Microplastics In Water: गर्मी का मौसम शुरू होते ही अपना खास ख्याल रखना पड़ता है. ऐसे मौसम में टंकी से भी गर्म पानी आना शुरू हो जाता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि ये पानी हमारे लिए खतरनाक हो सकता है. इसी पानी से हम रोज नहाते हैं, कई बार इनका ही इस्तेमाल सब्जियां धोने से लेकर बर्तन धोने तक में किया जाता है. लेकिन ये खतरनाक कैसे हो सकता है.
दरअसल गर्मी में टंकी भी गर्म हो जाती है. क्योंकि टंकी में माइक्रोप्लास्टिक मौजूद होते हैं. इसके छोटे-छोटे कण टूटते हैं, या खराब होकर पानी में गिर जाते हैं. नतीजा ये पानी के जरिए जब हम बर्तन धोते हैं, या फिर सब्जियों को धोते हैं तो खाने में पहुंच सकते हैं. हालांकि WHO ने भी इन माइक्रोप्लास्टिक को लेकर चेतावनी दी है.
माइक्रोप्लास्टिक पर WHO ने क्या कहा?
विश्व स्वास्थ्य संगंठन यानी WHO ने माइक्रोप्लास्टिक पर रिसर्च और निगरानी बढ़ाने की जरूरत बताई है. उन लोगों को अक्सर ख्याल रखना चाहिए जिनकी टंकियां पुरानी हो. क्योंकि पुरानी प्लास्टिक की टंकियां जल्द ही डिग्रेड हो सकती है. नतीजा स्वरूप इसके छोटे-छोटे कण पानी में मिल जाते हैं, और इस तरह पानी भी आपकी सेहत के लिए जोखिम भरा बन सकता है.
माइक्रोप्लास्टिक क्या होता है?
अब बात करें कि आखिर माइक्रोप्लास्टिक क्या होता है, तो इसका जवाब है कि ये प्लास्टिक के बहुत छोटे कण होते हैं. इनका साइज 5 मिलीमीटर से भी कम होता है. क्योंकि इनका आकार इतना छोटा होता है, तो आप इन्हें आखों से भी नहीं देख सकते. इस तरह जब प्लास्टिक टूट जाए, घिस जाए, या फिर धूप और गर्मी के कारण कमजोर हो जाए जो अक्सर होता है, तो इसके कण अलग होने लगते हैं और पानी में मिल जाते हैं. इसपर WHO ने एक रिपोर्ट भी जारी की है. इस रिपोर्ट के अनुसार अगर इस माइक्रोप्लास्टिक पानी में भी पाए जा सकते हैं.
गर्मी में बढ़ जाते हैं इसके मामले
क्या आप जानते हैं कि गर्मियों में ऐसे मामले तेजी से बढ़ जाते हैं, क्योंकि पानी की टंकी सीधे छत पर लगी होती हैं. प्लास्टिक की टंकियां लगातार धूप के संपर्क में आती हैं और आप जानते ही हैं कई जगहों पर इस समय पारा 45 डिग्री सेल्सियस से भी ऊपर जा रहा है. ये टेंप्रेचर टंकी के बाहरी सर्फेस को बहुत गर्म कर देता है. आप कहेंगे कि ऐसा क्यों होता है? तो इसका जवाब है कि एक्सपर्ट्स के मुताबिक प्लास्टिक जब लंबे समय तक UV किरणों या फिर गर्मी के कॉन्टैक्ट में आता है तो कमजोर हो जाता है. इस कारण अगर टंकी की क्वालिटी अच्छी नहीं हुई और पुरानी हो जाए तो इसके छोटे कण पानी में घुल सकते हैं.
शरीर में क्या पड़ता असर?
अब जानते हैं कि आखि शरीर में इसका क्या असर पड़ता है? तो हेल्थ एक्सपर्ट्स के मुताबिक जब माइक्रोप्लास्टिक शरीर में जाते हैं, तो सूजन, हार्मोनल बदलाव, पाचन संंबंधी समस्याएं, इम्युनिटी पर गंभीर असर डाल सकती है. हालांकि कुछ रिसर्च भी सामने आई हैं जिसमें हार्ट और ब्लड सर्कुलेशन पर भी गंभीर प्रभाव पड़ने की जानकारी सामने आई है. हालांकि कई साइंटिस्ट अब भी इनके लंबे समय तक होने वाले अफेक्ट पर रिसर्च कर रहे हैं.
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