Blood Test Sample: कुछ लोगों को ब्लड टेस्ट करवाने से बहुत डर लगता है. जब वो जाते हैं, तो तमाम सवाल अपने मन में बनाने लगते हैं. लैब पहुंचते ही सामने एक टैक्नीशियन ट्यूब लेकर आता है और उसे भरना शुरू करता है. जो लोग नहीं डरते वो तो आराम से खून का सैंपल दे देते हैं. लेकिन जिन्हें डर लगता है, उनके मन में जरूर ये सवाल आता है कि आखिर कितना खून निकालेगा भाई?
क्योंकि आज हाई टेक लाइफ हो चुकी है. इलाज भी हाई टेक तरीकों से होता है, तो फिर क्यों इतना खून निकाला जाता है. क्योंकि मशीन है जिसे जांच के लिए इतना खून चाहिए भी या नहीं? ट्यूब को पूरा भरने के पीछे का क्या साइंस है क्या आप जानते हैं? आज इसी सवालों के जवाब हम आपके लिए लाए हैं.
रंग-बिरंगे ट्यूब्स का क्या है काम?
ये भी नोट किया होगा कि खून का सैंपल लेने के लिए कई रंग की ट्यूब्स का इस्तेमाल किया जाता है. इसके पीछे का कारण है कि इसमे एक खास कैमिकल होता है. सटीक रिपोर्ट के लिए केमिकल और खून का सही अनुपात होना जरूरी है. एक ही ट्यूब से कई तरह के टेस्ट किए जाे हैं. कई बार रिपोर्ट में शक पैदा होता है जिसके कारण दोबारा टेस्ट करने पड़ते हैं. आपसे बार-बार खून न लिया जाए और सुई न चुभोई जाए इसलिए उस ट्यूब को पूरा भर लिया जाता है, इतना ही नहीं जो खून ट्यूब में भरा जा रहा है वो आपके शरीर का 1 प्रतिशत खून भी नहीं होता. यानी अगर उतना खून निकला भी है तो आपको कई समस्या नहीं होगी कि आपको चक्कर आएगा या कुछ और.
एक ही ट्यूब से क्यों नहीं चलता काम?
अब कुछ लोगों का ऐसा भी मानना है कि आखिर एक ही ट्यूब से ही टेस्ट क्यों नहीं किया जाता? तो इसका जवाब है कि CBC, शुगर, थायरॉइड, लिवर और क्लॉिटिंग प्रोफाइल ये कुछ ऐसे टेस्ट हैं जिसमें अलग-अलग प्रकार की ट्यूब्स का इस्तेमाल किया जाता है. इन ट्यूब में अलग कैमिकल्स भी मौजूद होते हैं, जो सैंपल को सेफ रखने और सही रिजल्ट्स देने में हमारी मदद करते हैं. यही वजह है कि एक ही बार में कई ट्यूब में खून लिया जाता है.
ज्यादा क्यों लगता है सैंपल ब्लड?
वही अगर बात करें कि आखिर इतना ज्यादा खून क्यों निकाला जाता है तो इसका कारण है कि ब्लड टेस्ट के लिए लिया गया सैंपल सीधे मशीन में नहीं जाता है. सबसे पहले खोन को एक खास तरह की ट्यूब में जमा किया जाता है. फिर उसे प्रोसेस करके सीरम या प्लाज्मा अलग किया जाता है. इस प्रक्रिया के दौरान सैंपल का केवल एक हिस्सा ही जांच के लिए इस्तेमाल होता है. साफ शब्दों में कहे कि भले ही मशीन कम मात्रा में खून का सैंपल ले रही हो लेकिन पूरे प्रोसेस को पर्याप्त सैंपल की ही जरूरत पड़ती है.
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