Smell test for Alzheimer: क्या सिर्फ आपकी सूंघने की क्षमता (smell) से यह पता लगाया जा सकता है कि भविष्य में आपको Alzheimer’s disease का खतरा है? सुनने में यह थोड़ा अजीब लग सकता है, लेकिन मेडिकल रिसर्च में इस पर तेजी से काम हो रहा है. आमतौर पर लोग अल्ज़ाइमर को सिर्फ भूलने की बीमारी के रूप में जानते हैं, लेकिन वैज्ञानिक अब मानते हैं कि इसके शुरुआती संकेत याददाश्त से पहले भी दिख सकते हैं और उनमें से एक है सूंघने की क्षमता में बदलाव.
एनडीटीवी की एक रिपोर्ट के अनुसार डॉक्टर वीनित बांगा ने बताया कि “स्मेल टेस्ट के जरिए अल्ज़ाइमर का जल्दी पता लगाने का विचार अब काफी चर्चा में है. कई बार सूंघने की क्षमता में कमी, याददाश्त कमजोर होने से कई साल पहले ही दिखने लगती है.”
दिमाग और सूंघने की क्षमता का कनेक्शन
हमारी सूंघने की शक्ति सीधे दिमाग के उस हिस्से से जुड़ी होती है जिसे Hippocampus कहा जाता है. यही हिस्सा हमारी याददाश्त और सीखने की क्षमता को नियंत्रित करता है. रिसर्च बताती है कि अल्ज़ाइमर से पीड़ित लोगों में अलग-अलग गंध पहचानने की क्षमता धीरे-धीरे कम होने लगती है, खासकर दिमाग के एक हिस्से में ज्यादा असर दिखता है. इसका मतलब यह है कि अगर किसी व्यक्ति को रोजमर्रा की खुशबुएं जैसे कॉफी, नींबू या गुलाब पहचानने में दिक्कत होने लगे, तो यह दिमाग में हो रहे शुरुआती बदलाव का संकेत हो सकता है.
रिसर्च क्या कहती है?
कई स्टडीज में यह पाया गया है कि जिन लोगों का स्मेल टेस्ट में प्रदर्शन कमजोर होता है, उनमें आगे चलकर मानसिक कमजोरी (cognitive impairment) का खतरा ज्यादा होता है. यानी सूंघने की क्षमता में गिरावट, अल्ज़ाइमर का शुरुआती संकेत बन सकती है.
स्मेल टेस्ट कैसे होता है?
यह टेस्ट बहुत आसान और बिना दर्द वाला होता है. इसमें व्यक्ति को अलग-अलग चीजों की खुशबू सूंघाई जाती है और उनसे पूछा जाता है कि यह कौन सी गंध है. इसके बाद उनके जवाबों के आधार पर स्कोर तय किया जाता है. कम स्कोर वाले लोगों को ज्यादा जोखिम वाला माना जा सकता है. लेकिन डॉक्टर साफ कहते हैं कि यह कोई पक्का निदान (diagnosis) नहीं है, बल्कि सिर्फ एक शुरुआती संकेत है.
इसके फायदे क्या हैं?
स्मेल टेस्ट की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह सस्ता, आसान और कहीं भी किया जा सकता है. बड़े स्तर पर लोगों की जांच के लिए यह एक अच्छा विकल्प बन सकता है. अगर समय रहते जोखिम का पता चल जाए, तो लाइफस्टाइल में बदलाव और सही इलाज से बीमारी की रफ्तार धीमी की जा सकती है.
किन बातों का ध्यान रखें?
हर बार सूंघने की कमजोरी का मतलब अल्ज़ाइमर नहीं होता. उम्र बढ़ना, धूम्रपान, साइनस की समस्या या अन्य बीमारियां भी इसकी वजह हो सकती हैं. इसलिए स्मेल टेस्ट को अकेले भरोसेमंद नहीं माना जाता. इसे अन्य जांचों जैसे दिमाग के स्कैन और कॉग्निटिव टेस्ट के साथ ही इस्तेमाल किया जाना चाहिए.
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(Disclaimer: यहां दी गई सलाह और ये कॉन्टेंट केवल सामान्य जानकारी के लिए पेश किया गया है. यानी ये जानकारी किसी भी तरह से डॉक्टर्स राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए आप किसी एक्सपर्ट्स या फिर जिस समस्या से जूझ रहे हैं, उस क्षेत्र के डॉक्टर से सलाह लेने के बाद ही उस एडवाइस पर अमल करें. Fit Rahe India इस जानकारी के लिए किसी भी जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)

