Weight Loss Drug: वजन घटाना जल्द ही बहुत सस्ता होने वाला है. ये जानकारी सामने आते ही मार्केट में वजन घटाने वाली दवाओं के प्रचार-प्रसार शुरू हुए. जिसे देखते हुए अब सख्ती बरती जा रही है. दरअसल GLP-1 आधारित दवाओं की बढ़ती हुई मांग को देखते हुए. साथ ही इसका गलत इस्तेमाल न हो इन आशंकाओं को भी ध्यान में रखते हुए ड्रग रेगुलेटर्स ने सप्लाई चेन पर कड़ी और पैनी नजर रखना शुरू कर दिया है.
इसी कड़ी में देशभर में 49 जगहों का इंस्पेक्शन किया गया. इसमें ऑनलाइन फार्मेसी, थोक विक्रेता यहां तक की वेलनेस क्लीनिक्स को भी शामिल किया गया था. आप पूछेंगे कि ऐसा क्यों? इसके पीछे का मकसद साफ है कि वजन घटाने वाली ऐसी दवा बिना किसी प्रिस्क्रिप्शन के मार्केट में न पहुंच पाए. दरअसल फिलहाल मार्केट फिलहाल बिना प्रिस्क्रिप्शन के अवैध रूप से इन दवाओं को बेचा जा रहा है.
फार्मा कंपनियों को दी सख्त चेतावनी
उधर सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गेनाइजेशन (CDSCO) ने भी फार्मा कंपनियों को चेतावनी दी है. ये सख्त चेतावनी फार्मा कंपनियों को ऐसी दवाओं के आम प्रचार को लोगों के बीच न करने की मांग की है. इसी क्रम में Drug Controller General of India ने भी एक बड़ा कदम उठाते हुए लगभग 90 अनअप्रूव्ड फिक्स्ड-डोज कॉम्बिनेशन (FDC) दवाओं की जांच के आदेश दिए हैं. इनमें मल्टीविटामिन, फोलिक एसिड, सिरप, पैरासिटामोल कॉम्बिनेशन, क्लोट्रिमाजोल-बेटामेथासोन क्रीम और कुछ दर्द निवारक दवाएं शामिल हैं.
भारत में आएंगी सस्ती दवाएं
हाल ही में सैमाग्ल्यूटाइट का पेटंट खत्म हो गया है. जिसके बाद से ही GLP-1 दवाओं के सस्ते जेनरिक वर्जन बाजार में आने लगे हैं. इसे बिना डॉक्टर की सलाह के साथ ही मार्केट में इसके सस्ते वर्जन आने लगे हैं. हालांकि अगर कोई व्यक्ति इन दवाओं का सेवन बिना डॉक्टर की सलाह के करता है, तो उसके लिए खतरा काफी बढ़ सकता है. एक्सपर्ट्स का कहना है कि ये दवाएं गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए होती हैं. ऐसे में अगर आप बिना निगरानी के ऐसी दवाएं लेते हैं, तो ये सेहत के लिए काफी नुकसानदेह हो सकता है.
सरकार ने जारी की एडवाइजरी
वहीं इसी क्रम में दवाओं के गलत प्रचार को रोकने के लिए डॉक्टर ने सलाह के इस्तेमाल को रोकने के लिए सख्त कदम उठाए जा रहे हैं. हेल्थ रेगुलेटर्स ने साफ कर दिया है कि मरीजों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा और नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कड़ी कार्रवाई होगी. 10 मार्च 2026 को सरकार की ओर से एक खास एडवाइजरी भी जारी की गई. जिसमें दवा बनाने वाली कंपनियों को सरोगेट एडवर्टाइजिंग (छुपे हुए प्रचार) और किसी भी तरह के अप्रत्यक्ष प्रमोशन पर पूरी तरह रोक लगाने के निर्देश दिए गए. इसका मकसद है कि लोगों को गुमराह होने से बचाया जा सके और दवाओं का गलत या ऑफ-लेबल इस्तेमाल न बढ़े.
यह भी पढ़ें: टीबी से लड़ने के लिए सरकार चलाएगी 100 दिन का अभियान, स्वास्थ्य मंत्रालय का ऐलान
(Disclaimer: यहां दी गई सलाह और ये कॉन्टेंट केवल सामान्य जानकारी के लिए पेश किया गया है. यानी ये जानकारी किसी भी तरह से डॉक्टर्स राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए आप किसी एक्सपर्ट्स या फिर जिस समस्या से जूझ रहे हैं, उस क्षेत्र के डॉक्टर से सलाह लेने के बाद ही उस एडवाइस पर अमल करें. Fit Rahe India इस जानकारी के लिए किसी भी जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)


