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सुरक्षित हाथों में बच्चों की जिंदगियां! मृत्यु दर में आई गिरावट; UN रिपोर्ट में बड़ा खुलासा

India mortality rate decline: संयुक्त राष्ट्र की UNIGME Report 2025 के अनुसार, भारत ने बच्चों की मौत को कम करने में शानदार उपलब्धि हासिल की है.

India mortality rate decline: संयुक्त राष्ट्र की UNIGME Report 2025 के अनुसार, भारत ने बच्चों की मौत को कम करने में शानदार उपलब्धि हासिल की है. ये उपलब्धि अब दुनिया के लिए एक मिसाल बनकर उभर कर सामने आई. दरअसल देशभर में 5 साल से कम उम्र के बच्चों के मृत्यु दर में तेजी से गिरावट आई है. जानकारी के अनुसार न्यू बोर्न बच्चों की मृत्यु दर में 1990 से अब तक 70 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है.

आंकड़ों पर अगर गौर किया जाए तो 1990 में भारत की NMR 57 थी. यही संख्या अब घटकर 2024 में 17 प्रतिशत रह गई है. साल 1990 में बच्चों की मत्यु दर का आंकड़ों में 79 प्रतिशत की गिरावट देखी गई थी. वहीं 1990 में U5MR 127 थी, जबकि 2024 में यह घटकर 27 रह गई. जारी हुई रिपोर्ट के अनुसार साल 2000 में जहां हजार बच्चों में से 92 ऐसे थे जिनकी मौत हो जाती थी. इसमें बदलाव आया है. साल 2024 तक ये संख्या घटी और लगभग 32 रह गई है. दक्षिण एशिया में 1990 से अब तक 76% और 2000 के बाद 68% की कमी दर्ज की गई है. इस बदलाव में भारत का योगदान सबसे अहम रहा है, जो स्ट्रॉन्ग हेल्थ स्कीम और जागरूकता का नतीजा है.

कैसे आया ये बदलाव?

देश में किसी भी तरह का बदलाव लाना आसान नहीं होता. ये बदलाव धीरे-धीरे ही लाए जाते हैं. यहां भी ऐसा ही हुआ है. बच्चों की मृत्यु दर को रोकने के लिए सरकार ने कई प्रयास किए. जिसमें वैक्सीनेशन का बड़ा अभियान, अस्पताल में सुरक्षित डिलीवरी, न्यू बोर्न बेबी की बेहतर देखभाल, IMNCI जैसी योजनाएं लाना. इस तरह के प्रयास पिछले कई सालों में किए गए हैं. जिसके बाद ही ये रुकवाट दर्ज की गई.

  1. वैक्सीनेशन अभियान ने निभाई अहम भूमिका

आपको बता दें कि टीकाकरण के इस बड़े अभि.यान ने लाखों बच्चों को गंभीर बीमारियों से बचाने में काफी मदद की. समय रहते इन वैक्सीनेशन ने भारत से बच्चों को होने वाले निमोनिया, डायरिया और मलेरिया जैसी बीमारियों को काफी हद तक रोकने में मदद की.

  1. सुरक्षित डिलीवरी का ख्याल

पहले के समय में सभी जानते हैं कि घरों में डिलीवरी होती थी. इसके कारण खतरा ज्यादा रहता था. लेकिन समय बदला लोगों में जाग्रुकता फैली और अब अस्पतालों में सुरक्षित तरह से प्रसव बढ़ने से मां और बच्चे दोनों की जान बच रही है. वहीं क्योंकि अधिक स्वास्थ्य सेवाएं लोगों तक पहुंचाई जा रही है. इसी कारण बेहतर इलाज मिल पा रहा है. इसी के साथ जन्म के तुरंत बाद न्यू-बोर्न का खास ख्याल रखा जा रहा है. उनके लिए खास तौर पर Special Newborn Care Units (SNCU) और ट्रेंड स्टाफ को तैनात किया गया है. जिसके कारण उनकी जान बचा पाना काफी आसान हो चुका है.

किन बीमारियों पर पा लिया गया कंट्रोल?

सरकार द्वारा किन प्रयासों से जानलेवा बीमारियों पर कंट्रोल पा लिया गया है? अगर बात करें लिस्ट की तो इसमें निमोनिया, डायरिया, मलेरिया या फिर जन्म के समय में होने वाली कई मुश्किलों वाली बीमारियों पर कंट्रोल पा लिया गया है. समय रहते इनका बेहतर इलाज बच्चों की जिंदगी बचाने में सबसे अधिक मददगार साबित हुआ है.

किन बीमारियों पर पा लिया गया कंट्रोल?

बात करें कि आखिर सरकार ने किन बीमारियों पर अब तक कंट्रोल पा लिया है. इसमें निमोनिया, डायरिया, मलेरिया या फिर जन्म के समय में होने वाली कई मुश्किल समस्याओं से निपटने और उनसे होने वाली बीमारियों पर सरकार ने कंट्रोल पा लिया है. इनी कंट्रोल से बच्चों की जान बचा पाना आसान हुआ है. इसी के साथ जानते हैं कि आखिर कितने प्रतिशत मौत में कमी आई.

कितने प्रतिशत की कमी हुई दर्ज

आंकड़ों पर अगर गौर किया जाए तो साल 2000 के बाद से न्यू बोर्न बत्चों की मौत पर लगभग 60 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है. 1 साल से 5 साल के बच्चों की मौत में 75 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई है. वहीं 5 साल से कम आयु वाले बच्चों की मृत्यु दर में साल 1990 के आंकड़ों की तुलना में 79 प्रतिशत की भारी गिरावट देखी गई है. वहीं अब जान लेते हैं कि आखिर सरकार ने कौन से ऐसे मजबूत कदम उठाए हैं. जिनके कारण ये सफल हो पाया.

भारत सरकार ने कौन से मजबूत कदम उठाए?

जान लेते हैं भारत सरकार के वो मजबूत कदम जिनके कारण इन सब पर आसानी से रोकथाम संभव हो पाई. इसमें Trained डॉक्टर और नर्स की मदद से सुरक्षित डिलीवरी, न्यूबोर्न का खास ख्याल. जैसे स्पेशल न्योबोर्न केयर यूनिट्स की संख्या बढ़ाना, गर्भावस्था में रेगुलर जांच, जन्म के बाद बच्चों और मां दोनों की देखभाल सुनिश्चित करना और उसे मजबूत करना. इन प्रयासों और सेवाओं को सरकार की ओर से गांव-गांव तक पहुंचाया गया. जिसके कारण बच्चों में होने वाली बीमारियों पर काबू पाना और भी आसान हुआ.

सरकार के लिए और क्या चुनौती बाकी है?

सबकुछ सही दिशा में चलने के बावजूद सरकार के लिए अभी भी कुछ चुनौतियां बाकी होंगी. दरअसल अभी भी न्यूबोर्न की मौत के आंकड़ें कई ज्यादा है. इनमें प्रीमैच्योर बर्थ यानी समय से पहले जन्म एक बड़ी समस्या है. गांव और शहरों के बीच मिलने वाली स्वास्थ्य सुविधाओं का गैप. इस गैप को कम करना. सरकार का इन सभी समस्याओं पर काम करना चुनौतीपूर्ण है. हालांकि इसपर भी काम किया जा रहा है. भविष्य में इसे भी जल्द से जल्द कम किया जाएगा. वहीं सरकार के लक्ष्य की अगर बात की जाए तो 5 साल से कम उम्र वाले बच्चों की मृत्यु दर को 25 से कम करना सरकार का लक्ष्य है. न्यूबोर्न की मृत्यु दर को 12 से कम करना लक्ष्य है. इसपर भारत का हेल्थ सिस्टम लगातार अथक प्रयास कर रहा है.

यह भी पढ़ें: Ayushman Bharat PMJAY benefits: अब इलाज नहीं बनेगा बोझ! आयुष्मान भारत से करोड़ों लोगों को मिल रही बड़ी राहत

(Disclaimer: यहां दी गई सलाह और ये कॉन्टेंट केवल सामान्य जानकारी के लिए पेश किया गया है. यानी ये जानकारी किसी भी तरह से डॉक्टर्स राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए आप किसी एक्सपर्ट्स या फिर जिस समस्या से जूझ रहे हैं, उस क्षेत्र के डॉक्टर से सलाह लेने के बाद ही उस एडवाइस पर अमल करें. Fit Rahe India इस जानकारी के लिए किसी भी जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)

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sarthak arora Senior Sub Editor
अपनी उंगलियों से खबरों को खटाखट लिखना, और लिखने से पहले पढ़ना और समझना. इस तरह पत्रकारिता के क्षेत्र में 7 साल का अनुभव पाया. कार्य जारी है और इसी तरह लिखना, पढ़ना और सीखना निरंतर जारी रहेगा.
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