HIV lung transplant: अमेरिका में डॉक्टरों ने एक ऐसी ऐतिहासिक सर्जरी को सफल बनाया है, जो HIV से पीड़ित मरीजों के लिए नई उम्मीद लेकर आई है. न्यूयॉर्क स्थित NYU लैंगोन हेल्थ के डॉक्टरों ने पहली बार एक HIV-पॉजिटिव डोनर के फेफड़े को HIV-पॉजिटिव मरीज में सफलतापूर्वक ट्रांसप्लांट किया है.
इस उपलब्धि को चिकित्सा जगत में एक बड़ा कदम माना जा रहा है, क्योंकि इससे HIV मरीजों के लिए ऑर्गन ट्रांसप्लांट के विकल्प बढ़ सकते हैं और उन्हें जल्दी डोनर मिलने की संभावना भी बढ़ेगी.
खास रिसर्च प्रोग्राम के तहत हुई सर्जरी
जानकारी के अनुसार इस ट्रांसप्लांट को 21 मार्च 2026 को अमेरिका के फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन यानी (FDA) की मंजूरी वाले एक विशेष रिसर्च प्रोटोकॉल के तहत किया गया था. NYU लैंगोन ट्रांसप्लांट इंस्टीट्यूट की क्लिनिकल डायरेक्टर डॉ. सपना मेहता ने कहा कि यह HIV समुदाय के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है. इससे अंग प्रत्यारोपण के क्षेत्र में समान अवसर देने की दिशा में बड़ी प्रगति हुई है.
HIV के साथ कई बीमारियों से जूझ रहे थे मरीज
वहीं जिस मरीज को यह लंग ट्रांसप्लांट मिला, उनका नाम बर्ट्रेंड नेल्सन है. 56 वर्षीय नेल्सन पिछले 26 सालों से HIV के साथ जीवन जी रहे हैं. साल 2000 में उन्हें HIV के साथ-साथ सारकॉइडोसिस नाम की बीमारी का भी पता चला था, जो शरीर में सूजन पैदा करती है और फेफड़ों को प्रभावित कर सकती है.
बाद में उन्हें गंभीर निमोनिया और लीजनेयर्स बीमारी भी हुई, जिसके बाद उनकी स्थिति और बिगड़ गई. धीरे-धीरे उनके फेफड़े और लिवर दोनों प्रभावित होने लगे. साल 2024 तक उनकी हालत इतनी खराब हो गई कि उन्हें सांस लेने के लिए लगातार अतिरिक्त ऑक्सीजन की जरूरत पड़ने लगी.
एक ही दिन हुआ फेफड़े और लिवर का ट्रांसप्लांट
मरीज की गंभीर स्थिति को देखते हुए डॉक्टरों ने एक ही दिन फेफड़े और लिवर दोनों का ट्रांसप्लांट किया. फेफड़े का ट्रांसप्लांट डॉ. स्टेफनी चांग की टीम ने किया, जबकि लिवर ट्रांसप्लांट डॉ. करीम हलाजुन और उनकी टीम ने सफलतापूर्वक पूरा किया.
पहले नहीं हुआ था ऐसा फेफड़ा ट्रांसप्लांट
विशेषज्ञों के अनुसार, HIV-पॉजिटिव डोनर से HIV-पॉजिटिव मरीज में हार्ट और पेट से जुड़े कुछ अंगों का ट्रांसप्लांट पहले किया जा चुका है, लेकिन फेफड़े का ऐसा ट्रांसप्लांट पहली बार सफल हुआ है. डॉक्टरों का कहना है कि यह प्रक्रिया काफी जटिल थी और इसके लिए ऐसे मरीज की जरूरत थी जो इस नई चिकित्सा पहल का हिस्सा बनने के लिए तैयार हो.
चार साल बाद बिना ऑक्सीजन के ले पा रहे हैं सांस
सर्जरी के बाद बर्ट्रेंड नेल्सन की हालत में काफी सुधार हुआ है. सबसे बड़ी बात यह है कि अब उन्हें चार साल बाद पहली बार अतिरिक्त ऑक्सीजन की जरूरत नहीं पड़ रही है. वह धीरे-धीरे अपनी ताकत वापस पा रहे हैं और सामान्य जीवन की ओर लौट रहे हैं.
दूसरे मरीजों के लिए बन सकती है उम्मीद
नेल्सन का कहना है कि उनका अनुभव दूसरे HIV मरीजों के लिए प्रेरणा बन सकता है. उनका मानना है कि यदि HIV-पॉजिटिव डोनर्स के अंगों का अधिक इस्तेमाल किया जाए तो ट्रांसप्लांट का इंतजार कर रहे हजारों मरीजों को जल्दी मदद मिल सकती है.
भविष्य के लिए क्यों अहम है यह उपलब्धि?
विशेषज्ञों का मानना है कि यह सफलता भविष्य में HIV-पॉजिटिव डोनर से अंग प्रत्यारोपण को बढ़ावा दे सकती है. इससे डोनर ऑर्गन की कमी को कम करने और जरूरतमंद मरीजों को समय पर इलाज उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है. यह उपलब्धि न सिर्फ चिकित्सा विज्ञान की बड़ी सफलता है, बल्कि HIV के साथ जीवन जी रहे लाखों लोगों के लिए नई उम्मीद भी लेकर आई है.
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(Disclaimer: यहां दी गई सलाह और ये कॉन्टेंट केवल सामान्य जानकारी के लिए पेश किया गया है. यानी ये जानकारी किसी भी तरह से डॉक्टर्स राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए आप किसी एक्सपर्ट्स या फिर जिस समस्या से जूझ रहे हैं, उस क्षेत्र के डॉक्टर से सलाह लेने के बाद ही उस एडवाइस पर अमल करें. Fit Rahe India इस जानकारी के लिए किसी भी जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)

