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डॉक्टर से मिलने के बाद भी गूगल पर बीमारी सर्च करते हैं मरीज! रिपोर्ट में हुआ चौंकाने वाला खुलासा

Idiot Syndrome: IPNCI 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली-एनसीआर में 78.5% मरीज डॉक्टर से मिलने के बाद भी अपनी बीमारी और इलाज को लेकर स्पष्ट नहीं होते. यही वजह है कि बड़ी संख्या में लोग गूगल और सोशल मीडिया पर स्वास्थ्य संबंधी जानकारी तलाशते हैं.

Idiot Syndrome: क्या आप कभी डॉक्टर के पास इलाज के लिए गए हैं, लेकिन वहां से लौटने के बाद भी आपको अपनी बीमारी, इलाज या आगे क्या करना है, इसे लेकर भ्रम बना रहा? अगर हां, तो आप अकेले नहीं हैं. एक नई स्टडी में सामने आया है कि दिल्ली-एनसीआर में बड़ी संख्या में मरीज डॉक्टर से मिलने के बाद भी अपनी स्वास्थ्य संबंधी जानकारी के लिए गूगल और सोशल मीडिया का सहारा लेते हैं.

यह रिपोर्ट इंडिया पेशेंट नेविगेशन एंड कन्फ्यूजन इंडेक्स (IPNCI) 2026 द्वारा जारी की गई है. इसके लिए दिल्ली, नोएडा, गुरुग्राम, फरीदाबाद और गाजियाबाद के 1,000 लोगों का सर्वे किया गया. रिपोर्ट में पाया गया कि कई मरीज अपनी बीमारी, इलाज और आगे की मेडिकल प्रक्रिया को समझने में परेशानी महसूस करते हैं. यही वजह है कि डॉक्टर से मिलने के बाद भी वे इंटरनेट पर जानकारी तलाशने लगते हैं.

10 में से 8 मरीज गूगल पर खोजते हैं जवाब

सर्वे के मुताबिक, 78.5% मरीजों ने बताया कि डॉक्टर से मिलने के बाद उन्हें अपनी बीमारी या इलाज को लेकर पूरी जानकारी नहीं मिली. इस वजह से उन्होंने गूगल, सोशल मीडिया या अन्य ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर जानकारी खोजी. वहीं 73.8% मरीजों का कहना था कि डॉक्टर से बातचीत के दौरान उन्हें जल्दबाजी महसूस हुई और वे अपने सभी सवाल ठीक से नहीं पूछ पाए.

मरीजों को नहीं मिलती स्पष्ट गाइडेंस

रिपोर्ट के अनुसार, करीब 70% मरीजों ने कहा कि उन्हें यह स्पष्ट जानकारी नहीं मिली कि ब्लड टेस्ट, स्कैन या अन्य जांच के बाद आगे क्या करना है और किस विशेषज्ञ से संपर्क करना चाहिए. इसके अलावा 78% लोगों ने बताया कि डॉक्टर, अस्पताल, डायग्नोस्टिक सेंटर और फार्मेसी के बीच समन्वय की कमी के कारण उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ा.

हेल्पडेस्क और सपोर्ट सिस्टम की भी कमी

सर्वे में शामिल 10 में से 7 से ज्यादा लोगों ने कहा कि उनके पास ऐसी सुविधाएं उपलब्ध नहीं थीं जो इलाज की पूरी प्रक्रिया में उनका मार्गदर्शन कर सकें.

इन सुविधाओं में शामिल हैं:

  • पेशेंट कोऑर्डिनेटर
  • अस्पताल हेल्पडेस्क
  • हेल्पलाइन सेवाएं
  • डिजिटल नेविगेशन टूल

शोधकर्ताओं का कहना है कि इन सेवाओं की कमी के कारण मरीज अक्सर इंटरनेट या दोस्तों-रिश्तेदारों की सलाह पर निर्भर हो जाते हैं.

छोटे अस्पताल छोड़ सीधे बड़े अस्पताल पहुंच रहे मरीज

रिपोर्ट में एक और अहम बात सामने आई. कई मरीज स्थानीय या सेकेंडरी हेल्थकेयर सुविधाओं की बजाय सीधे बड़े निजी अस्पतालों का रुख कर रहे हैं. करीब 36% लोगों ने बताया कि उन्होंने पहले छोटे अस्पताल या सेकेंडरी केयर सेंटर में जाने के बजाय सीधे बड़े निजी अस्पतालों में इलाज करवाना पसंद किया. विशेषज्ञों का मानना है कि इससे इलाज का खर्च बढ़ता है और बड़े अस्पतालों पर मरीजों का दबाव भी बढ़ जाता है.

सरकारी अस्पतालों का कम उपयोग

सर्वे में केवल 21.4% लोगों ने बताया कि उन्होंने सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं का इस्तेमाल किया, जबकि ये सुविधाएं अपेक्षाकृत सस्ती होती हैं.

स्वास्थ्य व्यवस्था में है ‘मिसिंग लिंक’

पैसिफिक वनहेल्थ हॉस्पिटल के संस्थापक साकेत बंसल के मुताबिक, भारत की स्वास्थ्य व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण कड़ी की कमी दिखाई देती है. उनका कहना है कि मरीज सीधे बड़े अस्पतालों में पहुंच रहे हैं क्योंकि सेकेंडरी हेल्थकेयर सिस्टम अभी भी कमजोर और बिखरा हुआ है. यदि इस स्तर की स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत किया जाए तो मरीजों का भ्रम कम होगा, इलाज की प्रक्रिया आसान बनेगी और अनावश्यक खर्च भी घटेगा.

दिल्ली-एनसीआर को मिला ‘हाई कन्फ्यूजन, लो नेविगेशन’ टैग

अध्ययन में दिल्ली-एनसीआर को 68.5 अंक दिए गए और इसे “हाई कन्फ्यूजन, लो नेविगेशन” कैटेगरी में रखा गया. रिपोर्ट के अनुसार, मरीजों को इलाज के अलग-अलग चरणों में सही मार्गदर्शन देने के मामले में स्वास्थ्य व्यवस्था सबसे ज्यादा कमजोर दिखाई दी. यही कारण है कि बड़ी संख्या में लोग डॉक्टर के क्लिनिक से निकलने के बाद भी अपनी बीमारी और इलाज को लेकर असमंजस में रहते हैं.

यह भी पढ़ें: ‘झोलाछाप कहने से पहले…’, अनुष्का शर्मा के बयान से छिड़ी बहस; नेशनल कमीशन फॉर होम्योपैथी ने दी सख्त हिदायत

(Disclaimer: यहां दी गई सलाह और ये कॉन्टेंट केवल सामान्य जानकारी के लिए पेश किया गया है. यानी ये जानकारी किसी भी तरह से डॉक्टर्स राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए आप किसी एक्सपर्ट्स या फिर जिस समस्या से जूझ रहे हैं, उस क्षेत्र के डॉक्टर से सलाह लेने के बाद ही उस एडवाइस पर अमल करें. Fit Rahe India इस जानकारी के लिए किसी भी जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है. इस तरह के कॉन्टेंट को देखने के लिए आप हमारे Youtube चैनल के साथ जुड़ सकते हैं. )

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sarthak arora Senior Sub Editor
अपनी उंगलियों से खबरों को खटाखट लिखना, और लिखने से पहले पढ़ना और समझना. इस तरह पत्रकारिता के क्षेत्र में 7 साल का अनुभव पाया. कार्य जारी है और इसी तरह लिखना, पढ़ना और सीखना निरंतर जारी रहेगा.
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