Weight Loss Drugs Cancer: वजन कम करने वाली कुछ दवाएं जैसे ओजम्पिक, वेगौवी इनका जिक्र काफी होता है. ये कुछ दवाएं हैं जो प्रचलित भी हैं और वजन घटाने साथ ही डायबिटीज को कंट्रोल रखने में हमारी मदद करती हैं. अब इन्हें लेकर एक जानकारी सामने आई है. जानकारी है कि अब यही मोटापा घटाने वाली दवाएं सिर्फ मोटापा और शुगर को कंट्रोल नहीं करेंगी.
ये कुछ ऐसी दवाएं हैं जो कैंसर के मरीजों के लिए वरदान साबित हो सकती हैं. इसपर एक चौंकाने वाली रिसर्च भी सामने आई है. रिसर्च में खुलासा हुआ कि इन्हीं दवाओं की मदद से कैंसर के मरीजों को काफी राहत मिल सकती है. उनमें काफी सुधार देखने को मिल सकता है. आइए डिटेल में जानते हैं कि ये नई रिसर्च रिपोर्ट क्या कहती है.
बेहतर हुए कैंसर के रिजल्ट्स
दरअसल कुछ स्टडीज में ये पाया गया कि जिन लोगों ने वजन घटाने या फिर डायबिटीज को कंट्रोल करने के लिए इन नई दवाओं का इस्तेमाल किया था. उनें कैंसर कैंसर से जुड़े नतीजे काफी हद तक बेहतर साबित हुए. रिसर्चर्स का कहना है कि ये दवाएं लेने वाले कैंसर के मरीजों में न सिर्फ इस बीमारी का खतरा कम हुआ बल्कि उनके बचने की संभावना काफी तेजी से बढ़ गई.
कैसे हुआ ये कमाल?
सवाल आता है कि आखिर ये कमाल कैसे हुआ? इसपर एक्सपर्ट्स का मानना है कि मोटापा कई तरह के कैंसर का कारण होता है. इन कैंसर में ब्रेस्ट कैंसर, कोलोरेक्टल कैंसर यहां तक की पैंक्रियाटिक कैंसर शामिल हैं. ऐसे में जब लोगों ने मोटापा कम करने वाली दवाओं का सेवन कम किया तो इससे वजन और एक्ट्रा फैट भी कम हुआ. शरीर में सूजन कम हुई. जब सूजन कम हुई तो कैंसर के सेल्स को बढ़ने का मौका बिल्कुल नहीं मिला. जिसके कारण कैंसर का खतरा काफी हद तक कम हुआ.
क्या ये दवा पूरी तरह कैंसर का इलाज है?
नई रिसर्च सामने आने के बाद ये मानना कि कैंसर के इलाज में इसी दवा का इस्तेमाल किया जाएगा, तो ये बिल्कुल गलत होगा. क्योंकि कैंसर के इलाज में कीमोथेरेपी, रेडिएशन या फिर सर्जरी ही की जाती है. आगे भी उसी के साथ इलाज किया जाएगा. लेकिन ये भी सवाल आता है कि आखिर फिर ये दवा कैसे कैंसर के इलाज में काम आएगी तो इसका जवाब है कि जब कोई व्यक्ति कैंसर से लड़ाई लड़ता है, तो उसका शरीर वीक हो जाता है.
इसपर भी अगर उस मरीज को डायबिटीज या फिर ओबेसिटी की समस्या है तो कैंसर का इलाज और मुश्किल हो जाता है. इसलिए ये दवा उन व्यक्तियों के इलाज में काम आ सकती हैं जिन्हें ऐसी समस्या हो. ये दवाएं शुगर के लेवल को कंट्रोल करती हैं. जिसकी मदद से कैंसर सेल्स को ग्लोकोस नहीं मिलता. साथ ही, वजन कम होने से मरीज की ओवरऑल इम्यूनिटी यानी बीमारियों से लड़ने की ताकत भी मजबूत होती है. इस कारण ये दवाएं पूरी तरह कैंसर को ठीक करने का कारण नहीं हो सकती.
डॉक्टर देते हैं ये सलाह
ऐसे केस और ऐसी दवाओं के सेवन को लेकर अक्सर डॉक्टरों मरीजों को सलाह देते हैं कि बिना प्रिस्क्रिप्शन के या फिर मेडिकल गाइडेंस के खुद से इस दवा का सेवन नहीं करना चाहिए. क्योंकि इसके कुछ साइड इफेक्ट्स भी हो सकते हैं. यही कारण है कि डॉक्टर पहले मरीज की कंडिशन देखते हैं कि आखिर उन्हें ये दवा देनी चाहिए या फिर नहीं.
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(Disclaimer: यहां दी गई सलाह और ये कॉन्टेंट केवल सामान्य जानकारी के लिए पेश किया गया है. यानी ये जानकारी किसी भी तरह से डॉक्टर्स राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए आप किसी एक्सपर्ट्स या फिर जिस समस्या से जूझ रहे हैं, उस क्षेत्र के डॉक्टर से सलाह लेने के बाद ही उस एडवाइस पर अमल करें. Fit Rahe India इस जानकारी के लिए किसी भी जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है. इस तरह के कॉन्टेंट को देखने के लिए आप हमारे Youtube चैनल के साथ जुड़ सकते हैं.)

