Eye Floaters Symptoms: आंखों की सहेत की बात करें तो आंखों की बहुत सारी समस्या होती है. आज के आर्टिकल में हम बात करेंगे आंखों के सामने नजर आने वाले धब्बों की, जीं हां. आपने अक्सर महसूस किया होगा कि जब आप सफेद दीवार, आसमान, या चमकदार स्क्रीन को देखते समय नजर आते हैं. दरअसल ये एक प्रकार की आंखों की समस्या है. इसे आई फ्लोटर्स (Eye Floaters) कहा जाता है. आमतौर पर ये फ्लोटर्स नुकसान नहीं पहुंचाते, लेकिन आंखों के डॉक्टर कहते हैं कि अगर बड़ी संख्या में फ्लोटर्स दिखने लगे तो सावधान हो जाने की जरूरत है. ऐसे में तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है. पहले आई फ्लोटर्स को बढ़ती उम्र की निशानी मानी जाती थी, लेकिन अब कम उम्र के लोगों में भी इसके मामले तेजी से बढ़ रहे हैं. इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं.
आंखों में कई तरह की समस्याएं हो सकती हैं, जैसे मायोपिया (दूर की चीजें धुंधली दिखना), हाइपरोपिया (पास की चीजें धुंधली दिखना), अस्टिग्मैटिज्म, मोतियाबिंद, ग्लूकोमा, ड्राई आई, आई फ्लोटर्स और कंजंक्टिवाइटिस. कई मामलों में आई फ्लोटर्स को मायोपिया से जोड़कर देखा जाता है. लेकिन दोनों में बहुत बड़ा अंतर है. आज के आर्टिकल में हम जानेंगे कि दोनों के बीच क्या बड़ा अंतर है? वहीं जानेंगे कि क्या होता है आई फ्लोटर्स, कब डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए?
क्या है आई फ्लोटर्स ?
आंख के अंदर एक जेल जैसी पारदर्शी पदार्थ होती है, जिसे विट्रियस (Vitreous) कहते हैं. बढ़ती उम्र के साथ यह जेल सिकुड़ने लगती है और इसके छोटे-छोटे कण आपस में चिपककर छाया बनाते हैं. यही छाया रेटिना पर पड़ती है और फ्लोटर्स के रूप में दिखाई देती है. कुछ फ्लोटर्स सामान्य होते हैं और कई लोगों को समय-समय पर दिखाई देते हैं, हालांकि कुछ मामलों में इनका संबंध रेटिना में छेद या रेटिना डिटेचमेंट जैसी समस्याओं से भी हो सकता है.
आई फ्लोटर्स के सामान्य कारण
- बढ़ती उम्र
- आंखों की चोट
- अत्यधिक नजदीक का चश्मा (मायोपिया)
- आंखों की सर्जरी के बाद
- आंख के अंदर सूजन
- डायबिटीज से जुड़ी आंखों की समस्याएं
- रेटिना में खिंचाव या फटना
क्या आई फ्लोटर्स का इलाज जरूरी है?
अधिकांश मामलों में आई फ्लोटर्स हानिकारक नहीं होते हैं और इलाज की जरूरत नहीं पड़ती. समय के साथ दिमाग इन्हें नजरअंदाज करना सीख जाता है. लेकिन यदि फ्लोटर्स बहुत ज्यादा हों और देखने में बाधा डालें, तो डॉक्टर से सलाह जरूर लें. कुछ मामलों में डॉक्टर उपचार या सर्जरी की सलाह दे सकते हैं. आंखों की सुरक्षा के लिए नियमित जांच कराना, ज्यादा स्क्रीन इस्तेमाल करने पर बीच-बीच में ब्रेक लेना, बाहर समय बिताना और आंखों को चोट से बचाना जरूरी माना जाता है.
मायोपिया और आई फ्लोटर्स में अंतर
आई फ्लोटर्स और मायोपिया दोनों आंखों से जुड़ी समस्याएं हैं, लेकिन इनका कारण और प्रभाव अलग होता है. आई फ्लोटर्स में आंखों के सामने छोटे-छोटे काले धब्बे, धागे या जाले तैरते हुए दिखाई देते हैं. यह आंख के अंदर मौजूद विट्रियस जेल में बदलाव के कारण होता है और आमतौर पर देखने की क्षमता को सीधे प्रभावित नहीं करता. वहीं मायोपिया (निकट दृष्टिदोष) में पास की चीजें साफ दिखती हैं, लेकिन दूर की वस्तुएं धुंधली नजर आती हैं. यह आंख के आकार या कॉर्निया की बनावट में बदलाव के कारण होता है और इसे चश्मे या लेंस से सुधारा जा सकता है.
यह भी पढ़ें: चिकनगुनिया के खिलाफ गौ मूत्र अर्क असरदार? IIT रुड़की की स्टडी में 99.85% तक वायरल लोड घटने का दावा
(Disclaimer: यहां दी गई सलाह और ये कॉन्टेंट केवल सामान्य जानकारी के लिए पेश किया गया है. यानी ये जानकारी किसी भी तरह से डॉक्टर्स राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए आप किसी एक्सपर्ट्स या फिर जिस समस्या से जूझ रहे हैं, उस क्षेत्र के डॉक्टर से सलाह लेने के बाद ही उस एडवाइस पर अमल करें. Fit Rahe India इस जानकारी के लिए किसी भी जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)

