Melanoma Skin Cancer Signs: स्किन पर मौजूद छोटे-छोटे तिल कैंसर का कारण बन सकते हैं. ये बात भले थोड़ी-सी अजीब लगे, पर एक्सपर्ट कहते हैं कि तिल कभी-कभी एक गंभीर और जानलेवा बीमारी में बदल सकता है. आज के आर्टिकल में हम जानेंगे किन स्थिति में सामान्य तिल, कैंसर का कारण बनता है. किन लोगों को खतरा? जब तिल कैंसर में बदल जाते हैं इन्हें ‘मेलेनोमा’ कहा जाता है.
तिल तीन प्रकार के होते हैं. जन्मजात तिल (Congenital Moles), जो जन्म के समय या जन्म के कुछ समय बाद दिखाई देते हैं. सामान्य तिल (Common Moles), जो बचपन या किशोरावस्था में विकसित होते हैं और आमतौर पर नुकसानदायक नहीं होते. असामान्य या एटिपिकल तिल (Atypical/Dysplastic Moles), जिनका आकार, रंग या किनारे सामान्य तिल से अलग हो सकते हैं. ऐसे तिलों में कुछ मामलों में स्किन कैंसर का जोखिम अधिक हो सकता है, इसलिए इनमें बदलाव दिखने पर स्किन एक्सपर्ट के पास जरूर जाएं.
तिल कब बन जाता कैंसर?
कुछ मामलों में इनमें बदलाव आना स्किन कैंसर, खासकर मेलानोमा (Melanoma) कैंसर का संकेत होता है. अगर तिल का आकार तेजी से बढ़ने लगे, उसका रंग बदल जाए, किनारे असमान हो जाएं, खून आने लगे, खुजली या दर्द होने लगे, तो इसे नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए.
किन लोगों को स्किन कैंसर का खतरा अधिक होता है?
- लंबे समय तक तेज धूप या यूवी (UV) किरणों के संपर्क में रहने वाले लोग.
- जिनके शरीर पर बहुत ज्यादा तिल (Moles) होते हैं.
- जिनके परिवार में स्किन कैंसर का इतिहास रहा हो.
- जिनकी त्वचा बहुत गोरी है और धूप में जल्दी जल जाती है.
- जिनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) कमजोर होती है.
- जो लोग सनस्क्रीन का इस्तेमाल नहीं करते और धूप से बचाव नहीं करते.
- जिन लोगों को पहले स्किन कैंसर हो चुका हो.
- बढ़ती उम्र के साथ भी स्किन कैंसर का खतरा बढ़ सकता है, हालांकि यह किसी भी उम्र में हो सकता है.
ऐसा क्यों होता है?
शरीर पर आने वाले सभी तिल कैंसर कारण नहीं होता. कुछ मामलों में तिल में असामान्य बदलाव देखने को मिले तो अलर्ट होने की जरूरत है. एक्सपर्ट के अनुसार लंबे समय तक तेज धूप की यूवी (UV) किरणों के संपर्क में रहने से स्किन की कोशिकाओं के DNA को नुकसान पहुंच सकता है. इससे तिल की कोशिकाओं में असामान्य बदलाव (Mutation) होने का खतरा बढ़ जाता है.
इसके अलावा, जिन लोगों के परिवार में स्किन कैंसर का इतिहास है, शरीर पर बहुत अधिक तिल हैं या जिनकी इम्यूनिटी कमजोर है, उनमें जोखिम अधिक हो सकता है. बार-बार सनबर्न होना और पहले से मौजूद असामान्य (Atypical) तिल भी खतरे को बढ़ा सकते हैं.
एक्सपर्ट सलाह देते हैं कि अगर किसी तिल का आकार तेजी से बढ़ने लगे, रंग बदल जाए, किनारे असमान हो जाएं या उसमें खुजली, दर्द या खून आने जैसी समस्या हो, तो इसे नजरअंदाज न करें. ऐसे लक्षण दिखाई देने पर तुरंत एक्सपर्ट (Dermatologist) से जांच करानी चाहिए.
किस कोशिका के बदलने से तिल कैंसर में बदल जाता है?
तिल (Mole) मेलानोसाइट (Melanocyte) नाम की स्किन की कोशिकाओं से बनता है. यही कोशिकाएं मेलानिन (Melanin) नाम का रंगद्रव्य बनाती हैं, जो स्किन, बाल और आंखों को रंग देता है. जब इन मेलानोसाइट कोशिकाओं के DNA में असामान्य बदलाव (Mutation) होने लगते हैं, तो ये कोशिकाएं बढ़ने लगती है. इसी स्थिति को तिल कैंसर कहा जाता है.
मेलानोसाइट (Melanocyte) = त्वचा को रंग देने वाली कोशिका.
इन कोशिकाओं के DNA में गड़बड़ी होने पर ये तेजी से बढ़ने लगती हैं.
यही अनियंत्रित वृद्धि कुछ मामलों में मेलानोमा (स्किन कैंसर) का रूप ले सकती है.
यह भी पढ़ें: Sleep Survey 2026: 46% लोग रोज 6 घंटे से कम सोते हैं, 72% की रात में बार-बार टूटती है नींद
(Disclaimer: यहां दी गई सलाह और ये कॉन्टेंट केवल सामान्य जानकारी के लिए पेश किया गया है. यानी ये जानकारी किसी भी तरह से डॉक्टर्स राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए आप किसी एक्सपर्ट्स या फिर जिस समस्या से जूझ रहे हैं, उस क्षेत्र के डॉक्टर से सलाह लेने के बाद ही उस एडवाइस पर अमल करें. Fit Rahe India इस जानकारी के लिए किसी भी जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है. इस तरह के कॉन्टेंट को देखने के लिए आप हमारे Youtube चैनल के साथ जुड़ सकते हैं.)

