Karnal hospital surgery case: डॉक्टरों की दुनिया में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है. जहां एक 74 साल के बुजुर्ग मरीज के नाक और गले के बीच फंसी पथरियों को डॉक्टरों की सूझबूझ से निकाला गया. ये मरीज पिछले दो साल से सांस लेने की गंभीर बीमारी से परेशान था. ये मामला हरियाणा के करनाल जिला नागरिक अस्पताल का है.
हरियाणा के करनाल जिला नागरिक अस्पताल में डॉक्टरों की सूझबूझ से एक मरीज के नाक और गले के बीच फंसी पथरियों को नॉर्मल लोकल एनेस्थीसिया से निकाला गया. ये पथरियां 2.8, 9 और 5.8 एमएम की हैं. रण सिंह नाम के यह मरीज पिछले दो साल से इससे परेशान था. इस मरीज को सांस लेने की तकलीफ के साथ-साथ, दिल की बीमारियों से भी जूझ रहा था.
इतिहास में पहली बार मिला ऐसा केस
ये मरीज करीब दो सालों से नाक बंद होने के कारण परेशान था, वहीं ये इस समस्या को सामान्य समझकर दमे की दवाइयां लेते रहा. जब अचानक स्थिति गंभीर हालात में पहुंची तो उसने अस्पताल का रूख किया. जब अस्पताल में डॉक्टरों ने सीटी स्कैन किया तो पता चला कि मरीज के नाक और गले तक के हिस्से में पथरियां जमी हुई हैं. डॉक्टरों के लिए भी ये मामला चौंकाने वाला था.
क्योंकि आज तक के इतिहास में पथरी को लेकर जितने भी मामले सामने आए हैं. वह या तो पेट में या फिर पेट के आसपास के हिस्से में पाई गई हैं. ये पहला ऐसा मामला था जिसमें पथरी नाक और गले के हिस्से तक फैली हुई पाई गई. ऐसे में डॉक्टरों के लिए भी ये मामला नया था.
डॉक्टर के करियर का पहला मामला
मरीज दिल की बीमारी से भी जूझ रहा था जिसकी वजह से मरीज को पूरी तरह सुन्न करना खतरनाक हो सकता था, इसिलए डॉक्टरों ने अपनी सूझबूझ से फैसला लिया. ऐसे में ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. जयवर्धन ने एक साहसी फैसला लिया. उन्होंने जनरल एनेस्थीसिया के बजाय ‘लोकल एनेस्थीसिया’ के जरिए ऑपरेशन करने का निर्णय लिया, ताकि मरीज के दिल पर कोई दबाव न पड़े.
सर्जरी के दौरान डॉक्टर ने 2.8 मिलीग्राम, 5.8 मिलीग्राम और 9 मिली ग्राम की पथरियां बाहर निकालीं. डॉक्टर जयवर्धन ने बताया कि इस तरह का केस उनके करियर का पहला केस है, जिसमें नाक में इतनी बड़ी पथररियां देखी गई हैं. हलांकि ऑपरेशन सफल रहा. डॉक्टर ने बताया कि जो लोग धूल, मिट्टी और प्रदूषण वाले वातावरण में लंबे समय तक काम करते हैं या फिर रहते हैं, उन्हें इस तरह की दिक्कत हो सकती है. इन तरह के लोगों की नाक में सूक्ष्म कण जमा हो जाते हैं, जो समय के साथ कठोर होकर पथरी का रूप ले लेते हैं.
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