले पेट रहने से दिमाग पर असर

पिछले कई सालों पर अगर गौर किया जाए तो साइंटिस्ट और न्यूरोलॉजिस्ट ने ऐसा पैटर्न देखा है कि सही तरीके से या फिर लिमिटेड समय के लिए फास्टिंग करना हमारे माइंड यानी दीमाग के लिए काफी फायेदमंद साबित होता है. इसलिए अगर जो लोग ऐसा कर रहे हैं, उन्हें सिर्फ शरीर की चर्बी ही नहीं बल्कि माइंड को दुरूस्त करने के भी कई फायदे मिलते हैं.

माइंड की पावर बढ़ा सकती फास्टिंग?

जैसा की बताया कि जो व्यक्ति ऐसे रूटीन को जो लोग फॉलो करते हैं उन्हें सिर्फ चर्बी कम करने ही नहीं बल्कि दीमाग की काम करने की क्षमता, याद रखने की पावर और Mental Clarity को प्रभावित करता है. हालांकि कुछ लोग सिर्फ सुनी सुनाई बातों पर विश्वास करके फास्टिंग शुरू कर देते हैं. हालांकि सोच-समझकर ही इस रूटीन को अपनाना चाहिए.

12 से 16 घंटे न खाने से क्या होगा असर?

अब बात करें कि अगर हम 12 से 16 घंटे की अगर फास्टिंग कर लें तो हमारे शरीर पर इसका क्या असर पड़ेगा. तो बता दें कि जब हम ऐसा करते हैं तब शरीर में जमा ग्लाइकोजन की मात्रा खत्म होने लगती है. जब ऐसा होता है तो शरीर एनर्जी के लिए फैट को जलाना शुरू करता है. इस पूरे प्रोसेस में कीटोन बॉडीज बनती है.

क्या फास्टिंग से फायदे मिलते हैं? | What Are Benefits Of Fasting

  • ब्रेन ग्रोथ में मददगारः सबसे पहला फायदा फास्टिंग का ब्रेन ग्रोथ को मिलता है. यही एक बड़ा फायदा बताया भी जाता है कि इससे बीडीएनएफ नाम का एक प्रोटीन जिसका लेवल काफी बढ़ सकता है. बीडीएनएफ के काम नए ब्रेन सेल्स को बनाने में मदद करना होता है. इतना ही नहीं पुराने सेल्स को सेफ रखने में मदद करता है. स्ट्रेस से निपटने में मदद करता है. आप ऐसा कह सकते हैं कि ये हमारे दिमाग के लिए एक खाद की तरह काम करता है, जो ग्रोथ और मजबूती में आपकी काफी हेल्प करता है.
  • दीमाग को डिटॉक्सः अगर आप फास्टिंग करते हैं, तो इससे आपके माइंड की सफाई करने में काफी हेल्प मिल सकती है. क्योंकि फास्टिंग के दौरान शरीर में मौजूद एक खास प्रोसेस एक्टिव होती है. जिसे ऑटोफैगी कहा जाता है. बता दें कि ऑटोफैगी का मतलब होता है खुद की सफाई. इस पूरे प्रोसेस के दौरान सेल्स अपने अंदर जमा या फिर खराब प्रोटीन को हटाटा है.
  • साफ और स्टेबल एनर्जीः जब दिमाग कीटोन से एनर्जी लेता है, तो वह कम ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस पैदा करता है. ये एक ऐसी कंडिशन है जो उम्र बढ़ने और मेंटली कमजोरी से जुड़ी हुई है.

हर किसी के लिए सेफ नहीं

हालांकि आप किस बीमारी से जूझ रहे हैं या फिर आपकी क्या कंडिशन है. इसपर भी डिपेंड करता है कि आप फास्टिंग कर सकते है या नहीं. अगर आप डायबटिक पेशंट है तो आपके लिए ये पॉसिबल नहीं होगा. प्रेग्नेंसी और ब्रेस्टफीडिंग करवाने वाली महिलाएं, बुजुर्ग, जो व्यक्ति काफी कमजोर हैं या फिर किसी भी बीमारी से जूझ रहे हैं, वो पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें.

यह भी पढ़ें: 30 के बाद गायब हो जाएंगी आपकी मांसपेशियां! क्या है सारकोपेनिया? कैसे कर सकते इसका इलाज, हो जाएं अलर्ट!

(Disclaimer: यहां दी गई सलाह और ये कॉन्टेंट केवल सामान्य जानकारी के लिए पेश किया गया है. यानी ये जानकारी किसी भी तरह से डॉक्टर्स राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए आप किसी एक्सपर्ट्स या फिर जिस समस्या से जूझ रहे हैं, उस क्षेत्र के डॉक्टर से सलाह लेने के बाद ही उस एडवाइस पर अमल करें. Fit Rahe India इस जानकारी के लिए किसी भी जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)

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sarthak arora Senior Sub Editor
अपनी उंगलियों से खबरों को खटाखट लिखना, और लिखने से पहले पढ़ना और समझना. इस तरह पत्रकारिता के क्षेत्र में 7 साल का अनुभव पाया. कार्य जारी है और इसी तरह लिखना, पढ़ना और सीखना निरंतर जारी रहेगा.
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