India Drug Import Rules: केंद्र सरकार ने फार्मास्युटिकल सेक्टर में रिसर्च और इनोवेशन को बढ़ावा देने और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है. सरकार ने एक ड्राफ्ट जारी किया है. इस ड्राफ्ट के तहत रिसर्च, टेस्टिंग (Examination, Test or Analysis) और नॉन-क्लिनिकल टेस्टिंग के लिए कम मात्रा में दवाओं के आयात की प्रक्रिया को सरल बनाने का प्रस्ताव रखा गया है.
इस प्रस्ताव के तहत अब एनालिटिकल और नॉन-क्लिनिकल टेस्टिंग के लिए कम मात्रा में दवाओं का आयात करने वाले आवेदकों को पहले की तरह लाइसेंस लेने की आवश्यकता नहीं होगी. इसके बजाय उन्हें केवल एक पूर्व सूचना (Prior Intimation Form) ऑनलाइन जमा करनी होगी. सूचना जमा होते ही मिलने वाली Acknowledgement के आधार पर दवाओं का आयात किया जा सकेगा.
किन दवाओं पर लागू नहीं होंगे ये नियम
हालांकि ड्राफ्ट के तहत तैयार किए गए नए नियमों के सभी पर लागू नहीं किया जाएगा. कुछ खास प्रकार की दवाओं को आयात करने के लिए पुराने नियमों पर ही काम करना होगा. इन दवाओं में सेक्स हार्मोन (Sex Hormones), साइटोटॉक्सिक दवाएं (Cytotoxic Drugs), बीटा-लैक्टम दवाएं (Beta Lactam Drugs),जीवित सूक्ष्मजीव युक्त बायोलॉजिक्स (Biologics Containing Live Microorganisms), नारकोटिक एवं साइकोट्रॉपिक पदार्थ (Narcotic and Psychotropic Substances) जैसी दवाओं पर पुराने नियमों के तहत ही काम करना होगा.
स्टार्टअप और उद्योगों को मिलेगा फायदा
सरकार के इस प्रस्तावित संशोधन से रिसर्च, टेस्टिंग और R&D के लिए कम मात्रा में दवाओं के आयात पर लाइसेंस लेने की अनिवार्यता खत्म होने की उम्मीद है. ऐसे में रिसर्च कर रहे संस्थान, कंपनियां और स्टार्टअप्स पर सरकारी नियमों के पालन का बोझ कम होगा और वे बिना देरी के अपनी टेस्टिंग और रिसर्च से जुड़े काम कर सकेंगे. ऑनलाइन सूचना (इंटिमेशन) प्रणाली पूरी प्रक्रिया को तेज, आसान और पारदर्शी बनाएगी.
सरकार का मानना है कि इस कदम से देश में फार्मास्युटिकल रिसर्च और इनोवेशन को बढ़ावा मिलेगा, सरकारी नियमों की प्रक्रिया अब अधिक सरल और प्रभावी होंगी तथा ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ को मजबूती मिलेगी. इससे भारत में दवा अनुसंधान और नवाचार के लिए बेहतर माहौल तैयार होने की उम्मीद है.
जनता से मांगे गए सुझाव
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने इस ड्राफ्ट नोटिफिकेशन को सार्वजनिक परामर्श के लिए जारी किया है. संबंधित पक्ष अपनी आपत्तियां या सुझाव अंडर सेक्रेटरी (ड्रग्स), स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय को निर्धारित पते पर या ईमेल के माध्यम से भेज सकते हैं.
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(Disclaimer: यहां दी गई सलाह और ये कॉन्टेंट केवल सामान्य जानकारी के लिए पेश किया गया है. यानी ये जानकारी किसी भी तरह से डॉक्टर्स राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए आप किसी एक्सपर्ट्स या फिर जिस समस्या से जूझ रहे हैं, उस क्षेत्र के डॉक्टर से सलाह लेने के बाद ही उस एडवाइस पर अमल करें. Fit Rahe India इस जानकारी के लिए किसी भी जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)

