क्या आप कोलेस्ट्रॉल की दवा लेते हैं या लेने की सोच रहे हैं? दिल की सेहत को समझने के लिए कोलेस्ट्रॉल, ट्राइग्लिसराइड्स और ब्लड प्रेशर के बीच का संबंध जानना बहुत ज़रूरी है. इस विषय को आसान भाषा में समझाते हुए डॉ. विवेक पाल सिंह बताते हैं कि हर कोलेस्ट्रॉल बुरा नहीं होता और हर व्यक्ति को दवा की आवश्यकता भी नहीं होती.
क्या है बैड कोलेस्ट्रॉल?
आमतौर पर LDL (लो-डेंसिटी लिपोप्रोटीन) को बैड कोलेस्ट्रॉल कहा जाता है, लेकिन यह पूरी तरह गलत नहीं है। शरीर में इसकी भी एक भूमिका होती है, हालांकि इसका अधिक स्तर धमनियों में जमा होकर दिल की बीमारी का जोखिम बढ़ा सकता है. वहीं HDL गुड कोलेस्ट्रॉल है, जो शरीर को सुरक्षा देता है.
ट्राइग्लिसराइड्स को अक्सर नज़रअंदाज़ किया जाता है, लेकिन इनका बढ़ा हुआ स्तर भी हार्ट डिजीज का बड़ा कारण बन सकता है, खासकर जब यह हाई ब्लड प्रेशर और डायबिटीज़ के साथ जुड़ा हो.
दिल का दौरा (हार्ट अटैक) सिर्फ कोलेस्ट्रॉल से नहीं होता, बल्कि कई फैक्टर्स जैसे स्मोकिंग, तनाव, मोटापा और अनियमित जीवनशैली भी इसमें योगदान देते हैं। इसलिए केवल एक पैरामीटर पर ध्यान देना पर्याप्त नहीं है.
स्टैटिन दवाओं को लेकर भी कई भ्रम हैं। ये दवाएं सही मरीजों में बहुत फायदेमंद होती हैं और हार्ट अटैक के जोखिम को कम करती हैं। हालांकि, इन्हें बिना डॉक्टर की सलाह के शुरू या बंद करना नुकसानदायक हो सकता है.
सही डाइट, नियमित एक्सरसाइज, वजन नियंत्रण और तनाव प्रबंधन से आप अपने दिल को स्वस्थ रख सकते हैं. दवा कब जरूरी है, यह डॉक्टर की सलाह से ही तय करें। स्वस्थ जीवनशैली और सही जानकारी ही बेहतर हार्ट हेल्थ की कुंजी है.
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