Government on Weight Loss: पिछले कुछ वर्षों में वजन घटाने वाले इंजेक्शनों की लोकप्रियता दुनिया भर में तेज़ी से बढ़ी है। अब भारत में भी इन दवाओं की कीमतें कम होने की संभावना जताई जा रही है। इसकी वजह यह है कि मोटापा और डायबिटीज़ के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवा सेमाग्लूटाइड (Semaglutide) का पेटेंट समाप्त हो गया है। इसी सॉल्ट का उपयोग लोकप्रिय वेट-लॉस इंजेक्शन Ozempic और Wegovy बनाने में किया जाता है।
पेटेंट खत्म होने के बाद अब केवल मूल कंपनी ही नहीं, बल्कि अन्य फार्मा कंपनियां भी इसका जेनेरिक संस्करण तैयार कर सकती हैं। इससे बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और कीमतें नीचे आने की उम्मीद है। पहले जहां इन इंजेक्शनों के एक महीने का खर्च लगभग 10 से 15 हजार रुपये तक पड़ता था, वहीं अब यह घटकर करीब 5 हजार रुपये तक आ सकता है।
रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार भारत की कई बड़ी फार्मा कंपनियां—जैसे सन फार्मा, डॉ. रेड्डीज़ और ज़ायडस—भी सेमाग्लूटाइड आधारित दवाओं के अपने-अपने संस्करण बाजार में लाने की तैयारी कर रही हैं।
हालांकि इन दवाओं की उपलब्धता बढ़ने के साथ-साथ इनके गलत इस्तेमाल को लेकर चिंताएं भी सामने आ रही हैं। इसी वजह से सरकार ने इस मामले में सख्ती दिखाई है।
#WATCH | Delhi: On GLP-1 Drugs, Dr Nikhil Tandon, Delhi AIIMS professor and HOD of Department of Endocrinology and Metabolism, says, “We can take many steps to reduce obesity. The first and foremost step towards it is physical activities and diet… The medicines which are used in… pic.twitter.com/5DmH9nyE9P
— ANI (@ANI) March 23, 2026
सरकार की सख्ती: भ्रामक विज्ञापनों पर कार्रवाई
भारत के दवा नियामक Central Drugs Standard Control Organization (CDSCO) ने GLP-1 आधारित वज़न घटाने वाली दवाओं के प्रचार और बिक्री पर निगरानी बढ़ा दी है।
10 मार्च को जारी एडवाइज़री में कहा गया है कि कई जगहों पर इन इंजेक्शनों को “फैट-लॉस शॉट” या “स्लिमिंग इंजेक्शन” के रूप में प्रचारित किया जा रहा है। जबकि असल में ये दवाएं मोटापा और डायबिटीज़ जैसी गंभीर मेडिकल कंडीशन के इलाज के लिए विकसित की गई हैं।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि ये दवाएं सिर्फ डॉक्टर के प्रिस्क्रिप्शन पर ही उपलब्ध होनी चाहिए। बिना विशेषज्ञ सलाह के इनका इस्तेमाल स्वास्थ्य के लिए जोखिम भरा हो सकता है। इसलिए अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे सप्लाई चेन, क्लीनिक और फार्मेसी की निगरानी करें और भ्रामक विज्ञापन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करें। अभी तक करीब 49 स्थानों पर जांच की जा चुकी है।
आगरा की फैट लॉस एक्सपर्ट डॉ. सारिका श्रीवास्तव कहती हैं,
“वजन कम करने की दवाएं इस दशक की बड़ी मेडिकल उपलब्धि कही जा सकती हैं। पहले कई मरीजों का वजन कम कराना बेहद मुश्किल होता था, लेकिन अब इलाज के नए विकल्प मौजूद हैं। मोटापा कई गंभीर बीमारियों की जड़ है, इसलिए अगर इन दवाओं का उपयोग सावधानी और डॉक्टर की निगरानी में किया जाए तो कई मरीजों को फायदा मिल सकता है। डॉक्टर की सलाह से इन्हें लेने पर घबराने की जरूरत नहीं है।”
तेजी से बढ़ रहा है फैट-लॉस इंजेक्शन का बाजार
भारत में वज़न घटाने वाले इंजेक्शनों का बाजार अभी शुरुआती दौर में है, लेकिन इसकी रफ्तार काफी तेज़ है। 2024 में इन दवाओं की कुल बिक्री करीब 571 करोड़ रुपये थी, जो 2025 में बढ़कर लगभग 1,230 करोड़ रुपये तक पहुंच गई। विशेषज्ञों का अनुमान है कि पेटेंट खत्म होने और सस्ती जेनेरिक दवाओं के आने के बाद अगले कुछ वर्षों में यह बाजार 12,000 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है।
हालांकि बाजार में कई तरह के वेट-लॉस इंजेक्शन मौजूद हैं, लेकिन मौजूदा बदलाव के पीछे दो प्रमुख सॉल्ट की भूमिका मानी जा रही है।
- Semaglutide – जिसका पेटेंट 20 मार्च को समाप्त हुआ
- Tirzepatide – जिससे प्रसिद्ध इंजेक्शन Mounjaro तैयार किया जाता है
2025 के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार:
- Mounjaro (tirzepatide) – लॉन्च के पहले 9 महीनों में लगभग ₹601 करोड़ की बिक्री
- Wegovy (semaglutide) – करीब ₹61 करोड़ की बिक्री
- Ozempic (semaglutide) – लॉन्च के शुरुआती महीनों में लगभग ₹1 करोड़ की बिक्री
देश के कई निजी अस्पतालों और वेलनेस क्लीनिक्स ने अब वेट-मैनेजमेंट प्रोग्राम शुरू कर दिए हैं, जिनमें इन इंजेक्शनों का इस्तेमाल किया जा रहा है। लेकिन विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि इन्हें “जादुई इलाज” समझना सही नहीं है। AIIMS के एंडोक्राइनोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ. निखिल टंडन का कहना है कि इन दवाओं के दीर्घकालिक प्रभावों को लेकर अभी और शोध की आवश्यकता है। उनके अनुसार इलाज बंद करने के बाद कई लोगों में वजन दोबारा बढ़ने की संभावना भी देखी गई है।
कैसे काम करते हैं ये “वज़न घटाने वाले इंजेक्शन”?
जिन दवाओं की चर्चा हो रही है, वे GLP-1 drugs की श्रेणी में आती हैं।
GLP-1 का पूरा नाम ग्लूकागॉन-लाइक पेप्टाइड-1 (Glucagon-Like Peptide-1) है। यह शरीर में बनने वाला एक प्राकृतिक हार्मोन है जो खाने के बाद सक्रिय होता है और पाचन तथा ब्लड शुगर के नियंत्रण में मदद करता है।
खाना खाने के बाद यह हार्मोन दिमाग को संकेत देता है कि पेट भर चुका है, जिससे भूख कम लगती है। साथ ही यह पेट से भोजन के बाहर निकलने की गति को धीमा कर देता है, जिससे लंबे समय तक पेट भरा हुआ महसूस होता है।
GLP-1 आधारित दवाएं इसी प्रक्रिया की नकल करती हैं। ये भूख को कम करती हैं, इंसुलिन की कार्यक्षमता को बेहतर बनाती हैं और ब्लड शुगर को नियंत्रित करने में मदद करती हैं। इसी कारण इनका उपयोग पहले डायबिटीज़ के इलाज में किया गया, लेकिन बाद में यह भी देखा गया कि इससे वजन कम करने में भी मदद मिलती है।
इन इंजेक्शनों से जुड़े संभावित खतरे
हालांकि कई मरीजों को इन दवाओं से लाभ मिला है, लेकिन इनके कुछ साइड-इफेक्ट भी सामने आए हैं। कुछ लोगों में मतली, उल्टी, पेट दर्द, कब्ज या डायरिया जैसी समस्याएं देखी गई हैं। कुछ मामलों में पैंक्रियास और गॉल ब्लैडर से जुड़ी जटिलताएं भी सामने आई हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि मोटापा एक जटिल स्वास्थ्य समस्या है और केवल इंजेक्शन से इसका स्थायी समाधान नहीं हो सकता। संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और स्वस्थ जीवनशैली अभी भी वजन नियंत्रण के सबसे महत्वपूर्ण तरीके माने जाते हैं।
इसीलिए डॉक्टर बार-बार यह सलाह देते हैं कि वज़न घटाने वाले इंजेक्शनों को स्लिमिंग शॉर्टकट की तरह लेने के बजाय केवल मेडिकल जरूरत और विशेषज्ञ की निगरानी में ही इस्तेमाल किया जाना चाहिए।
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(Disclaimer: यहां दी गई सलाह और ये कॉन्टेंट केवल सामान्य जानकारी के लिए पेश किया गया है. यानी ये जानकारी किसी भी तरह से डॉक्टर्स राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए आप किसी एक्सपर्ट्स या फिर जिस समस्या से जूझ रहे हैं, उस क्षेत्र के डॉक्टर से सलाह लेने के बाद ही उस एडवाइस पर अमल करें. Fit Rahe India इस जानकारी के लिए किसी भी जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)


