Water intake is essential for brain function: हमारी जिंदगी में बैलेंस्ड डाइट के साथ-साथ पानी को भी उतना ही महत्व दिया जाना चाहिए जितना अन्य फूड्स को दिया जाता है. एक व्यक्ति पानी का सेवन तब करता है जब उसे प्यास लगती है. अगर आप पानी के सेवन को लेकर किसी भी प्रकार की लापरवाही बरतते है तो ये आपके दिमाग के कामकाज को बाधा पहुंचा सकती है.
दरअसल पानी न सिर्फ हमारे शरीर और डाइजेस्टिव सिस्टम के लिए जरूरी है बल्कि हमारा दिमाग सही तरीके से काम करें इसके लिए भी पानी का सेवन जरूरी है. NCBI, LSN, Harvard की रिसर्च रिपोर्ट बताती है कि पानी सिर्फ आपकी प्यास ही नहीं बुझाती, बल्कि आपके दिमाग को भी ठीक तरह से काम करने में मदद करती है. NCBI में पब्लिश्ड रिपोर्ट के अनुसार शरीर में पानी की 1 या 2 प्रतिशत कमी दिमाग की कार्य क्षमता पर बुरा असर डालती है.
ब्रेन फंक्शन के लिए जरूरी पानी का सेवन
गौरतलब है कि दिमाग का लगभग 70–75% हिस्सा पानी से बना होता है, इसलिए सही मात्रा में पानी पीना ब्रेन के सामान्य कामकाज के लिए बेहद जरूरी है. पर्याप्त पानी मिलने पर दिमाग के इलेक्ट्रिकल और केमिकल सिग्नल बेहतर तरीके से काम करते हैं, जिससे याददाश्त, एकाग्रता, सीखने की क्षमता और निर्णय लेने की क्षमता बनी रहती है. वहीं, पानी की कमी (डिहाइड्रेशन) होने पर सिरदर्द, थकान, ध्यान केंद्रित करने में परेशानी और मानसिक प्रदर्शन में कमी ला सकती है. इसलिए पूरे दिन जरूरत के अनुसार पानी का सेवन शरीर को हाइड्रेट रखना और ब्रेन हेल्थ के लिए जरूरी माना जाता है.
ब्रेन फंक्शन के लिए कितना पानी पीना चाहिए?
National Academies of Sciences, Engineering, and Medicine (NASEM) के अनुसार, पुरुषों को प्रतिदिन कुल 3.7 लीटर और महिलाओं को 2.7 लीटर पानी की जरूरत होती है. वहीं, British Journal of Nutrition की रिपोर्ट के मुताबिक शरीर में केवल 1–2% पानी की कमी भी याददाश्त, एकाग्रता और सोचने-समझने की क्षमता को प्रभावित कर सकती है. पर्याप्त हाइड्रेशन से ब्रेन के सामान्य कार्य बेहतर बने रहते हैं और दिमाग की प्राकृतिक सफाई प्रणाली (ग्लिम्फैटिक सिस्टम) भी सामान्य रूप से काम करने में मदद मिलती है.
ब्रेन इलेक्ट्रिकल और केमिकल सिग्नल क्या होते हैं?
ब्रेन की सभी गतिविधियां इलेक्ट्रिकल (विद्युत) और केमिकल (रासायनिक) सिग्नलों के जरिए होती हैं. जब दिमाग की तंत्रिका कोशिकाएं (न्यूरॉन्स) आपस में संदेश भेजती हैं, तो उनके अंदर इलेक्ट्रिकल सिग्नल बनते हैं. वहीं, एक न्यूरॉन से दूसरे न्यूरॉन तक संदेश पहुंचाने के लिए न्यूरोट्रांसमीटर नामक रसायन निकलते हैं, जिन्हें केमिकल सिग्नल कहा जाता है. इन दोनों सिग्नलों की मदद से सोचने, याद रखने, सीखने, शरीर की गतिविधियों को नियंत्रित करने और भावनाओं को महसूस करने जैसे सभी काम होते हैं. शरीर में पानी की कमी होने पर इन सिग्नलों की कार्यक्षमता प्रभावित हो सकती है, जिससे ध्यान, याददाश्त और मानसिक प्रदर्शन पर असर पड़ सकता है.
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FAQs
सवाल: क्या शरीर में पानी की कमी का असर दिमाग पर भी पड़ता है?
जवाब: हां, शरीर में पानी की कमी (डिहाइड्रेशन) होने पर दिमाग के इलेक्ट्रिकल और केमिकल सिग्नल प्रभावित हो सकते हैं. इससे सोचने-समझने की क्षमता, याददाश्त, ध्यान और निर्णय लेने की क्षमता पर असर पड़ सकता है. साथ ही सिरदर्द, चक्कर और थकान जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं.
सवाल: पानी की कमी से दिमाग की “क्लीनिंग” कैसे प्रभावित होती है?
जवाब: पर्याप्त पानी शरीर के सामान्य कार्यों के लिए जरूरी है. विशेषज्ञों के अनुसार, अच्छी हाइड्रेशन से दिमाग की प्राकृतिक अपशिष्ट पदार्थों को साफ करने वाली प्रणाली (ग्लिम्फैटिक सिस्टम) बेहतर ढंग से काम कर सकती है. पानी की कमी होने पर यह प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है, हालांकि इस पर अभी भी वैज्ञानिक शोध जारी है.
सवाल: दिमाग को स्वस्थ रखने के लिए रोज कितना पानी पीना चाहिए?
जवाब: पानी की जरूरत हर व्यक्ति की उम्र, मौसम, स्वास्थ्य और शारीरिक गतिविधि पर निर्भर करती है. सामान्य तौर पर दिनभर में पर्याप्त मात्रा में पानी पीते रहना चाहिए ताकि शरीर हाइड्रेट रहे. यदि प्यास कम लगती हो, बहुत पसीना आता हो या कोई बीमारी हो, तो डॉक्टर की सलाह के अनुसार पानी का सेवन करें.
(Disclaimer: यहां दी गई सलाह और ये कॉन्टेंट केवल सामान्य जानकारी के लिए पेश किया गया है. यानी ये जानकारी किसी भी तरह से डॉक्टर्स राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए आप किसी एक्सपर्ट्स या फिर जिस समस्या से जूझ रहे हैं, उस क्षेत्र के डॉक्टर से सलाह लेने के बाद ही उस एडवाइस पर अमल करें. Fit Rahe India इस जानकारी के लिए किसी भी जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है. इस तरह के कॉन्टेंट को देखने के लिए आप हमारे Youtube चैनल के साथ जुड़ सकते हैं.)

