National Ambulance Services 2026: केंद्र सरकार लगातार हेल्थ सेक्टर में काम करते हुए अहम कदम उठा रही है. इसी कड़ी में हेल्थकेयर पहलों की शुरुआत की गई है. जिसका सीधा मकसद इमरजेंसी केयर को तेज करना, साथ ही मां और नवजात शिशु की हेल्थ को भी बेहतर बनाना है. साथ ही बच्चों के लिए बेहतर हेल्थकेयर पक्का करना है.
इसे लेकर नई दिल्ली में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा की अध्यक्षता में सेंट्रेल कांउसिल ऑफ हेल्थ एंड फैमिली वेलफेयर यानी CCHFW की 16वीं कॉन्फ्रेंस में इसकी घोषणा की गई है. दरअसल भारत के हेल्थकेयर को और मजबूती देने के लिए उनके तौर तरीकों पर चर्चा करने के लिए हर साल ऐसी कॉन्फ्रेंस में राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों के हेल्थ मीनिस्टर, सीनियर अधिकारी और साथ ही पॉलिसी बनाने वाले आते हैं.
क्या है इस कार्यक्रम का मकसद?
जानकारी के अनुसार इन तीन पहलों में नेशनल एम्बुलेंस सर्विस, सुमन रोडमैप 2030 और शिशु बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम शामिल हैं. इन तीनों कार्यक्रम का सीधा मकसद यही है कि हेल्थकेयर सिस्टम को अच्छी पहुंच देना और उसे बेहतर बनाना साथ ही भारत को 2030 तक अपने पब्लिक हेल्थ लक्ष्यों को पाने में मदद करना है.
सरकार ने जारी की गाइडलाइंस
आपको बता दें कि इमरजेंसी हेल्थ केयर को बेहतर बनाने के लिए नई नेशनल एम्बुलेंस गाइडलाइंस जारी की गई है. सबसे बड़ी घोषणाओं में से एक है नेशनल एम्बुलेंस सर्विसेज़ (NAS), 2026 पर ऑपरेशनल गाइडलाइंस का लॉन्च. नई गाइडलाइंस सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में एम्बुलेंस सर्विसेज़ को स्टैंडर्ड बनाने की कोशिश करती हैं.
जानकारी के अनुसार इसमें पॉलिसी में एम्बुलेंस कैटेगरी, इक्विपमेंट, स्टाफिंग, इमरजेंसी मेडिकल टेक्नीशियन यानी EMT ट्रेनिंग साथ ही गाड़ी मेंटेनेंस और उसके लिए एक स्टैंडर्ड प्रस्ताव दिए गए हैं. जिसमें जीपीएस वाली एम्बुलेंस ट्रैकिंग, इंटीग्रेटेड कमांड, डिस्पैच सेंटर और नेशनल इमरजेंसी हेल्पलाइन 112 को और भी बेहतर बनाने की सलाह रखी गई है. इसके पीछे का मकसद है कि रिस्पॉन्स टाइम कम होगा, इमरजेंसी के दौरान मरीजों को बेहतर देखभाल मिल पाएगी, साथ ही लोगों को समय पर इलाज मिल पाएगा, चाहें वो कहीं भी क्यों न रहते हों.
सुमन रोडमैप 2030 हुआ लॉन्च
वहीं कार्यक्रम में सरकार ने सुमन रोडमैप 2030 को भी लॉन्च किया है. जिससे उन जिलों में मदद मिल पाएगी जहां हेल्थ सुविधाएं मिल पाना सबसे अधिक बोझ है. ये मां और नवजात बच्चे की मौत को कम करने की एक स्ट्रैटेजी है. इस रोडमैप में प्रेग्नेंसी के हर स्टेज को फोकस शमिल है. जिसमें प्रेग्नेंसी से पहले की देखभाल और प्रसवपूर्व चेक-अप से लेकर बच्चे के जन्म और प्रसव के बाद की देखभाल शामिल है.
इसमें ज़्यादा रिस्क वाली प्रेग्नेंसी की बेहतर मॉनिटरिंग, ASHA वर्कर्स द्वारा तीसरी तिमाही में घर पर विज़िट, बेहतर रेफरल ट्रांसपोर्ट और मज़बूत इमरजेंसी ऑब्सटेट्रिक केयर शामिल हैं. कई राज्यों में ज़्यादा फोकस वाले ज़िलों पर खास ध्यान दिया जाएगा ताकि अच्छी मैटरनल हेल्थकेयर और इंस्टीट्यूशनल डिलीवरी तक पहुँच बेहतर हो सके.
जन्म से तीन साल वाले बच्चों के लिए बनाया गया कार्यक्रम
वहीं शिशु के स्वास्थ्य का खास ख्याल रखने के लिए एक खास कार्यक्रम बनाया गया है. जिसका नाम है समग्र शिशु बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (SSBSK) ये एक नया और नेशनल प्रोग्राम होने वाला है. जिसके तहत जन्म से तीन साल तक के बच्चों को फिजिकल और उनके दिमागी विकास के लिए जरूरी माना जाता है.
इस प्रोग्राम के तहत छोट बच्चों की हेल्थ से जुड़ी देखभाल को एक इंटीग्रेटेड सिस्टम के साथ जोड़ा गया है. इस प्रोग्राम में हाई रिस्क वाले बच्चों के लिए एक्ट्रा होम विजिट, वेल बेबी सेशन साथ ही महीने में एक बार हेल्थ कैंप, बच्चों की हेल्थ की डिजीटल ट्रैकिंग इतना ही नहीं जन्म से ही बच्चे की मेंटल हेल्थ की स्क्रीनिंग शुरू करना होगा. सरकार की इस पहल से बच्चे के जीवन के 1000 दिनों के दौरान हेल्थ डेवलपमेंट के लिहाज से उन्हें शुरुआती शिक्षा, पोषण और जिम्मेदार देखभाल को बढ़ावा देगा.
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