Sleep Disorder Problem: एक रिसर्च रिपोर्ट बताती है कि 46 प्रतिशत भारतीय नींद की समस्या से परेशान हैं. उनके नींद के घंटों में कमी देखी गई है. 7-8 घंटे की बजाए अब उनकी नींद सिर्फ 6 घंटे ही सोते हैं.
लोकलसर्कल्स (LocalCircles) की सर्वे रिपोर्ट बताती है कि 46 प्रतिशत लोग नींद की समस्या से परेशान हैं. इस सर्वे में करीब 89,000 लोगों ने 393 जिलों से भाग लिया था. सर्वे में भाग लेने वाले लोगों ने बताया कि उन्हें नींद लेने में दिक्कत होती है. एक्सपर्ट इसे साइलेंट स्लीप एपिडेमिक यानी चुपचाप फैलती नींद की महामारी का नाम दे रहे हैं. बता दें कि लोकलसर्कल्स (LocalCircles) भारत का एक प्रमुख सामुदायिक सोशल मीडिया और नागरिक जुड़ाव (Citizen Engagement) प्लेटफॉर्म है.
सर्वे में हुए कई खुलासे
हर दूसरे भारतीय की नींद पूरी नहीं हो रही
सर्वे के मुताबिक, करीब 46% लोग रोज 6 घंटे से भी कम सोते हैं. वहीं, 72% लोगों ने बताया कि रात में उनकी नींद बार-बार खुल जाती है. यानी कई लोगों की नींद लगातार नहीं हो पाती। इसकी वजह से सुबह उठने पर शरीर तरोताजा महसूस नहीं करता, बल्कि थकान और सुस्ती बनी रहती है.
अच्छी बात भी सामने आई
पिछले साल के मुकाबले इस बार स्थिति थोड़ी बेहतर हुई है. पहले 59% लोग 6 घंटे से कम सोते थे, जो अब घटकर 46% रह गए हैं. इसका मतलब है कि अब लोग अच्छी नींद की अहमियत समझने लगे हैं और अपनी आदतों में बदलाव करने की कोशिश कर रहे हैं.
युवाओं और नौकरीपेशा लोगों को ज्यादा दिक्कत क्यों?
आजकल देर रात तक मोबाइल चलाना, सोशल मीडिया स्क्रॉल करना, लैपटॉप पर काम करना, पढ़ाई या ऑफिस का तनाव और अनियमित दिनचर्या नींद खराब होने की बड़ी वजह बन रहे हैं। जब सोने से ठीक पहले लंबे समय तक स्क्रीन देखते हैं, तो दिमाग देर तक एक्टिव रहता है. ऐसे में जल्दी नींद नहीं आती, रात में नींद टूट सकती है और सुबह उठने पर भी पूरी तरह आराम महसूस नहीं होता.
नींद की कमी से सेहत पर कैसा असर पड़ता है?
- ध्यान और याददाश्त कमजोर हो सकती है.
- दिनभर थकान, सुस्ती और चिड़चिड़ापन महसूस हो सकता है.
- तनाव, चिंता और अवसाद का खतरा बढ़ सकता है.
- शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) कमजोर पड़ सकती है.
- लंबे समय तक नींद की कमी रहने पर उच्च रक्तचाप, Type 2 Diabetes और हृदय रोग का जोखिम बढ़ सकता है.
- वजन बढ़ने और मोटापे की संभावना बढ़ सकती है, क्योंकि भूख नियंत्रित करने वाले हार्मोन प्रभावित होते हैं.
- काम या वाहन चलाते समय गलतियां और दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है.
- लगातार खराब नींद जीवन की गुणवत्ता और कार्यक्षमता को प्रभावित कर सकती है.
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