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सामने वाला उबासी ले तो हमें क्यों आती है? जानें ऐसा क्यों होता है और क्या है कनेक्शन

Why Is Yawning Contagious: आपने नोट किया होगा कि जब कोई व्यक्ति हमारे सामने उबासी लेता है, तो कुछ सेकेंड्स बाद हमें भी उबासी आने लगती है.

Why Is Yawning Contagious: आपने नोट किया होगा कि जब कोई व्यक्ति हमारे सामने उबासी लेता है, तो उसके अगले ही कुछ सेकेंड्स बाद हमें भी उबासी आने लगती है. ऐसा सभी के साथ होता है. इसमें कोई ऐसा नहीं कह सकता कि मेरे साथ ऐसा नहीं होता. लेकिन क्या आप जानते हैं कि ऐसा क्यों होता है? इसके पीछे का कारण काफी दिलचस्प है. कुछ मामलों में ऐसा भी होता है कि हम उबासी के बारे में सोच भी ले तो हमें उबासी आने लगती है.

इसके पीछे का कारण पूछेंगे तो ये हमारे दिमाग में एक खास प्रक्रिया का पार्ट है. जिसे आप “कन्टेजियस यॉनिंग” (Contagious Yawning) कहा जाता है. इसका मतलब ही यही होता है कि दूसरे व्यक्ति को उबासी आती है तो वो अपने आप दूसरे लोगों तक फैल जाती है.

नकल करने के लिए सिग्नल देता है दीमाग

आपको बता दें कि हमारे दिमाग में कुछ खास तरह के न्यूरॉन्स पाए जाते हैं. जिसे मिरर न्यूरॉन्स कहा जाता है. ऐसे न्यूरॉन्स तब एक्टिव होते हैं जब हमारे सामने कोई व्यक्ति कुछ काम कर रहा हो. या फिर हम खुद ही उस व्यक्ति को देख लें. उदहारण के तौर पर अगर किसी को जम्हाई लेते हुए देखते हैं, तो ये न्यूरॉन्स उसी क्रिया की नकल करने के लिए हमारे दिमाग को संकेत देते हैं. यही वजह है कि हमें भी उबासी आने लगती है.

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इमोशन्स के साथ जुड़ा होता है कनेक्शन

दरअसल उबासी का कनेक्शन सिर्फ फिजीकली नहीं इसका डिरेक्ट कनेक्शन हमारे भावनाओं से होता है. दरअसल ऐसी रिसर्च सामने आई कि उन लोगों को देखकर भी काफी उबासी आती है, जिनसे हमारा कुछ इमोशनल रिलेशन होता है. उदहारण के तौर पर परिवार का कोई सदस्य या फिर हमारे क्लोज लोग. यह हमारे दिमाग का एक तरीका है जिससे वह सामने वाले की स्थिति से तालमेल बैठाता है.

दिमाग का कूलिंग सिस्टम है उबासी

क्या आप जानते हैं कि उबासी हमारे शरीर के लिए नेचुरल कूलिंग सिस्टम की तरह काम करता है. दरअसल जब उबासी ले रहे होते हैं तो हवा हमारे शरीर के अंदर जाती है. जिससे हमारा ब्लड सर्कुलेशन बढ़ता है. ये दिमाग के टेंप्रेचर को संतुलित रखने में मदद करता है. क्योंकि उबासी से हमारे शरीर में ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ती है. दिमाग भी ज्यादा एक्टिव होता है. यही कारण है कि कई बार थकान के बीच उबासी हमें थोड़ी राहत भी देती है.

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(Disclaimer: यहां दी गई सलाह और ये कॉन्टेंट केवल सामान्य जानकारी के लिए पेश किया गया है. यानी ये जानकारी किसी भी तरह से डॉक्टर्स राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए आप किसी एक्सपर्ट्स या फिर जिस समस्या से जूझ रहे हैं, उस क्षेत्र के डॉक्टर से सलाह लेने के बाद ही उस एडवाइस पर अमल करें. Fit Rahe India इस जानकारी के लिए किसी भी जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)

sarthak arora
sarthak arora
अपनी उंगलियों से खबरों को खटाखट लिखना, और लिखने से पहले पढ़ना और समझना. इस तरह पत्रकारिता के क्षेत्र में 7 साल का अनुभव पाया. कार्य जारी है और इसी तरह लिखना, पढ़ना और सीखना निरंतर जारी रहेगा.
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