World Happiness Report: घर से ऑफिस और फिर ऑफिस से घर. या फिर स्कूल कॉलेज से हर कोई इस तरह का लाइफस्टाइल जीता है. लेकिन यही लाइफस्टाइल काफी मुसिबत बनता जा रहा है. इस पैटर्न को आपने भी देखा होगा कि मोबाइल फोन हाथ में आते ही बस स्क्रीन, रील्स, प्सोटिंग. इस तरह हमारा समय निकलता जा रहा है. पहले तक ये सिर्फ एक टाइमपास था. लोग इसे टाइमपास के लिए ही इस्तेमाल किया करते थे.
लेकिन अब ये टाइमपास रोज की आदत बनता जा रहा है. एक चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई जिसमें खुलासा हुआ कि युवाओं की यही आदत अब धीरे-धीरे युवाओं की खुशियों को छीनता हुआ जा रहा है. ये रिपोर्ट पूरी दुनिया को ध्यान में रखकर तैयार की गई है. ये इस ओर इशारा करती है कि युवाओं का टाइमपास उनकी खुशियां छीनता जा रहा है.
सोशल मीडिया पर अधिक समय तक एक्टिव
ये पैटर्न टीनऐज लड़कियों में अधिक देखने को मिल रहा है, जो लंबे समय से सोशल मीडिया पर एक्टिव रहती हैं. वर्ल्ड हैप्पीनेस की ओर से ये रिपोर्ट जारी की घई. जिसमें टीनऐज लड़कियां जो 15 साल की एज ग्रुप में है, और सोशल मीडिया का इस्तेमाल अधिक करती है. उनमें ऐसा देखा जा रहा है कि सैटिस्फैक्शन कम होता जा रहा है. जितनी देर वो अपना समय स्क्रीन के सामने बिताती हैं वो सैटिस्फाइड हैं. वहीं दूसरी ओर उन लोगों को भी देखा गया जो सोशल मीडिया से कोसो दूरी बनाकर चल रहे हैं.
सोशल मीडिया पर क्या कॉन्टेंट देख रही यूथ
अब इसका कारण माना जा रहा है कि सोशल मीडिया पर यूथ आखिर किस तरह का कॉन्टेंट देख रही है. जिसे लगातार स्क्रॉल किया जा सके. एल्गोरिदम से आगे बढ़ाए गए पोस्ट और इन्फ्लुएंसर-टाइप लाइफस्टाइल, यूजर्स पर ज्यादा असर डालते हैं. हालांकि जब ऐसे प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल दोस्तोंं या फिर परिवार से जुड़ने के लिए होता हो तो इसका रिजल्ट काफी उल्टा और बेहतर होता है.
इन देशों पर पड़ रहा अधिक इफेक्ट
वहीं ये खास बात है कि इन देशों पर जैसे अमेरिका, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड जैसे देश. इनमें ये पैटर्न अधिक देखा गया है. जानकारी मिली कि ऐसे लोगों में पिछले 10 सालों में सैटिस्फैक्शन की कमी देखी गई है. खासतौर पर ये युवाओं में अधिक बढ़ता जा रहा है. हालांकि पूरी तरह सोशल मीडिया को नहीं कोसा जा सकता. जिन लोगों को अपने परिवार या फिर समाज से कम सपोर्ट मिला उनमें भी ये पैटर्न देखा गया है.
सोशल मीडिया बैन का कारण
कई देशों में सोशल मीडिया को बैन किया जा रहा है. इसके पीछे का कारण यही है. सरकार द्वारा बरती जा रही सख्ती इसी कारण से है. ऑस्ट्रेलिया ने 16 साल की उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया बैन करने की दिशा में एक कदम उठाया है.
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