Heatwave Safety Tips: भीषण गर्मी ने अपना प्रचंड रूप दिखाना शुरू कर दिया है. कई शहरों में इस समय टेंप्रेचर 47 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच चुका है. घर से बाहर निकलने से पहले कई बार सोचना पड़ता है. ऐसी गर्मी हमारे शरीर को काफी नुकसान देती है. स्थिती जानलेवा हो सकती है. हालांकि लगातार मौसम विभाग कई बार चेतावनी दे रहा है. सभी की जुबान पर एक शब्द है हीटवेव. लेकिन क्या आप जानते हैं कि हीट वेव होता क्या है?
क्या आप जानते हैं कि आप जिस शब्द का इस्तेमाल बार-बार कर रहे हैं वो कितना खतरनाक हो सकती है. हमारे शरीर पर इसका क्या असर पड़ रहा है. हमें क्या सावधानियां बरतनी चाहिए. ये जानना बहुत जरूरी हो जाता है. आइए डिटेल में जानते हैं.
हीट वेव क्या होती है
पहले ये जान लेते हैं कि आखिर हीट वेव होता क्या है. इसका जवाब है कि जब एयर का टेंप्रेचर नॉर्मल से कई अधिक हो जाता है, और वो इंसान के शरीर के लिए खतरनाक बनने लगे. इस कंडिशन को हीटवेव का जाता है. अक्सर इसका एहसास मैदानी इलाकों में हो सकेगा. जहां पारा 40 डिग्री से भी अधिक पहुंच जाता है. हालांकि पहाड़ी क्षेत्रों में 30 डिग्री सेल्सियस से ऊपर तापमान खतरनाक माना जाता है. आसान शब्दों में अगर कहा जाए तो टेंप्रेचर नॉर्मल से 4.5 से 6.5 डिग्री अगर अधिक हो तो ये हीटवेव की कैटेगरी में माना जाता है. वहीं जब 6.4 से अधिक तापमान बढ़ जाए तो उसे गंभीर हीट वेव की कैटेगरी में गिना जाता है. अब आप तापमान के अनुसार अंदाजा लगा सकते हैं.
शरीर पर पड़ता बुरा असर
इस समय मौसम ऐसा चल रहा है कि शरीर का हमें अधिक ध्यान रखना चाहिए. क्योंकि तेज गर्मी शरीर को अंदर से वीक कर देती है. डिहाइड्रेशन की समस्या होने लगती है. डिहाइड्रेशन यानी पानी की कमी की समस्या. आप इसे कैसे पहचान सकते हैं? अगर आपको थकान लग रही है, कमजोरी महसूस हो रही है, चक्कर आ रहे हैं, सिरदर्द हो रहा है, उल्टी महसूस हो रही है, मसल्स में ऐंठन हो रही है, पसीना अधिक आ रहा है, बेहोशी जैसी हालत हो रही है. बॉडी का टेंप्रेचर 104 डिग्री फारेनहाइट या फिर उससे अधिक हो जाए तो ये कंडिशन हीट स्ट्रोक का कारण बन सकती है. ऐसी कंडिशन में जान भी जा सकती है. इसलिए आपको पहचानना चाहिए और अलर्ट हो जाना चाहिए. ताकि आप त्वरित मेडिकल जांच करवा सकें.
कैसे रखें अपना ख्याल?
अपना ख्याल आप खुद ही रख सकते हैं. लेकिन किस तरीके से क्या तरीका होना चाहिए. आइए इसे जानते हैं.
- बार-बार पानी पिएंः अगर आप सोच रहे हैं कि प्यास लगेगी तभी पानी पिएंगे तो ऐसा न करें. बार-बार पानी पीने से शरीर हाइड्रेट रहेगा. कोशिश कीजिए नींबू पानी पिएं, छाछ पीएं, नारियल पानी भी फायदेमंद हो सकता है.
- घर से बाहर न निकलेंः क्योंकि गर्मी ज्यादा है तो कोशिश कीजिए जरूरी न हो तो 12 से 3 बजे के समय में घर से बाहर न निकलें क्योंकि ये समय सबसे खतरनाक हो सरता है. कोशिश कीजिए अपने काम को निपटाने की सुबह के समय या फिर शाम के समय में.
- सही कपड़ों का चुनावः ऐसे मौसम में सही कपड़ों का सिलेक्शन करें जैसे हल्के कपड़े पहने. ताकि शरीर कूल रहे और ठंडक महसूस हो.
- चाय-कॉफी न पीएंः कुछ लोग गर्मी में भी चाय-कॉफी पीना नहीं छोड़ते. हालांकि अगर आप AC रूम में हैं तो बात अलग हो सकती है. लेकिन अधिक गर्मी में इनका सेवन शरीर में पानी की कमी को बढ़ा सकता है.
- बच्चों का और जानवरों का रखें ख्यालः ये मौसम सबसे सेंसिटिव बच्चों और पालतू जानवरों के लिए माना जाता है. इसलिए उनका खास ख्याल रखें. कभी उन्हें अकेला गाड़ी में न छोड़कर जाएं.
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