Risks Of Sleeping Too Much Or Too Little: नींद हमें दिनभर एक्टिव रखने का काम करती है. अगर हम भरपूर नींद लेने के बाद काम करते हैं तो पूरे दिन एक्टिव फील होता है. थकान महसूस नहीं होती. लेकिन आजकल लोगों का लाइफस्टाइल काफी खराब है. नतीजा कुछ लोग कम नींद लेते हैं और कुछ लोग जरूरत से अधिक नींद लेते हैं. ऐसे में ये जानना जरूरी हो जाता है कि रात में बहुत कम सोने से या फिर जरूरत से अधिक सो लेने से क्या नुकसान होते हैं.
जानकारी के मुताबिक अगर आप भी ऐसा ही करते हैं, तो आपकी ये आदत आपकी बॉडी के जरूरी अंगों की उम्र तेजी से बढ़ाना शुरू कर देता है. इसपर एक स्टडी भी हुई है. ये स्टडी रिपोर्ट नेचर जर्नल में 13 मई को पब्लिश हुई. अब ये जानना जरूरी हो जाता है कि आखिर ये स्टडी क्या कहती है. आइए डिटेल में जानते हैं.
कम और ज्यादा सोने से क्या इफेक्ट पड़ता है
जारी हुई स्टडी रिपोर्ट के मुताबिक अगर आप ज्यादा सो लेते हैं या फिर कम सोते हैं दोनों ही केस में अफेक्ट आपके ब्रेन, हार्ट, फेफड़े और यहां तक कि इम्यून सिस्टम पर पड़ सकता है. रिसर्च बताती है कि सबसे कम खतरा उन लोगों में देखा गया है जो रोजाना करीब 6.4 से 7.8 घंटे की नींद लेते हैं. इस स्टडी को कोलंबिया यूनिवर्सिटी के असिस्टेंट प्रोफेसर ऑप रेडियोलॉजी जुनहाओ वेन ने लीड किया.
उम्र बढ़ने की रफ्तार हो जाती तेज
जुनहाओ वेन का कहना है कि हमारी रिसर्च में सामने आया कि बहुत कम या फिर बहुत ज्यादा सो लेने से शरीर के लगभग हर अंग पर असर पड़ता है. हर अंग के उम्र बढ़ने की रफ्तार तेजी से बढ़ जाती है. अब ऐसे में ये जानना जरूरी हो जाता है कि आखिर कितनी देर सोना सही रहेगा. हालांकि अच्छी नींद ब्रेन और पूरी बॉडी को हेल्दी रखने में बेहद जरूरी है.
इस टेक्नोलॉजी का किया गया इस्तेमाल
जानकारी के मुताबिक रिसर्चर्स ने इस रिसर्च में एजिंग को मापने के लिए मशीन लर्निंग टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया गया है. इसमें टीम द्वारा 17 अलग-अलग ऑर्गन सिस्टम्स के लिए 23 बायोलॉजिकल क्लॉक्स तैयार किए. इन क्लॉक्स में स्कैनस ब्लड टेस्ट, बॉडी प्रोटीन से जुड़ी कई जानकारियां जोड़ी गई. नतीजा ये पता लगाया जा सका कि किसी इंसान के ऑर्गन उसकी असली उम्र के मुकाबले कितनी तेजी से बूढ़े हो रहे हैं.
क्या है हेल्दी स्लीप रेंज?
बता दें कि इस स्टडी में यूके बायोबैंक के करीब पांच लाख लोगों के हेल्थ डेटा का एनालिसिस किया गया था. वहीं रिजल्ट्स में यू-शेप पैटर्न सामने आया. यानी जो लोग 6 घंटे से कम सोते थे और जो 8 घंटे से अधिक सोते थे. दोनों में एजिंग की स्पीड अधिक पाई गई. तो फिर सही से कौन सो रहा है? ये सबसे बड़ा सवाल है. इसपर रिसर्च कहती है कि हेल्दी स्लीप रेंज 7 घंटे ही मानी गई है.
क्योंकि अगर आप कम नींद लेने वाले लोगों की कैटेगरी में हैं तो डिप्रेशन, एंग्जायटी, मोटापा, टाइप-2 डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर यहां तक की हार्ट डिजीज की समस्या का शिकार हो सकते हैं. वहीं कम और ज्यादा दोनों तरह की नींद फेफड़ों की बीमारियों जैसे क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज और अस्थमा से भी जुड़ी मिली. इसके अलावा एसिड रिफ्लक्स जैसी पेट की समस्याओं का रिस्क भी बढ़ता पाया गया.
नींद का असर पूरी बॉडी पर पड़ता है
ये तो सभी जानते हैं कि नींद का असर हमारी पूरी बॉडी पर पड़ता है. हालांकि रिसर्चर्स ने बुजुर्गों के डेटा को भी एनालाइस किया जो कम नींद लेते थे. उनके डेटा में डिप्रेशन के रिस्क बढ़े होने की जानकारी सामने आई. रिसर्चर्स ने पाया कि कम नींद सीधे तौर पर डिप्रेशन को बढ़ा सकती है. रिसर्चर्स का मानना है कि कम और ज्यादा सोने वाले लोगों के लिए अलग-अलग तरह की हेल्थ केयर की जरूरत पड़ सकती है. हालांकि स्टडी में ये साबित नहीं हुआ कि बूढ़ा होने की वजह सिर्फ नींद ही है. लेकिन स्लीपिंग हैबिट्स बढ़ती उम्र में हेल्थ को बेहतर बनाए रखने में काफी मददगार साबित हो सकती है.
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