Divyanka Tripathi IVF Rumours: टीवी की लोकप्रिय अभिनेत्री दिव्यांका त्रिपाठी इन दिनों अपने मातृत्व को लेकर चर्चा में हैं. जुड़वां बच्चों के जन्म की खबर सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर कई लोगों ने दावा करना शुरू कर दिया कि दिव्यांका ने मां बनने के लिए IVF तकनीक का सहारा लिया है. हालांकि, दिव्यांका और उनके पति विवेक दहिया ने इन खबरों को पूरी तरह गलत बताया है.
कपल ने साफ कहा कि उनकी प्रेग्नेंसी प्राकृतिक रूप से हुई है और IVF से जुड़ी खबरों में कोई सच्चाई नहीं है. उनके इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर चल रही अटकलों पर विराम लग गया.
कैसे शुरू हुई IVF की चर्चा?
जैसे ही दिव्यांका और विवेक के घर जुड़वां बेटों के आने की खबर सामने आई, फैंस और टीवी इंडस्ट्री के कई सितारों ने उन्हें बधाई देना शुरू कर दिया। इसी दौरान सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने यह कहना शुरू कर दिया कि यह प्रेग्नेंसी IVF के जरिए हुई है. धीरे-धीरे यह बात इतनी फैल गई कि कई डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर इसे सच की तरह पेश किया जाने लगा. हालांकि, दिव्यांका ने इन सभी दावों को खारिज करते हुए कहा कि बिना पुष्टि के किसी के निजी जीवन को लेकर बातें करना सही नहीं है.
आखिर IVF क्या होता है?
IVF (इन विट्रो फर्टिलाइजेशन) एक ऐसी मेडिकल प्रक्रिया है, जिसमें महिला के अंडाणु और पुरुष के शुक्राणु को शरीर के बाहर लैब में मिलाकर भ्रूण तैयार किया जाता है. इसके बाद उस भ्रूण को महिला के गर्भाशय में स्थापित किया जाता है. यह तकनीक उन दंपतियों के लिए मददगार होती है जिन्हें प्राकृतिक रूप से गर्भधारण करने में परेशानी होती है.
भारत में बढ़ रही है IVF को लेकर जागरूकता
पिछले कुछ वर्षों में भारत में IVF और अन्य प्रजनन तकनीकों को लेकर लोगों में जागरूकता बढ़ी है. अब कई दंपति बिना किसी झिझक के विशेषज्ञों की सलाह लेकर इन तकनीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं. विशेषज्ञों के मुताबिक बढ़ती उम्र, तनावपूर्ण जीवनशैली और कुछ स्वास्थ्य समस्याओं की वजह से कई लोगों को IVF जैसी तकनीकों की जरूरत पड़ सकती है.
कई सेलिब्रिटी भी कर चुके हैं खुलकर बात
मनोरंजन जगत के कई सितारे पहले भी IVF और सरोगेसी जैसे विषयों पर खुलकर अपनी राय रख चुके हैं. कई सेलिब्रिटी कपल्स ने अपनी पैरेंटहुड जर्नी साझा कर लोगों के बीच जागरूकता बढ़ाने का काम किया है. इससे समाज में इन विषयों को लेकर मौजूद झिझक और गलतफहमियां भी कम हुई हैं.
निजी जिंदगी पर अनुमान लगाना ठीक नहीं
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी महिला की प्रेग्नेंसी या मातृत्व यात्रा को लेकर बिना जानकारी के अनुमान लगाना गलत है.इससे न सिर्फ उनकी निजी जिंदगी प्रभावित होती है बल्कि गलत जानकारी भी फैलती है. ऐसे मामलों में हमेशा आधिकारिक बयान और विश्वसनीय जानकारी पर ही भरोसा करना चाहिए.
क्या सिखाता है यह मामला?
दिव्यांका त्रिपाठी का मामला यह दिखाता है कि सोशल मीडिया पर अफवाहें कितनी तेजी से फैल सकती हैं. साथ ही यह भी बताता है कि मातृत्व, IVF और सरोगेसी जैसे विषयों पर आज समाज में पहले से ज्यादा खुलकर चर्चा हो रही है. लेकिन किसी की निजी जिंदगी को लेकर निष्कर्ष निकालने से पहले तथ्यों की जांच करना बेहद जरूरी है.
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