दिल की Bypass Surgery आज पहले की तुलना में काफी सुरक्षित और आसान हो गई है। सही समय पर सर्जरी और सही देखभाल के साथ मरीज सर्जरी के बाद सामान्य जीवन जी सकता है। इसी विषय पर हृदय सर्जन डॉ. शिव चौधरी ने विस्तार से बताया कि कब बाईपास सर्जरी जरूरी होती है, मरीज को सर्जरी से पहले क्या तैयारी करनी चाहिए और सर्जरी के बाद जीवन कैसा रहता है।
डॉ. शिव चौधरी, जो कि Fortis Escorts Heart Institute, Delhi में Adult Cardiothoracic Surgery के Executive Director हैं, बताते हैं कि दिल की बीमारी में हर मरीज को बाईपास सर्जरी की जरूरत नहीं होती। कई मामलों में दवाइयों या स्टेंट से भी इलाज संभव है। लेकिन जब दिल की धमनियों में ब्लॉकेज बहुत ज्यादा हो जाता है या ब्लॉकेज ऐसी जगह हो जहां स्टेंट लगाना संभव नहीं है, तब बाईपास सर्जरी जरूरी हो जाती है।
बाईपास सर्जरी को डॉक्टर एक “हाईवे बनाने” जैसा बताते हैं। जब दिल की किसी नस में ब्लॉकेज हो जाता है तो सर्जन शरीर की दूसरी नस का उपयोग करके दिल तक खून पहुंचने का नया रास्ता बना देते हैं। आमतौर पर यह सर्जरी 3 से 5 घंटे के बीच पूरी हो जाती है।
सर्जरी से पहले मरीज को मानसिक रूप से सकारात्मक रहना बेहद जरूरी है। डॉक्टर के अनुसार “अच्छा सोचिए, अच्छा होगा”। इसके साथ ही मरीज को अपनी पूरी मेडिकल हिस्ट्री डॉक्टर को बतानी चाहिए, जैसे कि डायबिटीज, ब्लड प्रेशर या कोई दूसरी बीमारी। अगर मरीज को डायबिटीज है तो सर्जरी थोड़ी जटिल हो सकती है, लेकिन सही कंट्रोल में होने पर सर्जरी सुरक्षित तरीके से की जा सकती है।
डॉ. चौधरी बताते हैं कि सर्जरी से पहले हल्का प्राणायाम और सांस की एक्सरसाइज करना फेफड़ों को मजबूत बनाता है, जिससे ऑपरेशन के बाद रिकवरी जल्दी होती है। साथ ही परिवार के लोगों को भी पहले से तैयारी कर लेनी चाहिए ताकि सर्जरी के बाद मरीज की देखभाल ठीक से हो सके।
इमरजेंसी की स्थिति में दिल की सर्जरी चुनौतीपूर्ण हो सकती है, लेकिन आज की आधुनिक तकनीकों और अनुभवी डॉक्टरों की मदद से ऐसे मामलों में भी सफल सर्जरी संभव है।
सर्जरी के बाद मरीज का दिल “नया” नहीं हो जाता, लेकिन उसकी कार्यक्षमता काफी बेहतर हो जाती है। अगर मरीज डॉक्टर की सलाह के अनुसार दवाइयां ले, सही खान-पान रखे और स्वस्थ जीवनशैली अपनाए तो वह सामान्य जीवन जी सकता है और काम पर भी लौट सकता है। कई मरीज 6 से 8 हफ्तों के भीतर अपनी सामान्य दिनचर्या में वापस आ जाते हैं।
डॉ. चौधरी बताते हैं कि दिल के मरीजों को अक्सर Blood Thinners और Statins जैसी दवाइयां लंबे समय तक लेनी पड़ती हैं। इन दवाइयों को लेकर कई तरह की भ्रांतियां होती हैं, लेकिन सही तरीके से लेने पर ये दवाइयां दिल की सुरक्षा के लिए बहुत जरूरी होती हैं।
महिलाओं में दिल की बीमारी अक्सर देर से पहचानी जाती है क्योंकि कई महिलाएं अपने लक्षणों को नजरअंदाज करती रहती हैं। इसलिए महिलाओं को भी दिल से जुड़ी समस्याओं को गंभीरता से लेना चाहिए।
डॉक्टर के अनुसार सही समय पर इलाज, नियमित दवाइयां, संतुलित आहार और सक्रिय जीवनशैली से बाईपास सर्जरी के बाद मरीज की जीवन गुणवत्ता और जीवनकाल दोनों बेहतर हो सकते हैं।


