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दुनियाभर में 1.71 अरब लोग हाई बीपी की समस्या का शिकार! चौंकाने वाली रिसर्च आई सामने

Blood Pressure Control: कई लोग हाई ब्लड प्रेशर यानी हाइपरटेंशन की समस्या से परेशान रहते हैं. हालांकि पहले ये समस्या सिर्फ बुजुर्गों में देखी जाती थी.

Blood Pressure Control: कई लोग हाई ब्लड प्रेशर यानी हाइपरटेंशन की समस्या से परेशान रहते हैं. हालांकि पहले ये समस्या सिर्फ बुजुर्गों में देखी जाती थी. लेकिन अब ये सिर्फ बुजुर्गों तक सीमित नहीं रही है. क्योंकि लोगों का लाइफस्टाइल भी बदला है, स्ट्रेस बढ़ा है, मोटापा और गलत खान शुरू हो चुका है. नतीजा ये समस्या अब युवाओं में भी तेजी से बढ़ रही है.

आपको बता दें कि करोड़ों लोगों को पता भी नहीं है वो हाई बीपी का शिकार हैं. इसपर एक रिसर्च हुई है, ये रिसर्च जर्नल ऑफ अमेरिकन कॉलेज ऑफ कार्डियोलॉजी में भी प्रकाशित हो चुकी है. इस रिसर्च में खुलासा हुआ है कि साल 2020 में जहां दुनियाभर में करीब 1.71 अरब लोग हाई ब्लड प्रेशर की समस्या से प्रभावित थे ये संख्या अब बढ़कर लगभग 1.32 अरब लोगों तक पहुंच गई है. खासतौर पर लो और मीडियम आय वैले देशों में ये प्रॉब्लम सबसे आम है. हालांकि ऐसा नहीं है उच्च आय वाले देशों में ऐसे लोग नहीं है. वहां से भी 40 करोड़ लोगों की संख्या है.

हाई बीपी साइलेंट किलर क्यों कहा जाता है

एक्सपर्ट्स हाई ब्लड प्रेशर को साइलेंट किलर भी मानते हैं, इसकी वजह है कि इसके लक्षण शुरुआती स्टेज में दिखाई नहीं देते हैं. लेकिन ये अंदर ही अंदर हमारे माइंड, दिल, किडनी यहां तक की ब्लड वेसेल्स तक को नुकसान पहुंचा रही हैं. यही कारण है कि अगर लंबे समय तक ब्लड प्रेशर को कंट्रोल में न रखा जाए तो ये हार्ट अटैक, स्ट्रोक, किडनी फेलियर यहां तक की हार्ट डिजीज का खतरा कई गुना बढ़ा देती है.

बेहतर इलाज फिर भी आंकड़ा हाई

चौंकाने वाली बात ये है कि पिछले 20 सालों में उच्च आय वाले देशों में हाइपरटेंशन को लेकर जागरुकता बढ़ी है और इलाज भी कई हद तक बेहतर हुआ है. लेकिन अभी भी लो और मीडियम आय वाले देश ऐसे हैं जहां कंडिशन चिंतापूर्ण बनी हुई है. रिसर्च में बताया गया जहां साल 2020 में सिर्फ 20 प्रतिशत लोग ब्लड प्रेशर कंट्रोल्ड तरीके से रहता था, तो उच्च आय वाले देशों में करीब 40 प्रतिशत बीपी कंट्रोल्ड था. लेकिन जो गरीब देश हैं और डेवलपिंग वहां का आंकड़ा सबसे चौंकाने वाला 13.6 प्रतिशत तक रहा. इसपर रिसर्चर्स का कहना है कि , साल 2000 से 2020 के बीच अनकंट्रोल हाई बीपी वाले लोगों की संख्या निम्न और मध्यम आय वाले देशों में तेजी से बढ़ी है.

क्यों नहीं लग पा रहा हाई बीपी का पता

सवाल आता है कि आखिर आंकड़े इतने बढ़ रहे हैं, तो फिर भी इसे कंट्रोल में क्यों नहीं किया जा रहा. इसके पीछे का कारण है कि कई लोगों में इसके साफ लक्षण नहीं दिखाई देते हैं. जैसे लोगों को सिरदर्द, चक्कर, थकान, सांस फूलना जैसी समस्याएं तो होती हैं, लेकिन अधिकतर मामलों में बीमारी बिना संकेत के बढ़ती रहती है. यही वजह है कि रेगुलर बीपी चेक करने को क्यों जरूरी माना जाता है.

बात करें कि आखिर इसे कंट्रोल कैसे किया जाए तो काफी सरल है. अपनी डाइट से नमक को कम करें, रोजाना 30 मिनट वॉक करें, स्ट्रेस कम रखें, स्मोकिंग और शराब से दूरी बनाएं, वजन को कंट्रोल में रखें, रेगुलर अपने बीपी की मॉनिटरिंग करें. ऐसा रिसर्चर्स का भी मानना है कि अगर आप समय रहते जांच और इलाज शुरू करें तो हाई बीपी से होने वाली मौत के खतरे को रोक सकते हैं.

यह भी पढ़ें: एक मच्छर का काटना बन सकता बड़ी परेशानी! डेंगू को हल्के में लेना पड़ सकता भारी

(Disclaimer: यहां दी गई सलाह और ये कॉन्टेंट केवल सामान्य जानकारी के लिए पेश किया गया है. यानी ये जानकारी किसी भी तरह से डॉक्टर्स राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए आप किसी एक्सपर्ट्स या फिर जिस समस्या से जूझ रहे हैं, उस क्षेत्र के डॉक्टर से सलाह लेने के बाद ही उस एडवाइस पर अमल करें. Fit Rahe India इस जानकारी के लिए किसी भी जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है. इस तरह के कॉन्टेंट को देखने के लिए आप हमारे Youtube चैनल के साथ जुड़ सकते हैं.)

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sarthak arora Senior Sub Editor
अपनी उंगलियों से खबरों को खटाखट लिखना, और लिखने से पहले पढ़ना और समझना. इस तरह पत्रकारिता के क्षेत्र में 7 साल का अनुभव पाया. कार्य जारी है और इसी तरह लिखना, पढ़ना और सीखना निरंतर जारी रहेगा.
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