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बेअसर हो रही Typhoid की दवाईयां, रिसर्च में हुआ खुलासा, बरतें ये सावधानियां

Typhoid भारत में हर दूसरे इंसान को होने वाली बीमारी है. ये एक संक्रामक बीमारी है, जो साल्मोनेला टाइफी नामक बैक्टीरिया के कारण होती है.

Typhoid Antibiotic: टाइफाइड, भारत में हर दूसरे इंसान को होने वाली बीमारी है. ये एक संक्रामक बीमारी है, जो साल्मोनेला टाइफी नामक बैक्टीरिया के कारण होती है. ये मुख्य रूप से दूषित पानी और भोजन के सेवन से फैलता है. ताजा जानकारी के अनुसार टाइफाइड की कुछ दवाओं का असर लोगों पर नहीं रहा है. मेडिकल जर्नल द लैंसेट पत्रिका में इस बात का जिक्र किया गया है.

टाइफाइड के दौरान लगातार तेज बुखार, सिरदर्द, कमजोरी, पेट दर्द, और कब्ज या दस्त जैसे लक्षण दिखाई देते हैं. लेकिन अक्सर कई लोग इन लक्षणों को सामान्य मानकर छोड़ देते हैं. वहीं नई रिसर्च ने दावा किया है कि ये बीमारी अब एक बड़ा आर्थिक और स्वास्थ्य संकट का कारण बन रही है.

क्या कहती है रिसर्च?

द लैंसेट पत्रिका में छपी रिपोर्ट के अनुसार साल 2023 में देश में टाइफाइड से जुड़ा कुल आर्थिक बोझ करीब 12,300 करोड़ रुपये रहा है. इसमें सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि 87% खर्च एंटीबायोटिक-रेजिस्टेंट संक्रमण की वजह से हुआ. इसमें सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि 87 प्रतिशत खर्च एंटीबायोटिक-रेजिस्टेंट संक्रमण के कारण हुआ. इसका मतलब है कि टाइफाइड बीमारी में यूज होने वाली दावाएं असर नहीं कर रही और इलाज में ज्यादा पैसे खर्च हो रहे हैं. वहीं एंटीबायोटिक-रेजिस्टेंट टाइफाइड का मतलब है कि इस बीमारी की दवाओं के खिलाफ ज्यादा ताकतवर हो गया है.

रिसर्च में पाया गया है कि ये टाइफाइड वाली दवाई मरीजों पर असर नहीं कर रही. जिसकी वजह से इलाज लंबा और महंगा हो गया है. क्योंकि इस बीमारी को कम करने के लिए दूसरी दवाओं का प्रयोग किया जा रहा है, जो महंगी हो रहा है. वहीं रिसर्च में सामने आया है कि कम उम्र के बच्चों पर इसका सबसे ज्यादा असर पड़ रहा है. दवाईयों पर होने वाले खर्च का आधे से ज्यादा हिस्सा इसी उम्र के बच्चों के इलाज में जा रहा है. रिपोर्ट में ये बात भी सामने आई है कि करीब 70,000 परिवारों को भारी आर्थिक संकट का सामना करन पड़ रहा है.

बरतें ये सावधानियां

पेयजल और पानी की स्वच्छता: हमेशा पानी उबालकर या फिल्टर करके पीएं। यात्रा के दौरान केवल बोतलबंद पानी का उपयोग करें.
हाथों की स्वच्छता: खाना बनाने, खाने से पहले और शौचालय का उपयोग करने के बाद हाथों को साबुन और गर्म पानी से अच्छी तरह धोएं.
क्या न खाएं: ज्यादा फाइबर वाली सब्जियां (जैसे पत्तागोभी, कच्चा सलाद), मसालेदार और तला हुआ भोजन, फास्ट फूड, और कैफीन (चाय, कॉफी) से बचें.
क्या खाएं: नरम और आसानी से पचने वाला भोजन करें, जैसे दलिया, खिचड़ी, उबले हुए अंडे, और पर्याप्त तरल पदार्थ (नारियल पानी, जूस) लें.
बाहर के खाने से परहेज: स्ट्रीट फूड, खुले में रखे पदार्थ, और बर्फ वाले पेय पदार्थों से पूरी तरह परहेज करें.
स्वस्थ जीवनशैली: पर्याप्त आराम करें. यदि घर में किसी को टाइफाइड है, तो उनके इस्तेमाल किए गए बर्तनों और कपड़ों को गर्म पानी में धोएं. जिससे बैक्टीरिया के फैलने का खतरा कम हो जाता है. वहीं एंटीबायोटिक दवाओं का कोर्स कभी भी अधूरा न छोड़ें, ऐसी स्थिति में बुखार वापस आ सकता है.

यह भी पढ़ें: दवाइयों के दाम बढ़ेंगे! सरकार का बड़ा फैसला, युद्ध से सीधा कनेक्शन? जानें कैसे

(Disclaimer: यहां दी गई सलाह और ये कॉन्टेंट केवल सामान्य जानकारी के लिए पेश किया गया है. यानी ये जानकारी किसी भी तरह से डॉक्टर्स राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए आप किसी एक्सपर्ट्स या फिर जिस समस्या से जूझ रहे हैं, उस क्षेत्र के डॉक्टर से सलाह लेने के बाद ही उस एडवाइस पर अमल करें. Fit Rahe India इस जानकारी के लिए किसी भी जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)

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