Phantom Vibration Syndrome: डिजीटल वर्ल्ड में सबकुछ कितना बदला-बदला सा लगता है. मानों एक अलग दुनिया हो. इस दुनिया ने रोजमर्रा के कामकाज को भी काफी आसान बनाया है. जैसे फोन में चुटकियों में सामान आ जाना. लेकिन इसी फोन की लत ने हमारी जिंदगी को खराब भी किया है. क्योंकि आज कई लोग 24 सौ घंटे फोन में घुसे रहते हैं, तो कई बीमरियों का शिकार होते जा रहे हैं.
फोन के जरिए ही सोशल साइट्स पर एक्टिव रहना जैसे सोशल मीडिया पर चैट, कॉल, मैसेज नोटिफिकेशन का ख्याल रखना, ढेरों ईमेल आना-जाना ये सिलसिला लगा रहता है. आप इससे फिजीकली तो वीक हो ही रहे हैं, लेकिन इसका इंपैक्ट मेंटली भी काफी पड़ रहा है. डिजिटल की इस दुनिया से बीमारियों के नाम भी अपडेट हुए हैं. इसी तरह मार्केट में फैंटम वाइब्रेशन सिंड्रोम आया है. संभव है कि आपने इसके बारे में पहले न सुना हो. घबराइए नहीं ये क्या है और इसमें कैसा महसूस होता है. इसी बारे में जानकारी देने आज हम आपको आए हैं. चलिए जान लेते हैं.
क्या है फैंटम वाइब्रेशन सिंड्रोम? | What is Phantom Vibration Syndrome
फैंटम वाइब्रेशन सिंड्रोम में व्यक्ति को ऐसा महसूस होने लगता है कि उसका फोन बार-बार वाइब्रेट हुआ है. या फिर उसके पास कोई नोटिफिकेशन आया है. अब आप कहेंगे इसमें बीमारी क्या है? तो बता दें कि ऐसा सबकुछ सचमुच में नहीं हुआ होता. यानी कोई मैसेज या फिर नोटिफिकेशन नहीं आया होता है. सिर्फ व्यक्ति को ऐसा महसूस होता है.
हार्मोन्स को प्रभावित करती है ये लाइट
इस सिंड्रोम से अगर आप छुटकारा पाना चाहते हैं, तो अपने लाइफस्टाइल में आपको कुछ बदलाव लाना होगा. जैसे सोने से पहले अगर फोन का अधिक इस्तेमाल करते हैं, तो उसका उपयोग करने से बचें. ऐसा इसलिए क्योंकि स्क्रीन से निकलने वाली लाइट मोलाटोनिन नाम के हार्मोन को प्रभावित करती हैं. जिसके कारण कई समस्या जैसे नींद आने में देरी. सुबह उटते ही आंखो में जलन और भारीपन महसूस होता है.
फोकस क्षमता हो रही प्रभावित
अक्सर आपने देखा है कि वर्क फ्रॉम होम या फिर काम के दौरान फोन का अधिक इस्तेमाल लोग करने लगते हैं. जिससे इनपर निर्भरता बढ़ती जा रही है. कुछ लोग स्क्रीन को बार-बार अनलॉक करके चेक करने की कोशिश करते हैं. जिससे फोकस प्रभावित होता है. हालांकि इससे बचने के लिए डिजिटली ब्रेक लेने की जरूरत है.
टेक्स्ट नेक सिंड्रोम
वहीं कुछ लोग लगातार अपना काम नीचे झुककर देखकर करते हैं. जिससे गर्दन और रीढ़ की हड्डी पर काफी प्रेशर पड़ता है. इस स्थिती को टेक्स्ट नेक कहा जाता है. इससे लंबे समय तक आपके अंगूठे या फिर कलाई में दर्द की समस्या भी हो सकती है.
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(Disclaimer: यहां दी गई सलाह और ये कॉन्टेंट केवल सामान्य जानकारी के लिए पेश किया गया है. यानी ये जानकारी किसी भी तरह से डॉक्टर्स राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए आप किसी एक्सपर्ट्स या फिर जिस समस्या से जूझ रहे हैं, उस क्षेत्र के डॉक्टर से सलाह लेने के बाद ही उस एडवाइस पर अमल करें. Fit Rahe India इस जानकारी के लिए किसी भी जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)


