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AI के इस्तेमाल से हो जाएगा Brain Fry, स्टडी में टूल्स को लेकर हुए कई खुलासे

AI Mental Fatigue: आज के समय एआई (AI) का प्रयोग काफी होता है. लेकिन एक रिसर्च में ये सामने आया है कि ये इंसान के मेंटल हेल्थ खराब कर रहा है.

AI Mental Fatigue: आज के समय आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानि एआई (AI) का प्रयोग काफी होता है. लेकिन एक रिसर्च में ये सामने आया है कि ये इंसान के मेंटल हेल्थ खराब कर रहा है. हार्वर्ड बिजनेस रिव्यू में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक जो लोग एआई का प्रयोग हद से ज्यादा करते हैं उनमें मानसिक थकान के लक्षण देखें गए हैं.

बता दें कि फटीग का मतलब अत्यधिक थकान, थकावट, या शारीरिक और मानसिक कमजोरी है. यह ऊर्जा की भारी कमी की स्थिति है, जिसमें आराम करने के बाद भी थकावट दूर नहीं होती. फटीग सुस्ती से लेकर शरीर में भारीपन और मांसपेशियों में कमजोरी तक महसूस करा सकती है. इसलिए इस रिसर्च में ये बात सामने आई है कि AI टूल्स का लगातार इस्तेमाल कर्मचारियों में मानसिक थकान, गलतियां और निर्णय लेने में परेशानी बढ़ा सकता है.

जहां पूरी दुनिया एआई का यूज करके कई काम कर रही है. कई एप्लीकेशन पर इसके फीचर डेवलप हो रहे हैं. एआई (AI) का मतलब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (Artificial Intelligence) है, जिसे हिंदी में ‘कृत्रिम बुद्धिमत्ता’ कहा जाता है. ये कंप्यूटर विज्ञान की एक ऐसी शाखा है जो मशीनों और सॉफ्टवेयर को इंसानों की तरह सोचने, समझने, सीखने और निर्णय लेने की क्षमता प्रदान करती है. इस टूल की मदद से इंसान अपने हर सवाल के जवाब निकलवा सकता है, इमेज बनवा सकता है, एप्लीकेशन बनवा सकते हैं. आज के समय में एआई का प्रयोग ऑफिस ऑफिस तक पहुंच गया है. जिन ऑफिस में कर्मचारियों की जगह 10 हुआ करती अब वहां 5 हो गई है. एआई ने कर्मचारियों तक की संख्या घटा दी.

रिसर्चों ने करीब 1500 कर्मचारियों पर सर्वे किया, जिसमें पाया गया कि जिन जगहों पर एआई टूल्स का ज्यादा इस्तेमाल होता है या फिर एआई टूल्स इस्तेमाल होते हैं, उनमें डिसीजन फटीग (निर्णय लेने में थकान) और काम में गलतियां ज्यादा देखने को मिलीं। सर्वे में लगभग हर सात में से एक कर्मचारी ने माना कि एआई टूल्स को संभालते-संभालते उन्हें मानसिक थकान महसूस होती है। स्टडी में इस स्थिति को “ब्रेन फ्राई” कहा गया है, यानी जब दिमाग पूरी तरह थक जाता है.

क्यों AI Tools का यूज दिमाग के लिए खतरनाक?

स्टडी के मुताबिक ये रिसर्च इस बात का संकेत हैं कि आगे चलकर एआई टूल्स दिमाग के लिए खतरनाक साबित हो सकते हैं. क्योंकि जो लोग इसका यूज करते हैं अगर उनकी उम्मीद के मुताबित रिजल्ट नहीं आता तो वह परेशान हो जाते हैं. जिसके लिए वह बार-बार इसका प्रयोग करते हैं.

एआई टूल्स कई तरह से प्रयोग किए जाते, जैसे- टेक्स्ट और कंटेंट जनरेशन, इमेज जनरेशन और एडिटिंग, वीडियो और ऑडियो निर्माण, कोडिंग और सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट, प्रोडक्टिविटी और मीटिंग असिस्टेंट, मीटिंग रिकॉर्ड करने, नोट्स बनाने और समरी तैयार करने से लेकर न जाने कितने तरह का प्रयोग किया जाता है. इसके लिए यूजर्स एक सिस्टम में कई विंडो ओपन करके बैठे रहते हैं.

कोई काम कुछ सेकंड में पूरा हो जाता है, तो कुछ कामों में मिनट लग जाते हैं. इस लगातार बदलती गति के कारण दिमाग पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है. एआई की क्षमताएं इतनी ज्यादा हैं कि कई बार यह तय करना मुश्किल हो जाता है कि काम कहां रोकना चाहिए. इसलिए वह खुद और अपने एआई वर्कफ्लो के लिए समयसीमा तय करते हैं, ताकि काम संतुलित रह सके.

लेकिन अगर इन टूल्स को सही तरीके से इस्तेमाल किया जाए तो ब्रेन फ्राई की समस्या कम हो सकती है. क्योंकि लोग इन टूल्स से जरूरत से ज्यादा उम्मीद कर लेते हैं और जब ये उम्मीद पूरी नहीं होती, मनमुताबिक काम नहीं हो पाता तो उन्हें मानसिक परेशानी झेलनी पड़ती है.

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