Gen Z vs Millennials: अक्सर जेन जी और मिलेनियल्स के बीच हेल्थ को लेकर चर्चा चलती रहती है कि आखिर हम फिट है या तुम फिट हो. हालांकि आज की जेन जी जनरेशन हेल्थ का अच्छा खासा ख्याल जरूर रखती है. हेल्थ के प्रति जागरूक रही है. क्योंकि पहले के समय वाले लोग अक्सर लंबे समय तक काम करते थे.
प्रेशर महसूस करते थे जिससे की हेल्थ नहीं बन पाती थी और स्वास्थ्य संबंधित समस्याएं खड़ी हो जाती थी. लेकिन पिछली जनरेशन का खानपान अच्छा था. जो ताकत देता था. इसलिए इम्यूनिटी पावर बढ़ा देता था. अब बहस है कि क्या सिर्फ हेल्थ की जानकारी मिल जाने से जेन जी पिछली जनरेशन से फिट है, तो इसका जवाब है कि भले ही इस जनरेशन में हेल्थ के प्रति अवेयरनेस बढ़ी है. लेकिन इसका ये मतलब नहीं कि जेन जी हेल्दी हैं.
जागरूकता और हेल्दी होने में फर्क है
अब एक्सपर्ट्स ऐसा मानते हैं कि भले ही आज की जनरेशन जागरूक है. फिटनेस, अच्छी नींद और बीमारियों को लेकर अवेयर हैं. इससे जेन जी फिट नहीं हो जाते हैं. क्योंकि मिलेनियल्स भी योगा, हेल्दी खाना, जिम, मेडिटेशन, वर्क-लाइफ बैलंस इन चीजों को प्राथमिकता देते थे. लेकिन जेन जी आई तो थेरेपी, योगा, बर्नआउट, इमोशनल फिटनेस. ऐसे मुद्दों पर चर्चा होने लगी. यानी सिर्फ चर्चा ही हो रही है. असल सेहत का कोई खास ख्याल नहीं रखा जा रहा है. इसलिए जागरूक होने में और असल में अपनी सेहत का ख्याल रखने में बहुत अंतर होता है.
आज का युवा इन समस्याओं में घिरा है
एक्सपर्ट्स मानते हैं कि आज का युवा जो है वो भी बीमारियों में घिरा है जो पहले अक्सर बुजुर्गों में देखी जाती थी. 30 से 40 साल की उम्र वाले लोग भी आज ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, हार्ट अटैक. ऐसी बीमारियों की चपेट में हैं, जो चिंता की बात है. लेकिन इन सबका कारण भी सामने आया है. इन बीमारियों का कारण भी लाइफस्टाइल से कनेक्टेड है. जैसे नींद की कमी होना, लंबे समय तक बैठकर काम करना, गलत खानपान, फिजिकल एक्टिविटी में कमी होना. ये कुछ वजहें हैं जो आज के युवाओं में देखने को मिलती है.
दो जनरेशन तीरका अलग-अलग
अब मिलेनियल्स और जेन-जी का स्ट्रेस से डील करने का तरीका भी अलग है. जैसे जो मिलेनियल्स थे वो पुराने गाने सुनते थे. अपनी पुरानी यादों को तरो-ताजा करते थे. इस तरह खुद को बेहतर महसूस करवाते थे. लेकिन जेन जी अपने स्टाइल से मोबाइल स्क्रॉलिंग करते हैं. इसे अपना सहारा बना लेते हैं. लेकिन एक्सपर्ट्स ऐसा मानते हैं ऐसी आदत भी मेंटल स्ट्रेस को ही बढ़ा रही है. क्योंकि लगातार ऑनलाइन रहते हैं, हर समय का अपडेट मिलता है जो आपको ये फील करवाता है कि आप पीछे रह गए हैं. इस प्रेशर से स्ट्रेस महसूस होता है जो ऑफलाइन की तुलना में अधिक नुकसानदायक ही है.
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(Disclaimer: यहां दी गई सलाह और ये कॉन्टेंट केवल सामान्य जानकारी के लिए पेश किया गया है. यानी ये जानकारी किसी भी तरह से डॉक्टर्स राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए आप किसी एक्सपर्ट्स या फिर जिस समस्या से जूझ रहे हैं, उस क्षेत्र के डॉक्टर से सलाह लेने के बाद ही उस एडवाइस पर अमल करें. Fit Rahe India इस जानकारी के लिए किसी भी जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)

