Pratik Yadav Demise: पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव के छोटे बेटे प्रतीक यादव का 13 मई बुधवार तड़के निधन हो गया. निधन के बाद उनका पोस्टमार्टम करवाया गया. जिसके बाद से ही रिपोर्ट्स का इंतजार किया जा रहा था. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार प्रतीक लंबे समय से फेफड़ों की बीमारी पल्मोनरी एम्बोलिज्म की बीमारी से ग्रसित थे. जिसका अस्पताल में काफी लंबे समय से इलाज भी चल रहा था.
जानकारी के मुताबिक फेफड़ों की बीमारी के चलते ही उन्हें दो से तीन दिन अस्पताल में भर्ती होने की आवश्यकता पड़ी थी. लेकिन डिसचार्ज मिल हया था. वहीं उनके निधन के बाद से ही उन्हें होने वाली फेफड़ों की बीमारी को लेकर सवाल उठ रहे हैं. आखिर पल्मोनरी एम्बोलिज्म कितनी खतरनाक बीमारी है? क्या इससे जान जा सकती है? आइए डिटेल में जानते हैं.
इस बीमारी ने बढ़ा दी चिंता
वहीं फिलहाल आधिकारिक तौर पर इस बीमारी की पुष्टि पब्लिकली नहीं की गई है. लेकिन लोगों को फेफड़ों की बीमारी को लेकर चिंता काफी बढ़ गई है. कई हेल्थ एक्सपर्ट्स का ऐसा मानना है कि ये गंभीर बीमारी शरीर को तेजी से कमजोर करती है. अगर समय रहते इलाज न किया जाए तो ये जानलेवा भी साबित हो सकती है. इसलिए समय रहते इलाज करवा लेना चाहिए. जानकारी के मुताबिक पल्मोनरी एम्बोलिज्म से ग्रसित व्यक्ति को सांस लेने में दिक्कत, लगातार खांसी, ऑक्सीजन की कमी हो सकती है.
ब्लड क्लॉट की समस्या पैदा करती है
अमेरिकन लंग एसोसिएशन के अनुसार ये कंडिशन जब किसी व्यक्ति के पैर या फिर शरीर के दूसरे हिस्से में ब्लड क्लॉट बन जाता है किसी आर्टरी में ब्लड क्लॉट हो जाता है तो इसे पल्मोनरी एम्बोलिज्म कहा जाता है. ये आर्टरी फेफड़ों की मसल्स को खून, पोषण और ऑक्सीजन पहुंचाने का काम करती हैं, इसलिए इनमें किसी भी तरह की रुकावट मसल्स का फंक्शन बंद होने का कारण बन सकती है.
क्या है इस बीमारी का इलाज?
क्या इस बीमारी का इलाज हो सकता है? तो इस सवाल का जवाब है हां अमेरिकन लंग एसोसिएशन के मुताबिक प्लमोनरी एम्बोलिज्म का इलाज हो सकता है नहीं है. लेकिन ये एक मेडिकल इमरजेंसी कंडिशन है. जिसका पता लगते ही तुरंत डॉक्टर को दिखाना चाहिए. अगर नजरअंदाज किया गया या फिर अगर इसके इलाज को टाला गया तो घटना गंभीर हो सकती है. डॉक्टर ऐसी कंडिशन में ब्लड क्लॉट को घोलने वाली दवाएं देते हैं, खून को पतला करने वाली दवाएं देते हैं, सर्जरी की जरूरत हो तो सर्जरी की जाती है. कई तरह की सावधानियां बरतने की सलाह दी जाती है.
चकमा दे सकती है ये बीमारी
वहीं कई बार ये बीमारी चकमा भी दे जाती है. क्योंकि अक्सर इसके लक्षण ब्लड क्लॉट के साइज पर ही निर्भर करते हैं. इसलिए अगर सांस फूलने की समस्या हो रही हो, सांस लेने पर छाती में गंभीर दर्द हो रहा हो, चक्कर आ रहे हों, सिर घूमने की समस्या हो लो बीपी के कारण बेहोशी हो, खून वाली खांसी आ रही हो, पैरों में दर्द हो रहा या फिर सूजन की समस्या हो, पीठ, गर्दन, कंधे, जबड़े में दर्द हो रहा हो, अधिक पसीना आता हो, स्किन का रंग बदल जाए, बुखार आए, होठ या फिर नाखून नीले पड़ जाए. इस तरह की समस्या हो तो अलर्ट हो जाना चाहिए, और तुरंत डॉक्टर से जांच करवा लेनी चाहिए.
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