Three-year-old burn injury recovery: पुणे से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है. टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक यहां रहने वाला एक तीन साल का बच्चा जो लगभग 60 प्रतिशत तक जल गया था साथ ही कार्डियक अरेस्ट का शिकार हुआ था. उसका सफल इलाज किया गया है. जानकारी है कि बच्चे की हालत काफी गंभीर थी इस मुश्किलों में उसे अस्पताल में भर्ती करवाया गया था. डॉक्टरों की लगातार निगरानी और 40 दिनों से अधिक चले गहन इलाज के बाद बच्चा स्वस्थ होकर घर लौट सका.
जानकारी के अनुसार बच्चे को अंकुरा अस्पताल में PICU और पीडियाट्रिक इमरजेंसी सर्विसेज़ में एडमिट करवाया गया था. डॉक्टर का कहना है कि बच्चे का शरीर बुरी तरह लगभग 60 प्रतिशत तक जल गया था. जब तक उसे हमारे पास रेफर किया गया था उसे कार्डियक अरेस्ट भी आ चुका था.
शरीर के दूसरे अंगों पर असर
वहीं डॉक्टर ने कहा कि बच्चे का शरीर इतना जल चुका था कि इसका असर उसके बाकी अंगों पर भी पड़ सकता है लंबे समय तक विकलांगता के अलावा, इंफेक्शन, शॉक, सांस लेने की समस्या यहां तक की दूसरी जानलेवा दिक्कतों का सामना भी करना पड़ सकता है. हालांकि डॉक्टरों ने हालत की गंभीरता को समझते हुए उसके जरूरी ऑर्गन्स को सपोर्ट देने का काम किया, दर्द को कंट्रोल किया, इंफेक्शन को रोका गया, घाव की एडवांस देखभाल करना शुरू किया. उसका पूरा इलाज हुआ जिसमें रेस्पिरेटरी सपोर्ट, इन्फेक्शन कंट्रोल के सख्त तरीके, न्यूट्रिशनल रिहैबिलिटेशन, बार-बार जलने के घाव की ड्रेसिंग, कोलेजन ड्रेसिंग, डीब्राइडमेंट प्रोसीजर और इंटेंसिव रिहैबिलिटेशन शामिल थे.
सावधान रहने की जरूरत है
डॉक्टर ने लोगों को सलाह दी कि ऐसे मामलों में सावधान रहने की जरूरत होती है. क्योंकि बुरी तरह जसे बच्चों में छोटी दिक्कत भी काफी जल्द से जानलेवा भी बन सकती है. डॉक्टर ने बताया कि जब शरीर में जलने से गंभीर सूजन हो सकती है. मल्टी ऑर्गन फेलियर का खतरा बढ़ जाता है. कई बार डायलिसिस या फिर इंटेसिव इलाज की भी जरूरत पड़ सकती है.
40 दिन की देखभाल के बाद हुआ सुधार
जानकारी के मुताबिक इस इलाज में 40 दिन से भी अधिक समय लगा. डॉक्टरों का कहना है कि इस बच्चे ने बहुत हिम्मत भी दिखाई. हॉस्पिटल में 40 दिनों से अधिक इंटेंसिव और प्रोटोकॉल वाली देखभाल के बाद बच्चे में काफी हद तक सुधार देखने को मिल गया है. जानकारी है कि अब उसके घाव अच्छी तरह भर भी गए और बिना किसी सपोर्ट के नॉर्मल सांस भी ले पा रहा है. अच्छे से दूध पी पा रहा है. इस तरह उसे धीरे-धीरे ताकत भी मिल रही है.
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(Disclaimer: यहां दी गई सलाह और ये कॉन्टेंट केवल सामान्य जानकारी के लिए पेश किया गया है. यानी ये जानकारी किसी भी तरह से डॉक्टर्स राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए आप किसी एक्सपर्ट्स या फिर जिस समस्या से जूझ रहे हैं, उस क्षेत्र के डॉक्टर से सलाह लेने के बाद ही उस एडवाइस पर अमल करें. Fit Rahe India इस जानकारी के लिए किसी भी जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)

