Sehat Ki Khabar: नमस्कार फिट रहे इंडिया की लेटेस्ट अपडेट्स में आपका स्वागत है. क्या आपको पता है कि दिल की नसें फट भी सकती है. क्या होती है ये बीमारी? जिसके कारण मशहूर निशानेबाज जसपाल राणा का हुआ निधन. सेहत की पहले सेगमेंट में आपको बताएंगे कार्डियक रप्चर यानी दिल की नसों के फटने के बारे में.
भारत में हर साल 10 हजार से भी अधिक बच्चे थैलेसीमिया के साथ जन्म लेते हैं. क्यों होता है ऐसा? खून की ऐसी बीमारी, जिसे पैदा होने से पहले रोका जा सकता है. इस पर बात करेंगे सेहत की खबर के दूसरे सेगमेंट में.
भारत ने मीजल्स से मालदीव को राहत दिलाने के लिए 20 हजार वैक्सीन और मेडिकल सप्लाई भेजी है. मीजल्स वाले लाल दाने कैसे फैलते है. जानेंगे सेहत की खबर के तीसरे और आखिरी सेगमेंट में. चलिए शुरू करते हैं.
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जसपाल राणा का हुआ निधन
खेल जगत से एक दुखभरी खबर सामने आई है. दरअसल भारत के पूर्व दिग्गज निशानेबाज और कोच जसपाल राणा का निधन हो गया है. उनका निधन नई दिल्ली के मैक्स अस्पताल में इलाज के दौरान हुआ. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार जसपाल राणा हार्ट अटैक का शिकार हुए थे. हालांकि उन्हें अस्पताल में भी भर्ती करवाया गया था.
जानकारी है कि जिस समय उनकी तबियत खराब हुई उस दौरान वो जर्मनी के म्यूनिक में आयोजित ISSF वर्ल्ड कप से भारतीय टीम के साथ लौट रहे थे. उसी दौरान उनकी तबियत खराब हो गई थी. जिसके बाद उन्हें अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती करवाया गया था. उस समय भी उनकी हालत काफी गंभीर थी. जानकारी है कि उन्हें 3 दिन पहले हार्ट अटैक भी आया था. जिससे सफर के दौरान भी सीने में लगातार दर्द बना हुआ था. हार्ट अटैक का इलाज तो हो गया लेकिन कुछ टाइम बाद ही उनके दिल की एक नस अचानक फटने की वजह से उनकी मृत्यु हो गई.
1.5 लाख लोग बीटा थैलेसीमिया जीन के कैरियर है
दुनियाभर में लगभग 1.5 प्रतिशत लोग बीटा थैलेसीमिया जीन के कैरियर है. अकेले भारत में हर साल 10 हजार से भी अधिक बच्चे थैलेसीमिया मेजर के साथ जन्म लेते हैं. पहले जान लेते हैं कि थैलेसीमिया क्या होता है? तो बता दें कि ये एक जेनेटिक ब्लड डिसऑर्डर है.
ये डिसऑर्डर माता-पिता से बच्चों में ट्रांसफर होता है. ये एक ऐसी बीमारी है जिसमें शरीर नॉर्मल हीमोग्लोबिन यानी रेड ब्लड सेल्स में पाए जाने वाला प्रोटीन जो ऑक्सीजन ले जाता है. उसे डेवलप ही नहीं कर पाता है. अगर इसकी कंडिशन गंभीर हो जाए तो ये एनीमिया यानी खून की कमी का रूप ले लेता है. शायद अब आप समझ गए होंगे कि भारत में 10 हजार से भी अधिक बच्चे इस समस्या के साथ जन्म लेते हैं.
भारत ने की मालदीव की मदद
भारत सरकार ने मालदीव सरकार की मदद की है. जानकारी है कि गुरुवार को खसरे के टीके की 20 हजार डोज और लगभग तीन टन मेडिकल मेटीरियल भेजा है. जिससे कि टीकाकरण का दायरा बढ़ाया जाए और लोगों की हेल्थ का खास ख्याल रखा जाए. इस बात की जानकारी विदेश मंत्रालय की ओर से दी गई है.
विदेश मंत्रालय ने बताया कि भारत ने गुरुवार यानी 11 जून 2026 को खसरे के टीके की 20 हजार डोज और लगभग तीन टन मेडिकल सप्लाई की एक खेप मालदीप सरकार को भेजी है. ताकि सरकार को उसके इम्यूनाइजेशन कवरेज को मजबूत करने और पब्लिक हेल्थ सेफ्टी में मदद मिल सके. विदेश मंत्रालय के मुताबिक भारत की समय पर मदद मालदीव को खसरे के बढ़ते हुए मामलों ले निपटने और सरकार की कोशिशों को भी मजबूत करने में मदद करेगी.
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