Sidhi Maternal Deaths: मध्य-प्रदेश के सीधी जिले से कुछ समय पहले जानकारी सामने आई थी कि पिछले एक साल अप्रेल से मार्च 2026 के बीच में कुल 53 प्रेग्नेंट महिलाओं की मौत हो गई. जानकारी है कि इनकी मौत प्रेग्नेंसी के दौरान हुई, या फिर डिलीवरी के दौरान या फिर डिलीवरी के बाद हुई थी. इनमें सबसे कम उम्र वाली महिला की उम्र 19 साल थी. जबकि मरने वाली महिलाओं की औसत उम्र 26 साल है.
अब इस मामले पर NHRC नेशनल ह्यूमन राइट्स कमिशन ऑफ इंडिया ने सीधी जिले में स्वास्थ्य कमी के कारण हुई इन मौतों पर खुद ही संज्ञान लिया है. खबर है कि, राज्य स्वास्थ्य विभाग द्वारा की गई कम्युनिटी मैटरनल हेल्थ लीग ग्रेडिंग में यह जिला लगातार सबसे नीचे के तीन जिलों में रहा है. अब इस मामले पर मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव को नोटिस जारी कर दो हफ़्ते के अंदर मामले पर पूरी रिपोर्ट मांगी गई है.
क्या थी इन मौतों की वजह?
भारत के राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने एक मीडिया रिपोर्ट पर खुद से संज्ञान लिया है, जिसमें बताया गया है कि अप्रैल 2025 से मार्च 2026 के बीच एक साल में मध्य प्रदेश के सीधी जिले में डिलीवरी से पहले और बाद में 53 गर्भवती माताओं की मौत हुई है. इन मौतों की मुख्य वजह जागरूकता और मेडिकल सुविधाओं की कमी थी. खबर है कि, राज्य स्वास्थ्य विभाग द्वारा की गई कम्युनिटी मैटरनल हेल्थ लीग ग्रेडिंग में सीधी जिला लगातार सबसे नीचे के तीन जिलों में रहा है. आयोग ने पाया है कि मीडिया रिपोर्ट की बातें, अगर सच हैं, तो मानवाधिकारों के उल्लंघन का गंभीर मुद्दा उठाती हैं. इसलिए, उसने मध्य प्रदेश सरकार के चीफ सेक्रेटरी को नोटिस जारी करके दो हफ़्ते में डिटेल्ड रिपोर्ट मांगी है.
29 मई 2026 को छपी मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, 53 मैटरनल डेथ में से, मरने वालों की एवरेज उम्र 26 साल बताई गई है, जिनमें से ज़्यादातर पहली या दूसरी बार मां बनी थीं. मीडिया रिपोर्ट में कम्युनिटी हेल्थ सेंटर, प्राइमरी हेल्थ सेंटर और डिस्ट्रिक्ट हॉस्पिटल में डॉक्टरों और टेक्निकल एक्सपर्ट्स समेत बेसिक इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी का भी पता चला है, जिसकी वजह से मरीज़ों को दूर रीवा ज़िले में हायर मेडिकल फैसिलिटीज़ के लिए रेफर किया जाता है, जिससे रास्ते में जान का खतरा रहता है. रिपोर्ट के मुताबिक, एक एम्बुलेंस ड्राइवर ने बताया कि सीधी ज़िले में कई गाँवों में ठीक से रोड कनेक्टिविटी नहीं है, जिससे मानसून के मौसम में मामला और मुश्किल हो जाता है. प्रेग्नेंट औरतों को एम्बुलेंस तक पहुँचने से पहले दो से तीन किलोमीटर तक खाट पर ले जाना पड़ता है.
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