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डॉक्टर भी नहीं हैं सुरक्षित! WHO की रिपोर्ट में खुलासा, भारत समेत इन देशों में हेल्थवर्कर्स पर सबसे ज्यादा हिंसा

Healthcare Workers Report: दुनिया में हर 10 में से 4 हेल्थवर्कर्स फिजिकल हिंसा का शिकार होते हैं। जानिए भारत समेत किन देशों में सबसे ज्यादा हमले और इसके बड़े कारण।

Healthcare Workers Report: मरीजों की मदद करने के लिए अस्पताल में कई लोग मौजूद होते हैं. डॉक्टर्स, नर्स और दूसरे हेल्थकेयर स्टॉफ वर्कर्स. लेकिन इन्हीं की सुरक्षा खतरे में जा रही है. दरअसल इन हेल्थ-वर्कर्स के साथ होने वाली हिंसा, मारपीट, बुरा व्यवहार. इन सबका हेल्थ वर्कर्स को सामना करना पड़ रहा है.

इसपर विश्व स्वास्थ्य संगंठन यानी (WHO) ने गंभीर वैश्विक चिंता का विषय बताया है. हालांकि ये समस्या सिर्फ किसी एक देश तक सीमित नहीं है. संगठन का कहना है कि दुनियाभर में बड़ी संख्या में हेल्थवर्कर्स अपने पूरे करियर के दौरान किसी न किसी तरह की हिंसा को झेल ही रहे हैं. जो बेहद चिंता का विषय है. बात भारत की करें तो भारत में भी डॉक्टरों पर हमले की कई जानकारियां सामने आती रहती हैं. तमाम खबरें आती है जिससे इन हेल्थकेयर वर्कर्स की सुरक्षा पर सवाल उठ रहा है.

फिजिकल हिंसा का शिकार हो रहे डॉक्टर्स

WHO का कहना है कि दुनियाभर में हर 10 में से 4 हेल्थकेयर वर्कर्स अपने करियर में कम से कम एक बार तो फिजिकल वॉयलेंस का शिकार होते हैं. इन सबमें अगर गलत तरीके से बात, गाली-गलौज को शामिल कर दिया जाए तो इसका भी आंकड़ा बढ़ेगा. अभी आंकड़ा 60 प्रतिशत तक है. यानी अगर ये गाली-गलौज को जोड़ा जाए तो 62 प्रतिशत तक हो सकता है. अस्पतालों में काम करने वाले बड़ी संख्या में स्वास्थ्यकर्मी किसी न किसी रूप में हिंसा का सामना कर रहे हैं.

किस देश में सबसे अधिक मामले

इन हिंसा के मामले कि न देशों में अधिक देखने को मिलते हैं? इसपर Atención Primaria मेडिकल जर्नल में एक रिपोर्ट पब्लिश हुई है. इस रिपोर्ट के अनुसार डॉक्टर और हेल्थकेयर के खिलाफ हो रही हिंसा सिर्फ विकास की ओर बढ़ने वाले देशों में ही नहीं, बल्कि जो देश डेवलप हो चुके हैं उनमें भी एक गंभीर समस्या बने हुए हैं. रिसर्च में ऐसी हिंसा के मामले जर्मनी से सामने आए हैं. जर्मनी जैसे देश का आंकड़ा 91 प्रतिशत दर्ज किया गया है.

दूसरे नंबर पर चीन है जहां 90 प्रतिशत, पेरू में 84.5 प्रतिशत, तुर्की में 84 प्रतिशत और भारत में 77.3 प्रतिशत ऐसे मामले हैं. जॉर्डन में 63 प्रतिशत, बुल्गारिया में 55 प्रतिशत, इटली में 51.5 प्रतिशत, पोलैंड में 51 प्रतिशत और अमेरिका के 47 प्रतिशत इमरजेंसी डॉक्टरों ने भी अपने कार्यकाल के दौरान हिंसा का सामना करने की बात कही.

क्यों हो रही ये हिंसा

अब हिंसा अगर हो रही है तो इसका कुछ तो कारण होगा ही? इसपर एक्सपर्ट्स का कहना है कि दुनिया के अलग-अलग देशों से मामले सामने आए हैं. जिनके कारण भी अलग-अलग हैं. जैसे कई अस्पतालों में मरीजों की संख्या ज्यादा है, हेल्थकेयर की वर्कर्स की कमी है, लंबा इंतजार करना, डॉक्टर और मरीज के बीच सही से कॉम्यूनिकेशन हो पाना. इलाज से जुड़ी उम्मीद मरीजों में स्ट्रेस पैदा करती है जो हिंसा का रूप लेती है. एक्सपर्ट्स कहते हैं कि कई लोग कम सब्र वाले होते हैं. उदहारण के तौर पर इलाज पर पैसे खर्च किए और चाहते हैं कि तुरंत रिजल्ट मिल जाए. ऐसी उम्मीद रखते हैं. जब ऐसा नहीं होता तो गुस्सा निकालते हैं. किसपर? इन्हीं हेल्थवर्कर्स पर.

कोई रूल कानून नहीं?

अब ऐसा नहीं है कि डॉक्टर्स की सेफ्टी के लिए कोई रूल कोई कानून नहीं बनाए गए हैं. भारत के 19 राज्यों ने हेल्थकेयर वर्कर्स और उनकी सुरक्षा के लिए नियम-कानून तैयार किए हैं. उसके बावजूद भी डॉक्टर हमले अभी भी जारी हैं.

यह भी पढ़ें: मानसून में क्यों बढ़ जाती है खुजली? जानें कारण और बचने के टिप्स

(Disclaimer: यहां दी गई सलाह और ये कॉन्टेंट केवल सामान्य जानकारी के लिए पेश किया गया है. यानी ये जानकारी किसी भी तरह से डॉक्टर्स राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए आप किसी एक्सपर्ट्स या फिर जिस समस्या से जूझ रहे हैं, उस क्षेत्र के डॉक्टर से सलाह लेने के बाद ही उस एडवाइस पर अमल करें. Fit Rahe India इस जानकारी के लिए किसी भी जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)

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sarthak arora Senior Sub Editor
अपनी उंगलियों से खबरों को खटाखट लिखना, और लिखने से पहले पढ़ना और समझना. इस तरह पत्रकारिता के क्षेत्र में 7 साल का अनुभव पाया. कार्य जारी है और इसी तरह लिखना, पढ़ना और सीखना निरंतर जारी रहेगा.
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