Congenital Scoliosis: जब मां के गर्भ में ही बच्चे की रीढ़ की हड्डी मुढ़ जाए तो इस कंडिशन को कहा जाता है. कंजेनिटल स्कोलियोसिस कहा जाता है… अब तक इसका सही इलाज नहीं था. अगर था भी तो काफी मुश्किल माना जाता था. लेकिन अब बेहतर ट्रीटमेंट की उम्मीद जगी है. दरअसल AIIMS के डॉक्टर ने इस मुश्किल सर्जरी का इलाज निकाल लिया है.
जानकारी है कि दिल्ली एम्स के डॉक्टरों ने इस गंभीर कंजेनिटल स्कोलियोसिस वाले बच्चों पर एक स्टडी की. इस स्टडी में जानकारी मिली है कि Hi-POAD तकनीक की मदद से ऐसी सर्जरी करना संभव हो सकता है. इस समस्या को ठीक किया जा सकता है. जो बच्चें इस कंडिशन का शिकार है, उनके लिए राहत भरी उम्मीद जगी है. आपको बता दें कि ये रिसर्च प्रतिष्ठित मेडिकल जर्नल यूरोपियन स्पाइन जर्नल में भी पब्लिश हुई है.
क्या होता है कंजेनिटल स्कोलियोसिस
पहले जान लेते हैं कि आखिर कंजेनिटल स्कोलियोसिस क्या होता है? एक्सपर्ट्स का कहना है कि कुछ बच्चे जिनकी जन्म के दौरान ही रीढ़ की हड्डी टेढ़ी हो जाती है. इसका कारण होता है मां के गर्भ में ही बच्चे की रीढ़ की हड्डियां गलत तरीके से बनती है. जिसके कारण रीढ़ की हड्डी का डेवलपमेंट नहीं हो पाता है.
क्या होता है कारण?
आप कारण पूछेंगे तो जेनेटिक कारणों से हो सकता है. वहीं ये समस्या हर 10 हजार बच्चों में से किसी एक को हो सकती है. ये ऐसी कंडिशन है जिसमें बच्चे की रीढ़ जन्म से ही एक तरफ झुकी होती है. इसको लेकर चिंता इसलिए भी है क्योंकि इसका सीधा असर दूसरे अंगों पर भी पड़ता है. इससे हार्ट, किडनी को भी नुकसान हो सकता है. कई बच्चे ऐसे भी होते हैं जिन्हें इस कंडिशन के कारण सांस लेने में भी परेशानी देखी जाती है.
कंजेनिटल स्कोलियोसिस के लक्षण क्या होते हैं
इसके लक्षणों की बात करें तो उनमें शामिल हैः
-बच्चे की पसलियां एक तरफ ज़्यादा साफ दिखना
-कमर का एक जैसा न होना
-एक कूल्हे का दूसरे से ऊंचा दिखना
-शरीर एक तरफ झुका हुआ दिखना
क्या होती है Hi-PoAD तकनीक?
स्टडी में सामने आया कि इसे Hi-PoAD तकनीक की मदद से ठीक किया जाता है. इसलिए ये जानना जरूरी है कि आखिर इससे कैसे पीड़िक ठीक किया जा सकता है? इसका जवाब है कि इस तकनीक के अंदर रीढ़ की हड्डी में अधिक स्क्रू लगाए जाते हैं. जिसमें हड्डी के कुछ हिस्सों को काटने की जरूरत पड़ती है. कुछ हिस्सों को काटकर रीढ़ को लचीला बनाने की कोशिश की जाती है. अगर रीढ़ की हड्डी टेढ़ी है तो उसे घुमाया जाता है और उसे सही डायरेक्शन दी जाती है. ऐसे ही सर्जरी पूरी की जाती है.
इसपर एम्स के डॉक्टर ने बताया कि उन्होंने जब एम्स में इस समस्या से पीड़ित बच्चों पर इस तकनीक का इस्तेमाल किया तो उनमें काफी बेहतर रिजल्ट देखने को मिले. स्पाइन में काफी सुधार देखने को मिला और समस्याएं भी काफी कम देखने को मिली. जिससे ये पता चलता है कि By Birth टेढ़ी रीढ़ वाले चुनिंदा मरीजों के लिए यह तकनीक एक बेहतर विकल्प बन सकती है.
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