Cancer Drug Price Hike: केंद्र सरकार ने कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली कुछ जरूरी दवाओं और वैक्सीनों की कीमतों में बढ़ोतरी कर दी है. इसके साथ ही एंटी-टेटनस इम्यूनोग्लोबुलिन इंजेक्शन की अधिकतम कीमत भी बढ़ा दी गई है. इस बदलाव को लेकर आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी गई है.
राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (NPPA) ने कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दो महत्वपूर्ण दवाओं कार्बोप्लाटिन (Carboplatin) और सिस्प्लाटिन (Cisplatin) की कीमतों में लगभग 50% तक बढ़ोतरी की है.
नई कीमतें इस प्रकार हैं:
- कार्बोप्लाटिन 10 mg/ml: अब ₹90.74 प्रति ml
- सिस्प्लाटिन 1 mg/ml: अब ₹10.89 प्रति ml
ये दोनों दवाएं कीमोथेरेपी में कई प्रकार के कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होती हैं.
कीमत क्यों बढ़ाई गई?
एक्सपर्ट्स के अनुसार, ये दवाएं “प्लैटिनम आधारित” होती हैं और इनके निर्माण में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल (raw materials) की कीमत दुनिया भर में बढ़ गई है.
इसके अलावा:
- प्लेटिनम की अंतरराष्ट्रीय कीमत बढ़ी है
- आयात महंगा हुआ है
- पश्चिम एशिया में तनाव से सप्लाई पर असर पड़ा है
भारत इन सामग्रियों का अधिकतर हिस्सा आयात करता है, इसलिए दवाओं की लागत भी बढ़ गई.
वैक्सीन की कीमतों में भी बदलाव
सरकार ने कुछ जरूरी वैक्सीन की कीमतों में भी बढ़ोतरी की है:
- बीसीजी वैक्सीन: ₹8.20 → ₹9.89 प्रति डोज
- खसरा-रूबेला (MR) वैक्सीन: ₹72.90 → ₹87.93 प्रति वायल
- खसरे का टीका: ₹51.40 → ₹62 प्रति वायल
इन कीमतों में 2026 के लिए थोक मूल्य सूचकांक (WPI) का असर भी शामिल है.
एंटी-टेटनस इंजेक्शन भी हुआ महंगा
सरकार ने एंटी-टेटनस इम्यूनोग्लोबुलिन इंजेक्शन की कीमत भी बढ़ा दी है, जो टेटनस संक्रमण से बचाव में काम आता है.
नई कीमतें:
- 250 IU: ₹1,912.02 प्रति वायल
- 500 IU: ₹2,881.19 प्रति वायल
16 अन्य दवाओं के भी नए दाम तय
NPPA ने 16 अन्य दवाओं की नई रिटेल कीमतें भी तय की हैं, जिनमें शामिल हैं:
- आई ड्रॉप्स
- ब्लड प्रेशर की दवाएं
- हार्ट की दवाएं
कुछ दवाओं की कीमतें बढ़ाई गई हैं, जबकि कुछ की कीमतों में कमी भी आई है.
नियमों का पालन जरूरी
सरकार ने साफ कहा है कि:
- दवाओं की नई कीमतों में GST शामिल नहीं है
- GST अलग से जोड़ा जाएगा
- कंपनियों को नए दाम पैकिंग पर अपडेट करने होंगे
- सभी जानकारी राज्य औषधि विभाग को देनी होगी
अगर कोई कंपनी नियम तोड़ती है तो उस पर सख्त कार्रवाई होगी और अतिरिक्त पैसा ब्याज सहित वापस करना होगा.
दवाएं महंगी क्यों हो रही हैं?
सरकारी अधिकारियों के अनुसार:
- कच्चे माल की कीमत बढ़ गई है
- आयात महंगा हो गया है
- डॉलर के भाव में उतार-चढ़ाव है
- उत्पादन और ट्रांसपोर्ट खर्च बढ़ गया है
इन्हीं कारणों से कंपनियों ने दाम बढ़ाने की मांग की थी.
मरीजों पर क्या असर पड़ेगा?
इस फैसले का सीधा असर मरीजों की जेब पर पड़ेगा, क्योंकि इलाज में इस्तेमाल होने वाली कुछ दवाएं अब महंगी मिलेंगी।
हालांकि सरकार का कहना है कि:
दवाओं की उपलब्धता बनी रहे
मरीजों को इलाज में कोई कमी न हो
इसलिए कीमतों में संशोधन किया गया है.
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