Heart Problems In Babies: कार्डियक अरेस्ट यानि अचानक दिल की धड़कन का रूक जाना. अब ये समस्या न सिर्फ बड़ों की है बल्कि नन्हें नौनिहाल में भी देखी जा रही है. हाल की खबरों के अनुसार 4 महीने की मासूम को कार्डियक अरेस्ट की खबर सामने आई है. जिसने सबके सामने ये सवाल खड़ा कर दिया कि क्या मासूमों में बी कार्डियक अरेस्ट की समस्या हो सकती है? क्या बड़े वे कारण हैं जिसकी वजह से मासूम को कार्डियक अरेस्ट आया.
दरअसल कार्डियक अरेस्ट की समस्या बड़ों में देखी जाती है. या फिर जिन लोगों में पहले से कोरोनरी धमनी रोग (CAD) या दिल की कोई बीमारी हो, जो धूम्रपान करते हैं, जिन्हें डायबिटीज या हाई ब्लड प्रेशर हो, या जिनकी लाइफस्टाइल बिगड़ी हुई हो. उनमें इस तरह के समस्या देखी जाती है. इसके अलावा, बढ़ती उम्र के पुरुषों में इसका जोखिम अधिक होता है.
क्या शिशुओं में भी हो सकता है कार्डियक अरेस्ट?
सवाल ये है कि क्या छोटे बच्चे, जिनकी लाइफ स्टाइल अभी ठीक से शुरू भी नहीं हुई उनमें ये समस्या कैसे हो सकती है? तो इसका जवाब है कि हां, बच्चों में भी कार्डियक अरेस्ट की समस्या हो सकती है. क्योंकि इस समस्या का मतलब ही है कि दिल की धड़कन अचानक बंद हो जाना. इस दौरान खून का सर्कुलेशन सही तरीके से नहीं हो पाता. इस स्थिति में शरीर और दिमाग में खून का सर्कुलेशन रुक जाता है, जिससे व्यक्ति तुरंत बेहोश हो जाता है और कुछ ही मिनटों में उसकी मौत तक हो सकती है.
नवजात बच्चों में कार्डियक अरेस्ट (Cardiac Arrest) आने के कारण
ऑक्सीजन की कमी (Birth Asphyxia)
अगर गर्भावस्था या डिलीवरी के दौरान बच्चे को भरपूर मात्रा में ऑक्सीजन नहीं मिल पाता तो ऐसी स्थिति में दिल और दिमाग दोनों पर गहरा असर पड़ता है. ऐसे में कार्डियक अरेस्ट आने का खतरा बढ़ जाता है.
जन्मजात हृदय रोग (Congenital Heart Disease)
डॉक्टर्स बताते हैं कि कुछ बच्चे जन्म से ही दिल की समस्याओं के साथ पैदा होते हैं, जो दिल की कार्यक्षमता को प्रभावित कर सकती हैं.
गंभीर संक्रमण (Sepsis)
कुछ मामलों में बैक्टीरिया या वायरस भी जिम्मेदार होते हैं. बच्चे को निमोनिया, सेप्सिस या दूसरे गंभीर संक्रमण होने की वजह से भी कार्डियक अरेस्ट आ सकता है. संक्रमण शरीर के कई अंगों के साथ दिल को प्रभावित करने की क्षमता रखती है. वहीं शरीर में ऑक्सीजन की कमी कार्डियक अरेस्ट का जोखिम बढ़ा देती है.
सांस लेने में गंभीर समस्या
नवजात ने अभी-अभी जन्म ही लिया है. वहीं बच्चों के शारीरिक विकास में समय लगता है. ऐसे में फेफड़ों का ठीक से विकसित न होना, लंबे समय तक सांस रुकना या ऑक्सीजन न मिलना भी दिल के कामकाज को प्रभावित कर सकता है.
समय से पहले जन्म (Premature Birth)
प्रीमैच्योर शिशुओं के दिल और फेफड़े पूरी तरह विकसित नहीं होते, जिससे जटिलताओं का खतरा बढ़ जाता है.
किन लक्षणों पर तुरंत ध्यान दें?
- सांस लेने में कठिनाई
- त्वचा का नीला पड़ना
- दिल की धड़कन बहुत धीमी होना
- बच्चा प्रतिक्रिया न देना
- अत्यधिक सुस्ती या बेहोशी
यह भी पढ़ें: Eye Floaters: आंखों के सामने दिख रहे काले धब्बे, जानें इसके पीछे की बड़ी वजह
(Disclaimer: यहां दी गई सलाह और ये कॉन्टेंट केवल सामान्य जानकारी के लिए पेश किया गया है. यानी ये जानकारी किसी भी तरह से डॉक्टर्स राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए आप किसी एक्सपर्ट्स या फिर जिस समस्या से जूझ रहे हैं, उस क्षेत्र के डॉक्टर से सलाह लेने के बाद ही उस एडवाइस पर अमल करें. Fit Rahe India इस जानकारी के लिए किसी भी जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)

