World IVF Day 2026: हर साल दुनियाभर में आज यानी 25 जुलाई को वर्ल्ड आईवीएफ डे के रूप में मनाया जाता है. इसका मकसद साफ है कि लोगों को IVF के बारे में जागरूक किया जाए. हालांकि पिछले कुएच सालों से IVF करवाने वालों की संख्या बढ़ती देखी जा रही है.
IVF जैसी तकनीक ने उन लोगों की समस्या हल कर दी है जिन्होंने कभी मां-बाप बनने का सपना तो देखा था लेकिन किसी न किसी प्रॉब्लम के कारण उनके सपने पूरे नहीं हो सकते थे. ऐसे पेरंट्स की जिंदगी इस तकनीक ने बदल दी है. इस तकनीक की सलाह डॉक्टर्स खासतौर पर तभी ही देते हैं जब मेडिकल जांच में दोनों माता-पिता को पता चले कि सामान्य इलाज के बाद भी चांस कम है.
इन देशों में होता अधिक इस्तेमाल
वहीं यूरोप, एशिया, उत्तरी अमेरिका में इस तकनीक का सबसे अधिक इस्तेमाल होता है. रिपोर्ट्स बताती है कि एशिया में एआरटी तकनीक का उपयोग तेजी से बढ़ा है. आज आईवीएफ कई कपल्स के लिए उम्मीद की किरण बन चुका है. हालांकि ये मान लेना कि इस तकनीक से सब ठीक हो ही जाएगा. यानी तकनीक सफल हो जाएगी. ऐसा गलत होग. क्योंकि कपल्स की लाइफस्टाइल, खानपान, मेंटल हेल्थ ये सब कैसी हैं इलाज में ये भी काफी अहम रोल प्ले करता है.
कब लेनी चाहिए एक्सपर्ट्स की सलाह
एक्सपर्ट्स कहते हैं कि अगर किसी कपल्स को एक साल तक कंसीव करने में समस्या हो रही है तो उन्हें फर्टिलिटी एक्सपर्ट का रुख करना चाहिए और उनसे सलाह लेनी चाहिए. वहीं 35 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाओं के मामले में यह समय छह महीने माना जाता है. अब कुछ लोग ये मानते हैं कि बांझपन की समस्या सिर्फ महिलाओं की समस्या होती है. लेकिन ऐसा नहीं होता है. एक्सपर्ट्स के अनुसार बांझपन केवल महिलाओं की समस्या नहीं. कई मामलों में पुरुषों से जुड़े भी कारण जिम्मेदार हो सकते हैं. इसलिए इलाज के लिए दोनों ही पार्टनर की जांच होती है जो जरूरी भी होता है.
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(Disclaimer: यहां दी गई सलाह और ये कॉन्टेंट केवल सामान्य जानकारी के लिए पेश किया गया है. यानी ये जानकारी किसी भी तरह से डॉक्टर्स राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए आप किसी एक्सपर्ट्स या फिर जिस समस्या से जूझ रहे हैं, उस क्षेत्र के डॉक्टर से सलाह लेने के बाद ही उस एडवाइस पर अमल करें. Fit Rahe India इस जानकारी के लिए किसी भी जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)

