Vitamin linked to Memory Loss : क्या शरीर में कुछ जरूरी विटामिनों की कमी भविष्य में याददाश्त कमजोर होने और डिमेंशिया जैसी गंभीर बीमारी का जोखिम बढ़ा सकती है? भारतीय शोधकर्ताओं के एक नए अध्ययन ने इस दिशा में महत्वपूर्ण संकेत दिए हैं। यह अध्ययन भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूट्रिशन (NIN) द्वारा किया गया है। नतीजों को The Lancet Regional Health – Southeast Asia जर्नल में प्रकाशित किया गया है।
भारत में औसत उम्र बढ़ रही है। बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं और जीवन स्तर बेहतर होने की वजह से लोग पहले से ज्यादा लंबा जीवन जी रहे हैं। ऐसे में बुजुर्ग आबादी भी बढ़ रही है। डिमेंशिया यानी याद्दाश्त का कमजोर होना बुढ़ापे से जुड़ी हुई बीमारी है। ऐसे में विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में तेजी से बढ़ती बुजुर्ग आबादी के साथ डिमेंशिया के मामले भी बढ़ने की आशंका है।
40 फीसदी लोगों में याददाश्त जाने का खतरा | Memory Loss in Indians
इस स्टडी के लिए तेलंगाना राज्य को चुना गया। गांवों और शहरी इलाकों में रहने वाले 40 से 80 वर्ष आयु वर्ग के 570 लोगों को अध्ययन में शामिल किया। प्रतिभागियों की याददाश्त, सोचने-समझने की क्षमता, खानपान की आदतों और ब्लड में मौजूद अलग अलग विटामिनों के स्तर का विश्लेषण किया गया।

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अध्ययन में पाया गया कि करीब 40 प्रतिशत प्रतिभागियों में डिमेंशिया का संभावित जोखिम ज्यादा था। इनमें न सिर्फ कई विटामिनों की कमी अधिक देखी गई, बल्कि उनके भोजन में विविधता भी कम थी। अध्ययन के मुताबिक विटामिन D, B2, B6 और B12 की कमी वाले लोगों में डिमेंशिया से जुड़े जोखिम कारक अधिक पाए गए।
खाने का याददाश्त से ये है संबंध | Foods linked to Memory Loss
अध्ययन के अनुसार, जिन लोगों में डिमेंशिया का जोखिम अधिक पाया गया, उनके भोजन में फल और सब्जियों की मात्रा कम थी। साथ ही वे सैचुरेटेड फैट वाला खाना ज्यादा खा रहे थे। तेल, घी. चिकनाई वाला खाना और ज्यादा नॉनवेज फूड सेचुरेटिड फूड में आते हैं। ये खाना दिल की बीमारी और खराब मानसिक सेहत के लिए जिम्मेदार माना गया है।
शोधकर्ताओं का मानना है कि खाने में माइक्रो न्यूट्रिएंट्स गायब थे जिससे मानसिक सेहत पर बुरा असर पड़ रहा था। हालांकि अध्ययन यह साबित नहीं करता कि विटामिन की कमी सीधे डिमेंशिया का कारण बनती है, लेकिन दोनों के बीच मजबूत संबंध जरूर सामने आया है।
गांव के लोगों में अधिक दिखी विटामिन की कमी
ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले प्रतिभागियों में विटामिन की कमी शहरी लोगों की तुलना में अधिक पाई गई। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में खराब खान पान गांव की आबादी में डिमेंशिया के बढ़ते बोझ का कारण बन सकती है।
क्यों बढ़ रही है चिंता?
दुनियाभर में डिमेंशिया तेजी से बढ़ती स्वास्थ्य चुनौतियों में शामिल है। अनुमान है कि निम्न और मध्यम आय वाले देशों में दुनिया के लगभग 60 प्रतिशत डिमेंशिया मरीज रहते हैं। भारत भी इस चुनौती से अछूता नहीं है।
विशेषज्ञों के अनुसार, डिमेंशिया के जोखिम को बढ़ाने वाले कई कारकों—जैसे हाई ब्लडप्रेशर, डायबिटीज़, मोटापा, एक्सरसाइज़ ना करना, स्मोकिंग और डिप्रेशन पर काम करने की ज़रुरत तो है ही, साथ ही अब पोषण यानी खाने पीने की आदतों को भी इसी कैटेगरी में देखा जा रहा है।
डिमेंशिया के खतरे से ऐसे बचें | Brain Healthy Foods
अध्ययन से जुड़े वैज्ञानिकों का कहना है कि फिलहाल डिमेंशिया के लिए इलाज के तौर पर बहुत ज्यादा विकल्प मौजूद नहीं है। इसीलिए इलाज से ज्यादा जरूरी है कि उसे होने से रोका जाए।
ये काम ऐसा खाना खाकर किया जा सकता है जिसमें वैरायटी होय़ दिन भर में फल, सब्जी, सलाद, अनाज और डेयरी प्रॉडक्टस मिला कर लिए जाएं तो समस्या पर काबू पाया जा सकता है। देर तक बैठकर काम करने वालों को रेगुलर एक्सरसाइज को हफ्ते में 5 दिन अपने लाइफस्टाइल में शामिल करना चाहिए। इसके अलावा दिमागी सेहत के लिए कोई ना कोई नयी चीज, जैसे नया गेम, नई भाषा या कोई नई स्किल सीखनी चाहिए। इससे दिमाग की काम करने की क्षमता बढ़ती है।
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