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World Bipolar Day: बार-बार मूड स्विंग होना बाइपोलर डिसऑर्डर का संकेत! समय रहते करें पहचान

World Bipolar Day: साइकोलॉजिस्ट के अनुसार महिलाओं में ये डिसऑर्डर ज्यादा देखने को मिलते हैं. इसलिए समय रहते इनकी पहचान करनी जरूरी है.

World Bipolar Day: कई बार मूड स्विंग गंभीर बीमारी का संकेत भी दे सकता है. बता दें कि एक पल में खुश होना दूसरे पल में नाराज होना इसे बाइपोलर डिसऑर्डर की कैटगरी में रखा जाए तो गलत नहीं होगा. यानि एक मानसिक स्वास्थ्य की स्थिति से जुड़ा हुआ है. बाइपोलर डिसऑर्डर की स्थिति में मूड, ऊर्जा और कार्य करने की क्षमता में गंभीर उतार-चढ़ाव होता है. ये एक दीर्घकालिक बीमारी है, लेकिन दवा (मूड स्टेबलाइजर), थेरेपी और जीवनशैली में बदलाव (नियमित नींद, नशा मुक्ति) करने से काफी हद तक इसे कंट्रोल किया जा सकता है.

बता दें कि 30 मार्च को ‘वर्ल्ड बाइपोलर डे’ मनाया जाता है ताकि इस रोग के प्रति लोगों को जागरूक किया जा सके. कई बार लोग मूड स्विंग हो जाना सामान्य लगता है लेकिन ये गंभीर बीमारी का संकेत हो सकता है. वहीं साइकोलॉजिस्ट के अनुसार महिलाओं और पुरुषों में इनके संकेत अलग-अलग देखने को मिलते हैं. लेकिन ये डिसऑर्डर महिलाओं में ज्यादा देखने को मिलती है.

क्या है बाइपोलर डिसऑर्डर?

बाइपोलर डिसऑर्डर, बाइपोलर डिसऑर्डर को मूड डिसऑर्डर भी कहा जाता है. इस स्थिति में मन कभी खुश होता है तो कभी उदास. जब व्यक्ति बहुत ज्यादा खुश होता है, तो इस स्थिति को मेनिया कहते हैं और बहुत दुखी वाली स्थिति को डिप्रेशन कहा जाता है. इस तरह बाइपोलर डिप्रेशन को मेनिया और डिप्रेशन दो कैटेगरी में रखा जाता है. वहीं इन दोनों स्थिति के लक्षणों की पहचान करके आप इस डिसऑर्डर को आसानी से पहचान सकते हैं.

मैनिया के लक्षण: बिना किसी कारण उत्तेजित होना, खुद को भगवान समझना, काल्पनिक योजनाएं बनाना, कभी-कभी ज्यादा धार्मिक हो जाना, डिमांडिंग हो जाना, बहुत ज्यादा खुश होना, बहुत ज्यादा दुखी होना के लक्षणों पर मैनिया की स्थिति होती है.

डिप्रेशन के लक्षण: खुद को किसी काम का नहीं समझना, निराशा में जीना, सोचने-समझने का स्तर धीमा पड़ जाना, बहुत ज्यादा खाना या बहुत कम खाना, प्रोडक्टिविटी न के बराबर हो जाना, आत्महत्या के विचार आने पर डिप्रेशन के लक्षण होते हैं.

लेकिन घबराने की बात नहीं है, बाइपोलर डिसऑर्डर को डायग्रोस करके इसका इलाज संभव है. इसके इलाज के लिए किसी ब्लड टेस्ट या अन्य प्रकार की जांच की जरूरत नहीं होती बस पेशेंट से सामान्य बातचीत के जरिए ये पता लगाया जा सकता है कि उसे ये गंभीर डिसऑर्डर है या नहीं? वहीं इसके लिए हो सके तो जरूरी दवाईयां और साइकोथेरेपी भी दी जाती है.

आज के समय की महिलाएं दोहरी जिंदगी जीती है, जिसके चलते वह स्ट्रेस और चिंताओं से घिरी रहती है. लेकिन हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाने के लिए आपको अपना ध्यान रखने की जरूरत है.

इस स्थिति में बाइपोलर होने की बढ़ जाती संभावना

कई बार महिलाओं में प्रेग्रेंसीके समय या फिर प्रेग्रेंसी के बाद, मेनोपॉज स्टेज में बाइपोलर डिसऑर्डर होने की संभावना बढ़ जाती है. ये समय महिलाओं के लिए ज्यादा स्ट्रेस भरे होते हैं. चिड़चिड़ापन, नींद की समस्या, चिंता या डिप्रेशन जैसे लक्षण महिला को इस डिसऑर्डर में ला सकता है. इसलिए इन स्टेज पर एक महिला को ज्यादा केयर की जरूरत होती है. कहा जाता है कि जो महिला पहले से बाइपोलर डिसऑर्डर से ग्रस्त हैं, उनमें इसके लक्षण फिर से नजर आने लगते हैं. इसलिए अगर आपके घर में कोई महिला इन स्टेज से गुजर रही है तो आपको उनकी नियमित निगरानी करने की सख्त जरूरत है.

यह भी पढ़ें: DDH क्या है? वरुण धवन की बेटी हो चुकी शिकार, जानें लक्षण


(Disclaimer: यहां दी गई सलाह और ये कॉन्टेंट केवल सामान्य जानकारी के लिए पेश किया गया है. यानी ये जानकारी किसी भी तरह से डॉक्टर्स राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए आप किसी एक्सपर्ट्स या फिर जिस समस्या से जूझ रहे हैं, उस क्षेत्र के डॉक्टर से सलाह लेने के बाद ही उस एडवाइस पर अमल करें. Fit Rahe India इस जानकारी के लिए किसी भी जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)

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