Hand Numbness Causes: कभी-कबार ऐसा महसूस होता है कि हमारा पैर-हाथ अचानक से सुन्न हो जाता है. लोग अक्सर इसे पैर सो गया या फिर हाथ सो गया इस तरह से पुकारते हैं. क्योंकि यही आम बोलचाल में ही इसे कहा जाता है. हालांकि कुछ लोग ऐसी कंडिशन का रोज सामना करते हैं, रोजाना उन्हें इस तरह की समस्या सताती है. फिर भी इसे इग्नोर कर डालते हैं.
लेकिन अगर बार-बार इस तरह की कंडिशन पैदा हो. आप जाग रहे हैं और आपके हाथ-पैर सो जाएं तो इसे हल्के में न लें. क्योंकि ये हेल्थ के लिहाज से बड़ी प्रॉब्लम भी हो सकती है. कहीं आपका शरीर आपसे कुछ चीख पुकार कर रहा हो लेकिन आप उसे इग्नोर कर देते हैं. अब ऐसे में ये जानना जरूरी हो जाता है कि आखिर आपको कौन सी बीमारी हो सकती है. आइए डिटेल में जानते हैं.
क्या हो सकता है हाथ-पांव के सोने का कारण
जब इस तरह की कंडिशन होती है, तो सच में हमारे हाथ पांव नहीं सोते हैं. इसका सबसे आम कारण हो सकता है कि या तो आप एक ही पोश्चर में लंबे समय तक बैठे हैं, तब ऐसी कंडिशन होती है या फिर जब हम अपने पैर के ऊपर पैर रखकर लगातार इसी पोश्चचर में लंबे समय तक या तो बैठ जाएं या लेट जाएं. अब बैठने लेटने से ऐसा इसलिए होता है क्योंकि हमारी नसों पर अधिक प्रेशर पड़ता है. नतीजा हमारे उसी हिस्से में खून का फ्लो कम हो जाता है. खून के फ्लो का कम होना ही हमें पांव सो गया या हाथ सो गया की तरह महसूस होता है.
सिर्फ इतना ही नहीं कई बार हमारी बॉडी के कुछ हिस्सों में ब्लड का सर्कुलेशन सही नहीं हो पाता है. यानी ब्लड सर्कुलेशन कहीं न कहीं बाधित हो रहा होता है. तब भी हमें झनझनाहट, सुन्नपन महसूस होता है. अक्सर तब होता है जब आप एक ही पोश्चर में काफी देर तक बैठे रहें. वहीं सिर्फ ब्लड सर्कुलेशन से नहीं बल्कि विटामिन की कमी के कारण भी ऐसा हो सकता है तो इसलिए ध्यान देना जरूरी है.
इस विटामिन की कमी के कारण होची है ऐसी समस्या
ये जानना जरूरी हो जाता है कि आखिर किस विटामिन की कमी के ऐसी परेशानी होती है, तो इसका जवाब है B12, B6 या फिर किसी अन्य जरूरी पोषक तत्वों की कमी से जब हमारी नसें कमजोर हो जाती है, तो हाथ-पैरों में झनझनाहट और सुन्नपन महसूस हो सकती है. वहीं स्पाइन से जुड़ी समस्या, स्ट्रेस और चिंता से रीढ़ की हड्डी की जुड़ी समस्या से ऐसा हो सकता है.
डायबिटीज मरीज पर पड़ता असर
अब जो लोग डायबिटीज की समस्या से परेशान हैं, उन्हें खास ख्याल रखना चाहिए क्योंकि ऐसे मरीजों की नसों पर अधिक असर पड़ता है. मेडिकल टर्म में इसे न्यूरोपैथी कहा जाता है. यानी जिसमें पैरों में सुन्नपन, जलन कई मामलों में चुभन भी महसूस होने लगती है. वहीं रीढ़ की हड्डी में जिनको परेशानी हो उन्हें भी ध्यान रखना चाहिए. क्योंकि कमर या फिर गर्दन की जब नसें दबती हैं या हाथ या पांव सुन्न हो जाता है तो इसे स्लिप डिस्क या फिर सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटिस हो सकता है. इतना ही नहीं स्ट्रेस और चिंता के कारण भी ये समस्या होती है. दरअसल अधिक तनाव या फिर जब घबराहट महसूस हो तो शरीर में एक अजब सी झनझनाहट महसूस होती है.
डॉक्टर को कब दिखाएं और कैसे बचें?
वहीं ये सवाल आता है कि आखिर डॉक्टर को कब दिखाना चाहिए. यानी कब अधिक ध्यान देना चाहिए तो इसका जवाब है कि अगर ऐसी कंडिशन बार-बार हो रही हो, लंबे समय तक ऐसी कंडिशन बनी रहे, कमजोरी या फिर दर्द भी होने लगे. ऐसे मामलों में आपको डॉक्टर से चेकअप करवा लेना चाहिए. बचाव के तरीकों की अगर बात की जाए तो एक ही पोजिशन में लंबे समय तक न बैठें, रेगुलर एक्सरसाइज करें. सही पोजिशन में ही बैठें, पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं, बैठने और सोने की तरीके को सुधारें.
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(Disclaimer: यहां दी गई सलाह और ये कॉन्टेंट केवल सामान्य जानकारी के लिए पेश किया गया है. यानी ये जानकारी किसी भी तरह से डॉक्टर्स राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए आप किसी एक्सपर्ट्स या फिर जिस समस्या से जूझ रहे हैं, उस क्षेत्र के डॉक्टर से सलाह लेने के बाद ही उस एडवाइस पर अमल करें. Fit Rahe India इस जानकारी के लिए किसी भी जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है. इस तरह के कॉन्टेंट को देखने के लिए आप हमारे Youtube चैनल के साथ जुड़ सकते हैं.)

