Plant-Based Vitamin D3: देशभर में विटामिन-D की काफी कमी है. इस कमी को पूरा करने के लिए लोगों की अलमारियों में टैबलेट्स हैं. यही ऑप्शन्स मौजूद है. वो भी तब जब भरपूर धूप हो इसमें भी ये कमी आम देखने को मिल ही जाती है. लेकिन अब इस कमी को पूरा किया जा सकेगा वो भी सीधे आपकी डाइट से. दरअसल हेल्थ स्प्लीमेंट्स, फोर्टिफाइड फूड्स और न्यूट्रास्यूटिकल्स में इस्तेमाल करने के लिए भारत ने पहला प्लांट सोर्स विटामिन डी-3 देश में लॉन्च किया है.
इस प्लांट सोर्स विटामिन डी-3 से न्यूट्रिशन के कई ऑप्शन बढ़ने का बड़ा कदम माना जा रहा है. इसे फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड अथॉरिटी ऑफ इंडिया यानी FSSAI ने भी मंजूरी दे दी है. जिससे मैन्युफैक्चरर्स इसे डाइटरी सप्लीमेंट्स के साथ-साथ फोर्टिफाइड फूड और बेवरेज प्रोडक्ट्स में भी इस्तेमाल कर सकेंगे. विटाडी, सोया ऑयल वेस्ट स्ट्रीम, विटाडी ग्रीनD3 से निकाले गए फाइटोस्टेरॉल से बनता है.
हर पांच में से एक व्यक्ति इस समस्या का शिकार
पिछले साल इंडियन काउंसिल फॉर रिसर्च ऑन इंटरनेशनल इकोनॉमिक रिलेशंस (ICRIER) और अन्वका फांउडेशन की एक रिपोर्ट सामने आई थी. जिसका नाम था रोडमैप टू एड्रेस विटामिन डी डेफिशिएंसी इन इंडिया. इस रिपोर्ट में पाया गया कि हर पांच में से एक भारतीय इस जरूरी माइक्रोन्यूट्रिएंट की कमी का शिकार है. इस कमी से जूझ रहा है. जबकी ये हमारी बॉडी के लिए बहुत जरूरी होता है.
बॉडी को विटामिन-डी की जरूरत
आपको बता दें कि विटामिन-डी कसे हड्डियां हेल्दी रहती हैं, मसल्स और इम्यूनिटी के लिए भी ये बेहत जरूरी है. इसे पाने का सबसे अच्छा सोर्स तो धूप ही है. क्योंकि धूप में रहने से ये विटामिन तैयार होता है. लेकिन लोग घर के अंदर रहते हैं. वो भी लंबे समय तक. कुछ लोगों का वर्क-फ्रॉम होम होता है, कुछ एयर पॉल्यूशन के कारण नहीं निकल पाते, कुछ सनस्क्रीन का इस्तेमाल करते हैं. ये कुछ लाइफस्टाइल हैं जिनके कारण नैचुरली ये विटामिन नहीं बन पाता है. लेकिन शरीर की जरूरत को देखते हुए डॉक्टर इसे लेने के लिए सप्लीमेंट्स के सेवन की फिर सलाह देते हैं.
अब तक मिलने वाला Vitamin D3 कहां से बनता था?
इसपर डॉक्टर सुधीर बताते हैं कि अधिकतर लोगों को ये जानकारी नही होती कि जो बाजारों से मिलने वाला ट्रेडिशनल विटामिन डी-3 होता है वो आमतौर पर कैसे बनाया जाता है. इसका जवाब है कि उसे भेड़ के ऊन जिसे Lanolin कहा जाता है उससे तैयार किया जाता है. ये भेड़ की ऊन से निकाले जाने वाला नैचुरल वैक्स है.
इस प्रोसेस में ऊन से मिलने वाले नैचुरल वैक्स से एक कंपाउंड निकाला जाता है. जिसे आगे प्रोसेस करने के लिए भेजा जाता है. तब जाकर कही विटामिन डी-3 बनाया जाता है. एक्सपर्ट्स कहते हैं कि ये तरीका कई सालों से सेफ और अफेक्टिव माना जाता है. साथ ही इसमें भेड़ों को भी किसी तरह का नुकसान नहीं होता है.
क्या हर किसी को Vitamin D सप्लीमेंट लेना चाहिए?
विशेषज्ञों का कहना है कि हर व्यक्ति को Vitamin D सप्लीमेंट लेने की जरूरत नहीं होती.
यह इस बात पर निर्भर करता है कि:
- आपकी उम्र क्या है.
- आपकी डाइट कैसी है.
- आप कितनी धूप लेते हैं.
- आपकी जीवनशैली कैसी है.
- कोई बीमारी है या नहीं.
- जरूरत पड़ने पर ब्लड टेस्ट की रिपोर्ट क्या कहती है. वहीं डॉक्टरों का कहना है कि Vitamin D सप्लीमेंट खरीदते समय केवल विज्ञापन या Plant-Based होने के दावे पर भरोसा न करें. हमेशा अच्छी गुणवत्ता वाले, भरोसेमंद कंपनी के प्रोडक्ट चुनें और डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही सप्लीमेंट लें.
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(Disclaimer: यहां दी गई सलाह और ये कॉन्टेंट केवल सामान्य जानकारी के लिए पेश किया गया है. यानी ये जानकारी किसी भी तरह से डॉक्टर्स राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए आप किसी एक्सपर्ट्स या फिर जिस समस्या से जूझ रहे हैं, उस क्षेत्र के डॉक्टर से सलाह लेने के बाद ही उस एडवाइस पर अमल करें. Fit Rahe India इस जानकारी के लिए किसी भी जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है. इस तरह के कॉन्टेंट को देखने के लिए आप हमारे Youtube चैनल के साथ जुड़ सकते हैं.)

