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क्या 2 साल से कम उम्र के बच्चों को मोबाइल देना सही है? नई रिसर्च में स्क्रीन टाइम को लेकर बड़ा खुलासा

Baby Screen Time: नई रिसर्च के अनुसार 2 साल से कम उम्र के बच्चों को स्क्रीन टाइम देने से भाषा, नींद, आंखों और भावनात्मक विकास पर असर पड़ सकता है. जानें एक्सपर्ट्स की सलाह.

Baby Screen Time: आजकल पेरंट्स जब बच्चे रोते हैं, तो उनके हाथों में मोबाइल फोन या फिर टैबलेट पकड़ा देते हैं. अब इसे लेकर ग्लोबल रिसर्च में बड़े रिव्यू से पता चला कि आम होती आदत बच्चे के विकास पर लंबे समय तक असर डाल सकती है. इसपर UK की चार यूनिवर्सिटी ने रिसर्च की.

इसमें रिसर्चर्स ने पाया कि दो साल से कम उम्र के बच्चों और टॉडलर्स में रेगुलर स्क्रीन एक्सपोज़र से लंबे समय तक सेहत और विकास से जुड़े कई तरह के खतरे हो सकते हैं. इस रिव्यू में खुलासा दिया कि कम उम्र वाले बच्चों को जानबूझकर स्क्रीन टाइम बिल्कुल नहीं देना चाहिए.

क्या स्क्रीन टाइम से पड़ता असर

रिसर्च में ये साबित नहीं हुआ कि स्क्रीन का इस्तेमाल सीधे तौर पर डेवलपमेंट डिसऑर्डर का कारण बन सकता है. लेकिन रिसर्चर्स ये कहते हैं कि अधिक सावधानी बरतने की ज्यादा जरूरत है. दरअसल अधिक स्क्रीन देखने से बच्चों में माता-पिता के साथ बॉन्डिंग कम, लैंग्वेज सीखने में देरी, खेलने के कम मौके, स्लीप साइकल में गड़बड़ी, आंखों की हेल्थ से जुड़ी समस्याएं पाई गई. बच्चों के स्वास्थ्य के लिए ये चिंता का विषय है.

वहीं कई बार पेरंट्स बच्चों को संभालने के लिए नैनी या फिर केयरटेकर रख देते हैं. जिसपर रिसर्चर्स ने चेतावनी दी और कहा कि बच्चों की देखभाल के लिए दूसरों की मदद लेने के बजाए आराम के लिए डिजिटल डिवाइस पर ज़्यादा निर्भर हो सकते हैं, जिससे इमोशनल विकास पर असर पड़ सकता है.

बच्चों को नहीं देना चाहिए स्क्रीन टाइम

वहीं रिसर्चर्स ने ये बात भी लिखी कि हमारी रिसर्च के नतीजों से ये पता चलता है कि दो साल से कम उम्र के किसी भी बच्चे को स्क्रीन टाइम नहीं देना चाहिए. क्योंकि ये उनके स्वास्थ्य के लिए डेवलपमेंट के लिए अच्छा नहीं होगा. उन्होंने सरकार के लिए भी सलाह दी कि वीडियो कॉल या फिर सपोर्टेड लर्निंग जैसी शेयर्ड स्क्रीन एक्टीविटी की इजाजत देने पर सोचना चाहिए.

यह भी पढ़ेंः अब पूरे देश में एक जैसी होगी एम्बुलेंस सेवा! सरकार ने लॉन्च की NAS 2026 गाइडलाइंस, मां और बच्चों के लिए भी बड़ा प्लान

FAQs

Q1. क्या 2 साल से कम उम्र के बच्चों को मोबाइल देना चाहिए?

रिसर्च के अनुसार 2 साल से कम उम्र के बच्चों को नियमित स्क्रीन टाइम देने से बचना चाहिए.

Q2. बच्चों में ज्यादा स्क्रीन टाइम से क्या नुकसान हो सकते हैं?

भाषा सीखने में देरी, नींद की समस्या, आंखों पर असर, कम खेलना और माता-पिता से भावनात्मक जुड़ाव कम होना जैसी समस्याएं हो सकती हैं.

Q3. क्या वीडियो कॉल भी स्क्रीन टाइम में गिना जाता है?

रिसर्चर्स का कहना है कि वीडियो कॉल या माता-पिता के साथ की जाने वाली साझा (Shared) स्क्रीन गतिविधियों पर अलग से विचार किया जा सकता है.

Q4. बच्चों के लिए कितना स्क्रीन टाइम सही माना जाता है?

इस रिसर्च के अनुसार 2 साल से कम उम्र के बच्चों को स्क्रीन टाइम नहीं देना चाहिए.

(Disclaimer: यहां दी गई सलाह और ये कॉन्टेंट केवल सामान्य जानकारी के लिए पेश किया गया है. यानी ये जानकारी किसी भी तरह से डॉक्टर्स राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए आप किसी एक्सपर्ट्स या फिर जिस समस्या से जूझ रहे हैं, उस क्षेत्र के डॉक्टर से सलाह लेने के बाद ही उस एडवाइस पर अमल करें. Fit Rahe India इस जानकारी के लिए किसी भी जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है. इस तरह के कॉन्टेंट को देखने के लिए आप हमारे Youtube चैनल के साथ जुड़ सकते हैं.)

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sarthak arora Senior Sub Editor
अपनी उंगलियों से खबरों को खटाखट लिखना, और लिखने से पहले पढ़ना और समझना. इस तरह पत्रकारिता के क्षेत्र में 7 साल का अनुभव पाया. कार्य जारी है और इसी तरह लिखना, पढ़ना और सीखना निरंतर जारी रहेगा.
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