Lung Cancer Treatment From Ai: कैंसर एक गंभीर बीमारी है. हर साल कोई व्यक्ति इसकी चपेट में आता है और लोगों के मन में एक खौफ पैदा होता है. इसी का एक रूप है स्मॉल सेल कैंसर. ये एक ऐसा कैंसर है जो सबसे तेजी से बढ़ता है और इसे डॉक्टर भी कैंसर के सबसे खतरनाक रूप में से एक मानते हैं. ऐसा इसलिए इसका पता अक्सर तभी चल पाता है जब ये हमारे शरीर के अन्य हिस्सों में फैल चुका होता है.
इसे डॉक्टर एक्सटेंसिव स्टेज कहते हैं. क्योंकि इसका इलाज कर पाना काफी मुश्किल हो जाता है. वहीं अब इससे निपटने के लिए साइंटिस्ट ने एक नई तकनीक विकसित की है. जानाकारी के अनुसार इस रिसर्च को रोसवेल पार्क कॉम्प्रिहेंसिव कैंसर सेंटर (बफेलो, न्यूयॉर्क), एमोरी यूनिवर्सिटी का विनशिप कैंसर इंस्टीट्यूट (अटलांटा, जॉर्जिया) और यूनिवर्सिटी हॉस्पिटल्स क्लीवलैंड मेडिकल सेंटर के शोधकर्ताओं ने विकसित किया है.
कीमोथेरेपी या फिर प्लैटिनम-बेस्ड थेरेपी नहीं असरदार
इस तकनीक से पहले तक भी इसका इलाज तो किया जाता था. डॉक्टर ऐसे मरीजों के इलाज के लिए प्लैटिनम-बेस्ड कीमोथेरेपी और उसके साथ-साथ इम्यूनोथेरेपी का इस्तेमाल करते थे. लेकिन ये हर मरीज के लिए एक समान रूप में असरदार नहीं होता था. साथ ही डॉक्टरों को ये तक मालूम नहीं होता था कि इस इलाज का असर यानी फायदा मरीज को होगा या फिर नहीं. लेकिन अब इस इलाज में AI टूल को लाया जा रहा है. जिसका नाम है फेनोपाईसेल. ये कैसे काम करेगा कैसे इलाज में इससे मदद ली जाएगी आइए जानते हैं.
Ai की मदद से होगा इलाद
जानकारी के अनुसार इस टूल को इमेजेस का एनालिसिस करने के लिए इस्तेमाल किया जाएगा. दरअसल जब मरीज को कैंसर बीमारी डायगनोज होती है उस दौरान टिश्यू की इमेजिज ली जाती है. इसे आमतौर पर माइक्रोस्कोप से देखा जाता है. अब तक डॉक्टर इस प्रोसेस को माइक्रोस्कोप के जरिए देखते थे. लेकिन ये AI टूल इन इमेजेस में एक ऐसे पैटर्न की पहचान करेगा जो किसी इंसान की आंखों से छूट जाते हों. जानकारी के अनुसार जब इसपर रिसर्च हुई तो रिसर्च में 281 मरीजों के डेटा का इस्तेमाल किया गया. जिसमें पहले से मौजूद बायोप्सी सैंपल्स को एनालाइज किया गया. इस दौरान एआई ने ट्यूमर के आसपास मौजूद इम्यून सेल्स की बनावट और उनकी व्यवस्था का स्टडी किया. ये इम्यून सेल्स शरीर की इम्यून सिस्टम का हिस्सा होते हैं और कैंसर से लड़ने में अहम भूमिका निभाते हैं.
कैसा रहा रिजल्ट
अब अगर रिसर्च के रिजल्ट की बात की जाए तो ये काफी एक्साइटेड रहा. यानी ये टूल इलाज शुरू होने से पहले ही अनुमान लगाने में सक्षम थे कि कौन से मरीज पर कीमोथेरेपी का बेहतर रिजल्ट मिलेगा. अब जब इन एनालिसिस को देखा गया तो ये तकनीक पारंपरिक तरीकों से कई ज्यादा अलग साबित हुई. एक अहम खोज यह रही कि जिन मरीजों में इलाज का असर अच्छा रहा, उनके ट्यूमर के आसपास इम्यून सेल्स ज्यादा और व्यवस्थित रूप में मौजूद था. वहीं, जिन मरीजों में असर कम था, उनमें ये सेल्स कम और बिखरे हुए पाए गए.
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(Disclaimer: यहां दी गई सलाह और ये कॉन्टेंट केवल सामान्य जानकारी के लिए पेश किया गया है. यानी ये जानकारी किसी भी तरह से डॉक्टर्स राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए आप किसी एक्सपर्ट्स या फिर जिस समस्या से जूझ रहे हैं, उस क्षेत्र के डॉक्टर से सलाह लेने के बाद ही उस एडवाइस पर अमल करें. Fit Rahe India इस जानकारी के लिए किसी भी जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)


