Phantom Vibration Syndrome: कई बार ऐसी सिचुएशन हमारे साथ होती हैं जिनका कोई लेना देना ही नहीं होता. जैसे मान लीजिए आप कहीं ट्रैवल कर रहे हैं फोन जेब में है, आपको लगा फोन बज रहा है वाइब्रेट हुआ. आपने फोन निकाल लिया देखा तो कुछ नहीं, न तो कॉल आया न ही कोई मैसेज आया. जरूर कभी न कभी तो आपके साथ ऐसा हुआ ही होगा.
लेकिन ऐसा क्यों होता है. इसे क्या कहा जाता है क्या आप जानते हैं? अगर नहीं जानते तो घबराइए नहीं. आज इसी के बारे में जानकारी इस लेख के जरिए देने वाले हैं. इस कंडिशन को कहा जाता है फैंटम वाइब्रेशन सिंड्रोम. इस सिंड्रोम का आज की डिजिटल युग में हर को अनुभव कर रहा है. एक्सपर्ट्स इसे इसी नाम से जानते हैं. लेकिन ये होता क्या है. आइए डिटेल में समझ लेते हैं.
हर जगह सिर्फ फोन-फोन
आजकल ऐसा समय है कि आप एक बार को बिना खाना खाए रह सकते हैं. लेकिन बिना फोन के कुछ काम कर पाना मुश्किल लगता है. यही कारण है कि फोन हमारी लाइफ का एक अहम हिस्सा बन गया है. फिर चाहे ऑफिस का काम हो या फिर सोशल मीडिया, बैंकिंग का काम हो, या फिर एनटरटेनमेंट, दोस्तों से गप्पे लड़ाने हो. हर छोटी चीजों पर ही फोन पर निर्भर है. जब हम फोन पर इतना सब करते हैं तो हम एक किसी खास नोटिफिकेशन के इंतजार में लग जाते हैं.
लेकिन इसमें घबराने की कोई बात नहीं है. क्योंकि इसका शिकार हर कोई हो ही रहा है. क्योंकि लाइफस्टाइल ऐसा हो गया है. लगातार फोन में लगे रहना, मैसेज का इंतजार करना. इसलिए कई बार ऐसा झूठा एहसास हमें हो जाता है कि नोटिफिकेशन आया है. जबकि कुछ नहीं आता. इसे फैंटम वाइब्रेशन कहा जाता है. फैंटम वाइब्रेशन सिर्फ नोटिफिकेशन के लिए इस्तेमाल किया जाता है. लेकिन जब फोन रिंग करता है और फोन बजने का झूठा एहसास हो तो उसे कहा जाता है फैंटम रिंगिंग. यह उन लोगों में ज्यादा देखा जाता है, जो फोन को हमेशा अपने शरीर के करीब रखते हैं या जिन्हें बार-बार नोटिफिकेशन चेक करने की आदत होती है.
ऐसा धोखा क्यों होता है
अब हमारे दीमाग को ऐसा भ्रम क्यों होता है, तो इसका जवाब है कि हमारा माइंड सुपरकंप्यूटर की तरह काम करता है. जो हमारे आस-पास चीजें चलती हैं उनके संकेतों को समझकर ही रिएक्ट करता है. अब आप अगर बार-बार नोटिफिकेशन चेक करते रहेंगे तो इसी के आदी हो जाएंगे. जिसके कारण हमारे माइंड को अलर्ट मोड में रहने का सिग्नल मिलता है.
क्या ये कोई खतरे की बात है?
इसका जवाब है कि इसे आमतौर पर हेल्थ से जुड़ी कोई गंभीर बीमारी नहीं माना जा सकता है. हालांकि ये इस बात का संकेत जरूर है कि आप कितना फोन का इस्तेमाल कर रहे हैं, और ओवरलोड आपके दिमाग पर कैसे असर डाल रहा है. इसलिए इससे दूरी बनाएं. क्योंकि अधिक समय तक ऐसी शिकायत आपको बेचैनी, स्ट्रेस, नींद न आने की शिकायत या फिर बार-बार फोन चेक करने की अजीब सी मजबूरी महसूस होगी. हालांकि इसे इग्नोर न करें. इसलिए अगर ऐसी आदत होने लगे तो इन्हें इग्नोर न करें.
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(Disclaimer: यहां दी गई सलाह और ये कॉन्टेंट केवल सामान्य जानकारी के लिए पेश किया गया है. यानी ये जानकारी किसी भी तरह से डॉक्टर्स राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए आप किसी एक्सपर्ट्स या फिर जिस समस्या से जूझ रहे हैं, उस क्षेत्र के डॉक्टर से सलाह लेने के बाद ही उस एडवाइस पर अमल करें. Fit Rahe India इस जानकारी के लिए किसी भी जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है. इस तरह के कॉन्टेंट को देखने के लिए आप हमारे Youtube चैनल के साथ जुड़ सकते हैं.)

