Sehat Ki Khabar Fit Rahe India: नमस्कार फिट रहे इंडिया की लेटेस्ट अपडेट्स में आपका स्वागत है. साल 2026 के अंत तक हर जिले में होगा ब्लड बैंक. सरकार ने शुरू किया खास मिशन इसपर बात करेंगे सेहत की खबर के पहले सेगमेंट में. बढ़ती हुई हीटवेव को ध्यान में रखते हुए सरकार ने स्कूलों के लिए जारी की नई गाइडलाइंस. इसपर बात करेंगे सेहत की खबर के दूसरे सेगमेंट में. सूंघकर पता लगाया जा सकेगा अल्जाइमर है कि नहीं. इसपर बात करेंगे सेहत की खबर के आखिरी और तीसरे सेगमेंट में चलिए शुरू करते हैं.
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देश में हर जरूरतमंद मरीज को समय पर सुरक्षित खून मिल सके इसी लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने एक बड़ा कदम उठाया है. हाल ही में केंद्र सरकार ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ एक राष्ट्रीय स्तर की बैठक की, जिसमें ब्लड बैंक और ब्लड ट्रांसफ्यूजन सेवाओं की तैयारियों की समीक्षा की गई. यह बैठक वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए आयोजित की गई, जिसकी अध्यक्षता स्वास्थ्य मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव और राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन (NACO) के Director of General डॉ. राकेश गुप्ता ने की. देश के सभी 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रतिनिधियों ने इसमें भाग लिया.
बैठक में ब्लड ट्रांसफ्यूजन सेवाओं के हर महत्वपूर्ण पहलू की विस्तार से जांच की गई. इसमें लाइसेंसिंग, ब्लड डोनेशन, जांच प्रक्रिया, स्टोरेज और वितरण से लेकर रिकॉर्ड रखने तक की पूरी व्यवस्था का आकलन किया गया.इसके लिए eRaktKosh, CDSCO और ब्लड बैंक मैनेजमेंट सिस्टम जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के डेटा का उपयोग किया गया.
समीक्षा में यह सामने आया कि कई राज्यों ने अच्छा काम किया है, लेकिन अभी भी कुछ चुनौतियां बनी हुई हैं. देश के लगभग 10% जिलों में अभी भी ब्लड सेंटर नहीं हैं, जो एक बड़ी चिंता का विषय है. साथ ही कई ब्लड बैंक अभी तक डिजिटल सिस्टम से नहीं जुड़े हैं, जिससे रियल-टाइम मॉनिटरिंग में दिक्कत आती है.
सरकार ने स्पष्ट लक्ष्य तय किया है कि दिसंबर 2026 तक हर जिले में कम से कम एक ब्लड सेंटर हो और हर नागरिक को समय पर सुरक्षित खून मिल सके. इसके लिए राज्यों को निर्देश दिए गए हैं कि वे लाइसेंसिंग प्रक्रिया को मजबूत करें, स्वैच्छिक रक्तदान को बढ़ावा दें और ब्लड डोनेशन कैंप्स को बेहतर तरीके से आयोजित करें.
इसके अलावा, आधुनिक जांच तकनीकों को अपनाने और ब्लड के बेहतर उपयोग के लिए कंपोनेंट सेपरेशन क्षमता बढ़ाने पर भी जोर दिया गया है। सरकार चाहती है कि सभी ब्लड बैंक eRaktKosh और BBMS जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म से पूरी तरह जुड़ें, ताकि पारदर्शिता और ट्रैकिंग बेहतर हो सके.
बैठक में यह भी कहा गया कि जिन लोगों में संक्रमण (TTI) पाया जाता है, उन्हें समय पर इलाज से जोड़ना बेहद जरूरी है। इसके लिए रेफरल सिस्टम को और मजबूत किया जाएगा.
इस पूरी योजना को लागू करने के लिए एक तय समयसीमा के साथ एक्शन प्लान बनाया गया है, जिसकी हर महीने और हर तिमाही समीक्षा की जाएगी. इसमें नेशनल ब्लड ट्रांसफ्यूजन काउंसिल, राज्य स्तरीय संस्थाएं, CDSCO और इंडियन रेड क्रॉस सोसाइटी मिलकर काम करेंगे.
सरकार का साफ संदेश है कि देश में एक मजबूत, पारदर्शी और प्रभावी ब्लड ट्रांसफ्यूजन सिस्टम तैयार किया जाएगा, ताकि हर जरूरतमंद व्यक्ति को सही समय पर सुरक्षित खून मिल सके.
अब बढ़ते हैं सेहत की खबर के दूसरे सेगमेंट की ओर
चिलचिलाती हुई गर्मी को ध्यान में रखते हुए मौसम विभाग ने येलो अलर्ट घोषित किया है. वहीं दिल्ली सरकार ने भी इस गर्मी को ध्यान में रखते हुए और बच्चों की हेल्थ पर फोकस करते हुए स्कूलों के लिए नई हीटवेव गाइडलाइंस जारी की हैं. दरअसल इस गाइडलाइंस का मकसद है बच्चों की सेहत पर खास फोकस करना.
दिल्ली सरकार का मकसद लू और डिहाइड्रेशन से बच्चों को सुरक्षित बचाए रखना है. बच्चों की सेहत को प्राथमिकता देते हुए सरकार ने ये गाइडलाइंस जारी की है. वहीं येलो अलर्ट के तहत स्कूलों को भी नियमों का पालन करना होगा. आइए जानते हैं कि स्कूलों ने गाइडलाइन में क्या कदम उठाए गए हैं.
इस गाइडलाइंस के अनुसार स्कूलों को निर्देश दिया गया कि हर 45 से 60 मिनट के अंदर एक खास वॉटर बेल बजाई जाए. इस वॉटर बेल का मकसद होगा बच्चों को याद दिलाना कि वह रुकें और पानी पिने का समय निकालें. जिससे की डिहाइड्रेशन की समस्या न हो. इसी के साथ छात्रों को भी अपने साथ पर्याप्त मात्रा में पानी लाने के लिए निर्देशित किया गया है. वहीं स्कूलों को कई जगहों पर ठंडे और साफ पानी उपलब्ध करवाने का निर्देश दिया है.
वहीं गर्मियों में भी तेज धूप में बच्चे बाहर मैदान में खेलते हैं. स्कूल भी ऐसी आउटडोर एक्टीविटीज को प्रमोट करते हैं.लेकिन यैलो अलर्ट और सरकार द्वारा जारी गाइडलाइन के अनुसार अब खुले में तेज धूप में होने वाली एक्टीविटी पर रोक लगाई गई है. असेंबली के समय को कम किया जाएगा. या फिर किसी छायादार जगहों पर या फिर इनडोर जगहों पर असेंबली को शिफ्ट करने का आदेश हैं. अगर कोई क्लास ओपन एयर में करवाई जा रही है तो उसपर भी रोक रहेगी. आउटडोर स्पोर्ट्स को भी फिलहाल के लिए पूरी तरह से रोकने के निर्देश जारी कर दिए गए हैं.
वहीं बच्चों की सुरक्षा का खास ख्याल रखने के लिए एक खास तरह का सिस्टम लागू किया जा रहा है. इसे ‘बडी सिस्टम’ नाम दिया गया है. इस सिस्टम के तहत दो छात्र एक दूसरे की हेल्थ पर खास नजर रखेंगे. इतना ही नहीं. अवेयरनेस सेशन चलाए जाएंगे. जिसमें स्कूली बच्चों को लू से बचने और उससे होने वाले लक्षणों कैसे बचाव किया जाए इस बारे में सिखाया जाएगा.
इसी अवेयरनेस सेशन में किसी भी छात्र की अगर तबियत अचानक बिगड़ जाती है तो उसे कैसे तुरंत उपचार दिया जाए ये भी सुनिश्चित किया जाएगा.. स्कूल के साथ-साथ माता-पिता और शिक्षकों के लिए भी खास निर्देश दिए गए हैं. जिसके तहत स्कूल प्रशासन तो पेरंट्स के साथ लगातार संपर्क में रहेंगे. इसके लिए व्हाट्सऐप के माध्यम से मौसम विभाग की ओर से जारी एडवाइजरी व्हाट्सऐप ग्रुप पर शेयर की जाएगी. नोटिस बोर्ड पर लू से बचाव के पोस्टर्स लगाए जाएंगे.
अब बढ़ते हैं सेहत की खबर के तीसरे और आखिरी सेगमेंट में
वैज्ञानिक अब यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या साधारण सा “सूंघने का टेस्ट” भविष्य में Alzheimer’s disease का खतरा पहले ही बता सकता है, यानी तब जब याददाश्त कमजोर होने के लक्षण अभी शुरू भी नहीं हुए हों। दरअसल, हमारी सूंघने की क्षमता सीधे दिमाग के उस हिस्से से जुड़ी होती है जिसे Hippocampus कहा जाता है, और यही हिस्सा याददाश्त और सीखने के लिए जिम्मेदार होता है. Alzheimer’s में यही भाग धीरे-धीरे प्रभावित होने लगता है, इसलिए शुरुआती असर गंध पहचानने की क्षमता पर दिखाई दे सकता है.
रिसर्च में पाया गया है कि जो लोग सामान्य खुशबुएं जैसे कॉफी, नींबू या गुलाब को सही से पहचान नहीं पाते, उनमें आगे चलकर दिमागी कमजोरी का खतरा ज्यादा हो सकता है। कुछ मामलों में यह भी देखा गया कि बाएं नाक से गंध पहचानने की क्षमता ज्यादा प्रभावित होती है, जो इस बीमारी का एक शुरुआती संकेत हो सकता है. इस टेस्ट में व्यक्ति को अलग-अलग गंध सूंघाई जाती हैं और उससे पूछा जाता है कि वह किस चीज की खुशबू है. उसके जवाबों के आधार पर डॉक्टर यह अंदाजा लगाते हैं कि दिमाग की कार्यक्षमता कैसी है.
इस तरह का स्मेल टेस्ट आसान, सस्ता और बिना किसी दर्द के किया जा सकता है, इसलिए यह बड़े स्तर पर लोगों की शुरुआती जांच के लिए उपयोगी माना जा रहा है. हालांकि, यह पूरी तरह से पक्का तरीका नहीं है, क्योंकि उम्र बढ़ने, सर्दी-जुकाम या धूम्रपान जैसी वजहों से भी सूंघने की क्षमता कम हो सकती है. इसलिए डॉक्टर इसे अकेले इस्तेमाल नहीं करते, बल्कि इसे मेमोरी टेस्ट और ब्रेन स्कैन जैसे अन्य परीक्षणों के साथ मिलाकर देखते हैं. कुल मिलाकर, यह टेस्ट एक शुरुआती चेतावनी देने वाला तरीका हो सकता है, जिससे बीमारी का खतरा समय रहते पहचाना जा सके और आगे की जांच समय पर की जा सके.
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(Disclaimer: यहां दी गई सलाह और ये कॉन्टेंट केवल सामान्य जानकारी के लिए पेश किया गया है. यानी ये जानकारी किसी भी तरह से डॉक्टर्स राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए आप किसी एक्सपर्ट्स या फिर जिस समस्या से जूझ रहे हैं, उस क्षेत्र के डॉक्टर से सलाह लेने के बाद ही उस एडवाइस पर अमल करें. Fit Rahe India इस जानकारी के लिए किसी भी जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)

