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नकली पनीर कौन पकड़ता है ? जानें किसकी जिम्मेदारी

FSSAI On Fake Food Products: नकली पनीर, खोया और मिलावटी खाद्य पदार्थों पर कार्रवाई कौन करता है? FSSAI के CEO रजत पुनहानी ने बताया राज्य सरकार और FSSAI की क्या जिम्मेदारी है.

FSSAI On Fake Food Products: भारत में करोड़ों लोग खाने-पीने के शौकीन है. ऑनलाइन से लेकर रेहड़ी पटरियों का ज़ायका लोगों की जुबान पर है. किस गली, किस दुकान कैसा खाना मिल रहा है लोग ये तो जानते हैं. लेकिन ये नहीं जानते कि आखिर वो खाना आपके लिए सेफ है या नहीं? पर आप निश्चिंत रहिए आपकी सेफ्टी फूड स्टैंडर्ड्स एंड सेफ्टी अथॉरिटी ऑफ इंडिया यानी (FSSAI) के हाथों में है. जो ये जिम्मेदारी लेता है कि आप तक सेफ, शुद्ध और साफ खाना पहुंचे. जिससे न आपका ज़ायका बिगड़े और न ही आपकी सेहत.

आपके खाने में कैसी मिलावट की जा रही है, और उसपर एक्शन लेना FSSAI के हाथों में है. इन्हीं तमाम फूड प्रोडक्ट्स और लोगों की शिकायते मिलना. उनका निपटान किस तरह होता है इन सभी सवालों के जवाब आपको आज देने आए हैं. फिट रहे इंडिया के साथ FSSAI के इतिहास का पहला पॉडकास्ट में. जिसमें आपके तमाम सवालों के जवाब दिए जाएंगे.

यहां देखें पूरा VIDEO:

कौन पकड़ता है नकली पनीर?

जब भी त्योहार सामने आते हैं, तो ऐसी जानकारियां सामने आ जाती हैं कि नकली पनीर बिक रहा है. इतने किलो नकली पनीर पकड़ा गया. जिसे लेकर FSSAI पर सवाल उठना शुरू हो जाते हैं. आखिर FSSAI क्या कर रहा है, सरकार कहां है, एक्शन क्यों नहीं लिया गया? तमाम ऐसे सवाल किए जाते हैं. इसी सवाल को जब फिट रहे इंडिया FSSAI के सीईओ रजत पुनहानी से किया तो उन्होंने क्या कहा आइए जानते हैं.

FSSAI के CEO रजत पुनहानी ने इस सवाल का जवाब देते हुए कहा कि देश में फूड सेक्टर का 70 प्रतिशत UnOrganised है, और ये सेक्टर्स राज्य सरकारों के हाथों में है. इसलिए त्योहारों के समय में मिलने वाले नकली पनीर, खोया कि जो बिक्री होती है वो राज्य सरकारों के हाथों में आती है. यहां तक की 99 प्रतिशत रजिस्ट्रेशन, लाइसेंस देना उके हाथों में है.

राज्य सरकार कैसे करती हैं काम?

अब सवाल ये कि अगर राज्य सरकारों के हाथों में ये काम है तो उनके काम करने का क्या प्रोसेस है? इसका जवाब है कि राज्यों में सेटअप तैयार किया गया है. जिसके तहत फूड सेफ्टी कमिश्नर होते हैं वो इस डिपार्टमेंट को हेड करते हैं. अब इनके डिपार्टमेंट में फूड सेफ्टी ऑफिसर्स होते हैं और डेसिगनेटेड ऑफिसर्स, एडिशनल डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट होते हैं. जो नकली पनीर प्रोडक्ट पकड़े जाते हैं. इन सभी के मामले जाते हैं ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट के पास. कई अन्य दायरे भी राज्य सरकारों के हाथों में है. लेकिन लोगों को जानकारी न होने के कारण वो सीधे सवाल FSSAI से करने लगते हैं. जबकी इसकी जवाबदेही राज्य सरकारों के हाथों में है.

FSSAI ने बरती सख्ती

हालांकि लोगों की शिकायत सुनी जाती है और इन्हीं शिकायतों के आधार पर एक्शन भी लिया जाता है. FSSAI ने ऐसे नकली पनीर, आईसक्रीम बेचने वाली कंपनियों के खिलाफ एक्शन लिया है. दरअसल कुछ कंपनियां पनीर के पैकेट पर 100 प्रतिशत प्योर पनीर लिखकर प्रोडक्ट्स को बेच रही थी. ऐसी कंपनियों के खिलाफ एक्शन लिया गया है. साफ और कड़े निर्देश दिए गए अगर आपका पनीर प्रोडक्ट प्योर दूध से नहीं तैयार किया गया तो उसे पैकेजिंग पर क्लीयर करना होगा.

पनीर का बदलेगा नाम

ऐसे मिस-लीडिंग प्रोडक्ट्स पर लगाम लगाई जा रही है. कंपनियों को ये कहा जा रहा है कि आप जो प्रोडक्ट बेच रहे हैं तो उसे क्लियर किया जाए. जैसे अगर फ्रोजेन आईस क्रीम डेजर्ट है तो ये प्रोडक्ट पर मेंशन होना चाहिए. जिससे ग्राहक को ये साफ हो कि आखिर वो जिस प्रोडक्ट का सेवन कर रहे हैं वो आखिर है क्या? इसकी जानकारी उन्हें होनी चाहिए.

यह भी पढ़ें: दीमाग को बूढ़ा बना रही शराब! रिसर्च में मानसिक बीमारियों का खुलासा

(Disclaimer: यहां दी गई सलाह और ये कॉन्टेंट केवल सामान्य जानकारी के लिए पेश किया गया है. यानी ये जानकारी किसी भी तरह से डॉक्टर्स राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए आप किसी एक्सपर्ट्स या फिर जिस समस्या से जूझ रहे हैं, उस क्षेत्र के डॉक्टर से सलाह लेने के बाद ही उस एडवाइस पर अमल करें. Fit Rahe India इस जानकारी के लिए किसी भी जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)

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sarthak arora Senior Sub Editor
अपनी उंगलियों से खबरों को खटाखट लिखना, और लिखने से पहले पढ़ना और समझना. इस तरह पत्रकारिता के क्षेत्र में 7 साल का अनुभव पाया. कार्य जारी है और इसी तरह लिखना, पढ़ना और सीखना निरंतर जारी रहेगा.
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